Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers PDF in Hindi

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Economics Class 12 Important Questions Answers in Hindi

Class12th 
ChapterImportant Model Question Paper
BoardHidi Board
Book NCERT
SubjectEconomics
Medium Hindi
Study MaterialsFree Study Materials

class 12 Economics most important objective questions in Hindi

Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers PDF in Hindi

Q. 1. सीमांत आगम क्या है? (What is Marginal Revenue?)

Ans. उत्पाद की एक अतिरिक्त इकाई का विक्रय बढ़ाने पर कुल आगम में जितनी वृद्धि होती है उसे सीमान्त आगम कहते हैं।- 

Q. 2. स्थिर की साधन क्या है? (What is fixed factor?) 

Ans. कुछ साधनों में अल्पकाल में परिवर्तन संभव नहीं है। इन साधनों दीर्घकाल में परिवर्तन संभव है। जैसे- भूमि, मशीनरी इन्हें स्थिर साधन कहते हैं।

Q. 3. एकाधिकार बाजार में फर्मों की संख्या कितनी होती है? (How many firms are there in the monopoly market?)

Ans. एक।

Q. 4. बजट रेखा का रेखाचित्र बनायें। (Draw the graph of a budget line.)

 Ans.स्वयं करे

Q. 5. किस बाजार में AR MR होता है। (In which market does the condition AR = MR prevail ?)

Ans. पूर्ण प्रतियोगिता।

Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers

Q. 6. अवसर लागत क्या है? (What is opportunity cost?)

Ans. अवसर लागत उपलब्ध विकल्पों में सर्वाधिक निकटतम संभव विकल्प की लागत होती है। अवसर लागत का अभिप्राय उपलब्य विकल्पों में से दूसरे सर्वश्रेष्ठ विकल्प का मूल्य है। जैसे मान लेते हैं, निम्नलिखित वेतनं के साथ 3 रोजगार उपलव्य है-

A-600 रु., B-500 रु., C-400 रु.

यहाँ पहला सर्वश्रेष्ठ उपयोग मूल्य 600 रु. का है तथा दूसरा सर्वश्रेष्ठ उपयोग मूल्य 500 रु. का है। अतः यहाँ A के चुनाव की अवसर लागत 500 रु. है। इसी प्रकार B के चुनाव की अवसर लागत 400 रु. है।

Q. 7. माँग को प्रभावित करने वाले किन्हीं तीन कारकों को बतायें। (Explain any three factors affecting demand.)

Ans. माँग को प्रभावित करने वाले कारक- 

(i) वस्तु की कीमत-वस्तु की बाजार माँग, वस्तु की अपनी कीमत से बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। किसी

वस्तु की कीमत जितनी ऊँची होती है उसकी बाजार माँग उतनी कम होती है। इसके विपरीत वस्तु की कीमत जितनी कम होती है उसकी बाजार माँग उतनी ज्यादा होती है।

(ii) उपभोक्ताओं की संख्या बाजार में किसी वस्तु के जितने अधिक केता होते है उसकी बाजार मांग उतनी ज्यादा होती है। इसके विपरीत किसी वस्तु के जितने कम उपभोक्ता होते हैं उसकी बाजार मौन उतनी कम होती है।

(iii) आय का वितरण-वस्तु की बाजार माँग पर आय वितरण का भी प्रभाव पड़ता है। आय का वितरण जितना अधिक समान होगा बाजार माँग उतनी ज्यादा होगी। इसके विपरीत आय के वितरण में जितनी अधिक असमानता होगी बाजार माँग उतनी कम होगी।

Q. 8. पूर्ति का नियम क्या है? (What is the law of supply ?) 

Ans. पूर्ति का नियम यह बताता है कि अन्य बातें समान रहे तो वस्तु की कीमत तथा पूर्ति में बनात्मक सम्बन्ध पाया जाता है। अर्थात् ज्यों-ज्यों बस्तु की कीमत बढ़ती है, इसकी पूर्ति भी बढ़ती है। ‘अन्य बातें समान रहे’ की मान्यता का अर्थ है कि कीमत के अलावा

‘अन्य तत्व स्थिर रहे’। 

इसमें अन्य पदार्थों की कीमत, आगतों की कीमतें, सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतों तथा करों में परिवर्तन, भविष्य सम्बन्धी सम्भावनाएँ तथा उत्पादन तकनीक आदि स्थिर रहे। 

इसे पूर्ति का नियम कहते हैं। पूर्ति के नियम को पूर्ति अनुसूची व् वक्र की सहायता से समझाया जा सकता है-

पूर्ति अनुसूची विभिन्न कीमतों है। जैसे-जैसे कीमतों में पर वस्तु की दर्शाती है। बढ़ोतरी होती है, है। पूर्ति वक्र का ढाल धनात्मक है जो इस बात को वस्तु की कीमत बढ़ने पर बढ़ जाती है। तो पूर्ति की मात्रा भी बढ़ती दर्शाता है कि पूर्ति की मात्रापूर्ति की गई मात्राओं को

Q. 9. आर्थिक वस्तुओं और निःशुल्क वस्तुओं में सोदाहरण अंतर समझायें। (Distinguish between economic goods and free goods with example.)

Ans. आर्थिक वस्तु वह वस्तु है जिसके उपभोग के बदले हमें मूल्य चुकाना पड़ता है। जैसे-गेहूं, चावल, कपड़ा आदि। निःशुल्क वस्तु तुवे वस्तुएँ हैं जो हमें प्रकृति से प्राप्त हैं जैसे-नदी का पानी, हवा आदि। इनके उपभोग के बदले हमें किसी प्रकार का मूल्य नहीं देना पड़ता है, अतः ये निःशुल्क वस्तु है। 

सरकार द्वारा प्रदत्त कुछ सेवाएँ भी निःशुल्क होती है, जैसे-स्कूलों में मध्यकालीन भोजन, निःशुल्क चिकित्सा सेवा आदि। परन्तु इन वस्तुओं के उत्पादन में किसी-न-किसी को लागत वाहन करना ही पड़ता है इसलिए ये आर्थिक वस्तुएँ भी कहलाती है। 

Q. 10. ‘संतुलन कीमत’ क्या है? रेखाचित्र बनायें। (What is ‘equilibrium price’ ? Give diagram.)

Ans. संतुलन कीमत (Equilibrium Price) संतुलन कीमत कीमत वह कीमत है जिस पर मांग तथा पूर्ति एक-दूसरे के बराबर होते है या जहाँ क्रेतागों की खरीद या P विक्रेताओं की विक्री एक-दूसरे के समान होती है। पूर्ण प्रतियोगी बाजार में संतुलन कीमत का निर्धारण माँग P तथा पूर्ति की शक्तियों द्वारा होता है। संतुलन कीमत उस बिन्दु पर निर्धारित होती है जहाँ बाजार मांग, O बाजार पूर्ति के बराबर हो जाती है।

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Q. 11. माँग की मूल्य लोच की परिभाषा दें। (Define price elasticity of demand.)

Ans. कीमत में परिवर्तन के परिणामस्वरूप माँगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन तथा कीमत में प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात को माँग की कीमत लोच कहते हैं।

माँग की कीमत लोच – माँगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में प्रतिशत परिवर्तन

Q. 12. उत्पादक के संतुलन को कुल आगम रेखा और कुल लागत रेखा की मदद से दिखलायें। रेखाचित्र का प्रयोग कीजिए। (Show producer’s equilibrium witht he help of Total Revenue curve (TR) and Total cost curve (TC). Use diagram.)

Ans: स्वयं करे

Q. 13. परम लाम क्या है? (What is maximum profit?) 

Ans. परम लाभ-परम लाभ वह लाभ है जो किसी वस्तु को बेचने से प्राप्त होती है। परम लाभ इतना अवश्य होना चाहिए जिससे विक्रेता को संतुष्टि हो और उपभोक्ता भी खुश रहे। उदाहरण यदि एक कलम का दाम 5 रु. लागत मूल्य है तो अगर इसे 66. में बेचा जाये तो परम लाभ विक्रय मूल्य घटाव लागत मूल्य होगा। अर्थात (6-5-1) रु. परम लाभ होगा। परम लाभ को अधिकतम लाभ भी कहते हैं।

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Q. 14. पूर्ण प्रतियोगिता से आप क्या समझते हैं? पूर्ण प्रतियोगिता कें अंतर्गत एक फर्म के अल्पकालीन संतुलन की शर्तों की व्याख्या करें। (What do you mean by perfect competition? Discuss the conditions

of short-run equilibrium of a firm under perfect competition.) 

Ans. पूर्ण प्रतियोगिता-पूर्ण पतियोगिता बाजार की वह स्थिति है जिसमें किसी वस्तु के बहुत से क्रेता तथा विक्रेता होते हैं। विक्रेता समरूप वस्तु को एक समान कीमत पर बेचते हैं, कीमत फर्म पर निर्धारिरत नहीं की जाती बल्कि उद्योग द्वारा निर्धारित होती है।

पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म के संतुलन की शर्त-अल्पकाल समय की यह अवधि है जिसमें केवल परिवर्तनशील साधनों का अधिक उपयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है तथा स्थिर साथन स्थिर ही बने रहते हैं, स्थिर साधनों में इसलिए परिवर्तन नहीं हो पाता क्योंकि समय की अवधि इतनी कम होती है

कि उनमें परिवर्तन करना संभव नहीं है। एक पूर्ण प्रतियोगी फर्म संतुलन की अवस्था में उस बिन्दु पर पहुँचती है जहाँ सीमांत लागत बढ़ती हुई स्थिति में कीमत रेखा को काटती है।

Q. 15. एक वस्तु के संदर्भ में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या करें। (Explain consumer’s equilibrium in case of a single commodity.)

Ans. (i) उपभोक्ता विवेकशील है-उपभोक्ता अपनी संतुष्टि को अधिकतम करने की चेष्टा करता है। इसलिए वह दो वस्तुओं पर बहुत सोच समझ कर व्यर्य करता है।

(ii) उपभोक्ता की तटस्थता वक्र निश्चित है-उपभोक्ता दो वस्तुओं के विभिन्न संयोगों (बंडलों) का पूर्व निर्धारण कर लेता है।

(iii) वस्तुएँ समरूप तथा विभाज्य है तथा वस्तुओं की कीमतें स्थिर हैं। 

(iv) उपभोक्ता की आय के अनुसार बजट रेखा (कीमत रेखा) निर्धारित है तथा उपभोक्ता अपना सम्पूर्ण बजट इन दो वस्तुओं पर खर्च करता है। 

Or, कुल उत्पाद और सीमान्त उत्पाद वक्रों की सहायता से परिवर्ती अनुपात का नियम समझाइए। (Explain the law of variable proportion with the help of Total Product and Marginal Product Curves.)

Ans. अर्थशास्त्र में परिवर्ती अनुपातों का नियम एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इस नियम से अल्पकालीन उत्पादन फलन को स्पष्ट किया जा सकता है जिसमें अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर किसी एक साधन की मात्रा में परिवर्तन किया जाता है। एक परिवर्तनशील साथन की अतिरिक्त इकाई लगाने पर उत्पादन की अतिरिक्त मात्रा पिछली इकाई में प्राप्त उत्पादन की मात्रा से अधिक, बराबर या कम हो सकता है। वास्तव में यह घटनाक्रम ही परिवर्तनशील अनुपातों का नियम है। 

मान्यताएँ (Assumptions)- यह नियम निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित

(i) अन्य साथन स्थिर तथा एक साधन परिवर्तनशील होता है।

(ii) उत्पादन के साधनों के अनुपात में परिवर्तन करना सम्भव है।

(iii) उत्पादन की तकनीक में कोई परिवर्तन नहीं होता।

(iv) परिवर्तनशील साथन की सभी इकाइयाँ एक जैसी (समरूप) होती हैं।

Q.16. माँग की लोच को मापने की विभिन्न विधियों का वर्णन करें। (Explain the different methods of measuring price elasticity of demand.)

Ans. माँग की लोच मापने की विभिन्न विधियाँ-

(a) प्रतिशत या आनुपातिक माप-इस प्रणाली में माँग की लोच मापने की विधि इस प्रकार है-

माँग की लोच = माँग में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में प्रतिशत परिवर्तन

(i) यदि इसका मान 1 के बराबर होगा तो समलोचदार माँग होगी। (ii) यदि इसका मान 1 से अधिक होगा तो लोचदार माँग होगी।

(iii) यदि इसका मान 1 से कम होगा तो बेलोचदार माँग होगी। 

(b) कुल व्यय प्रणाली- यह प्रणाली प्रो. मार्शल के द्वारा प्रतिपादित किया गया है। इस प्रणाली में किसी वस्तु पर मूल्य में परिवर्तन होने से कुल व्यय में जो परिवर्तन होता है, उसके आधार पर माँग की लोच मापा जाता है। इस विधि के अनुसार माँग की लोच इकाई के बराबर, इकाई से कम या इकाई से अधिक हो सकती है।

(i) इकाई के बराबर लोच-जब कीमत में परिवर्तन होने पर कुल व्यय अपरिवर्तित होता है तो माँग की लोच इकाई के बराबर कहलाएगी।

(ii) जब कीमत में वृद्धि होती है तो कुल व्यय कम होता है और कीमत में कमी होती है तो कुल व्यय बढ़ता है तब इसे इकाई से अधिक लोच कहते हैं। (iii) इकाई से कम लोच-जब कीमत में कमी होने पर कुल व्यय कम होता है और की मत में वृद्धि होने पर कुल व्यय बढ़ता है तो माँग की लोच इकाई से कम कहलाएगी।

Q. 17. समष्टि-अर्थशास्व क्या है? (What is Macro-Economics?)

Ans. समष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की यह शाखा है जिसमें समस्त अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्याओं (विषयों) का अध्ययन किया जाता है। 

Q. 18. कर की परिभाषा दें। (Define Tax.) 

Ans. आधुनिक सरकारों की आय का सबसे बड़ा साथन कर है। कर एक अनिवार्य भुगतान है जिसे सरकार व्यक्तियों और उद्यमों पर लगाकर आय प्राप्त करती है और प्राप्त आय जनता को सामान्य लाभ पहुँचाने के लिए खर्च की जाती है।

Q. 19. बंद अर्थव्यवस्था क्या है? (What is a closed economy?)

Ans. जब व्यापार तथा उत्पादन और आय तथा व्यय देश की घरेलू सीमा के अंदर हो तो उसे बंद अर्थव्यवस्था कहते हैं। 

Q. 20. विनियोग क्या है? (What is investment?) 

Ans. विनियोग-विनियोग से अभिप्राय उस व्यय से है है जो पूँजीगत। पदार्थों जैसे-मशीन, कारखानों, मकानों आदि में वृद्धि करने के लिए किया जाता है। निवेश से अभिप्राय पूँजीगत पदार्थों में होने वाली वृद्धि से है।

निजी क्षेत्र में उद्यमी द्वारा लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से विनियोग किया जाता है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में विनियोग सामाजिक कल्याण तथा आर्थिक विकास के उद्देश्य से किया जाता है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं है।

Q. 21. निर्यात और आयात क्या है? (What are export and import?) 

Ans. निर्यात-जब देश में उत्पादित वस्तुएँ बिकने के लिए विदेशों में जाती है तो उसे निर्यात कहते हैं आयात-जब विदेशों से निर्मित वस्तु आवश्यकता पूर्ति के लिए देश के भीतर आती है तो उसे आयात कहते हैं।

Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers

Q. 22. मुद्रा की आपूर्ति क्या है? (What is supply of money?) 

Ans. अर्थव्यवस्था में सभी प्रकार की मुद्राओं के योग को मुद्रा की आपूर्ति कहते हैं। मुद्रा की आपूर्ति में दो बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

(i) मुद्रा की आपूर्ति एक स्टॉक है। यह किसी समय बिन्दु के उपलब्ध मुद्रा की सारी मात्रा को दर्शाता है।

(ii) मुद्रा के स्टॉक से अभिप्राय जनता द्वारा धारित स्टॉक से है। जनता द्वारा धारित स्टॉक समस्त स्टॉक से होता है। भारतीय रिजर्व बैंक देश में मुद्रा की आपूर्ति के चार वैकल्पिक मानों के आँकड़े प्रकाशित करता है। ये मान क्रमशः (M, M., M, M) है।

जहाँ M, = जनता के पास करेन्सी + जनता की बैंकों में में माँग जमाएँ

M = M + डाकघरों के बचत बैंकों में बचत जमाएँ

M = M + बैंकों की निवल समयावधि योजनाएँ

M = M + डाकघर बचत संगठन की सभी जमाएँ

Q. 23. प्रतिगामी-कर क्या है? (What is Regressive Tax?) 

Ans. वह कर जिसमें आय बढ़ने पर कर की दर घट जाती है तथा आय घटने पर कर की दर बढ़ जाती है उसे प्रतिगामी कर कहते हैं। प्रतिगामी कर का भार अमीर व्यक्तियों पर कम पड़ता है तथा गरीब व्यक्तियों पर इसका अधिक भार पड़ता है।

Q. 24. सकल घरेलू उत्पाद तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद में क्या अंतर है? (What is the difference between Gross Domestic Product (GDP) and Gross National Product (GNP) ?)

Ans. एक अर्थव्यवस्था में एक वर्ष की अवधि में उसकी घरेलू सीमाओं के अंदर जितनी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है, उसके कुल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से यदि मूल्य-हास (Depreciation) को घटा दें तो जो शेष राशि बचती है उसे शुद्ध घरेलू उत्पाद कहते हैं।

Q. 25. विनिमय दर क्या है? (What is Exchange Rate ?)

A विनिमय दर वह दर है जिस पर एक देश की एक मुद्रा इकाई का दूसरे देश की मुद्रा में विनिमय किया जाता है। दूसरे शब्दों में, विदेशी विनिमय दर यह बताती है कि किसी देश की मुद्रा की एक इकाई के बदले में दूसरे देश की मुद्रा की कितनी इकाइयाँ मिल सकती हैं।

क्राठथर के अनुसार “विनिमय दर एक देश की इकाई मुद्रा के बदले में दूसरे देश की मुद्रा की मिलने वाली इकाइयों की माप है।”

Q. 26. व्यापार शेष क्या है? (What is Balance of Trade?)

Ans. व्यापार संतुलन या व्यापार शेष (Balance of Trade): भौतिक मदों या दृश्य मदों या वस्तुओं के आयात-निर्यात के अंतर को ‘व्यापार शेष’ कहा जाता है।

व्यापार शेष दृश्य निर्यात- दृश्य आयात इसमें जहाजरानी, बैंकिंग, बीमा, ब्याज और लाभांश तथा पर्यटन सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता है।

Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers

Q. 27. सीमांत उपभोग प्रवृत्ति क्या है? इसे कैसे मापा जाता है?

Ans. औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC) कुल उपभोग तथा कुल आय के अनुपात को औसत उपभोग प्रवृत्ति कहा जाता है। अर्थात् APC = Y

जहाँ, C = कुल उपभोग तथा Y = समग्र आय

में सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति (MPC) आय में परिवर्तन के कारण उपभोग परिवर्तन होता है तथा दोनों के परिवर्तन के अनुपात को सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहा जाता है।

अर्थात् MPC = AC

जहाँ AC = उपभोग में परिवर्तन,

AY = आय में परिवर्तन 

Q. 28. विनियोग गुणक क्या है?

Ans. विनियोग गुणक-विनियोग में वृद्धि के फलस्वरूप राष्ट्रीय आय में वृद्धि के अनुपात को विनियोग गुणक कहते हैं। सूत्र के रूप में-

आय में परिवर्तन (AY)

विनियोग गुणक (K) = विनियोग में परिवर्तन (AN)

संक्षेप में, विनियोग गुणक गुणक से अभिप्राय विनियोग में परिवर्तन और आय में परिवर्तन के अनुपात से है।

Q. 29. ऐच्छिक बेरोजगारी तथा अनैच्छिक बेरोजगारी की व्याख्या करें। (Explain voluntary and involuntary unemployment.)

Ans. ऐच्छिक बेरोजगारी से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है, जो काम करने के इच्छुक नहीं होते हैं लेकिन उनके लिए पर्याप्त एवं सही कार्य उपलब्ध रहता है।नहीं किया जाता है।या पर इसका अधिक अर्थात् ये अपनी इच्छा से बेरोजगार रहते हैं। 

अनैच्छिक बेरोजगारी तब होती है, जब कार्य करने की इच्छा रखने वाले को प्रचलित मजदूरी दर पर तार्य नहीं मिलता है। अर्थात ये अपनी इच्छा के विरुद्ध बेरोजगार रहते हैं। इसे देश के मजदूर सक्ति में शामिल किया जाता है।

Economics Class 12 Important Questions 2024 With Answers

Q. 30. भुगतान शेष में असंतुलन होने के कारण बताइए। 

Ans. भुगतान शेष में असंतुलन के निम्नलिखित कारण हैं-

(i) एक देश का वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात, आयात से कम ज्यादा होने पर। यदि निर्यात का मूल्य आयात से अधिक होगा तो भुगतान शेष पक्ष का होगा लेकिन यदि निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से कम होगा तो भुगतान शेष प्रतिकूल होता है।

(ii) एक देश को विदेशों में प्राप्त अंतरण भुगतान प्राप्ति एवं व्यय की असमानता। यदि देश को अंतरण भुगतान प्राप्त होते हैं तो जमा में और यदि देश अंतरण भुगतान देता है तो ये नामे में दर्शाए जाते हैं। यदि एक देश को अंतरण भुगतान से विदेशों से प्राप्त अंतरण ज्यादा होते हैं तो भुगतान शेष पक्ष का होगा। इसके विपरीत यदि देश के अंतरण भुगतान व्यय प्राप्ति की तुलना में ज्यादा होते हैं तो भुगतान शेष पक्ष का होता है। समष्टीय आधार पर भुगतान शेष संतुलन में होता है। भुगतान शेष में असंतुलन चालू खाते एवं अंतरण खातों के असंतुलन की वजह से होता है।

Or, एक रेखाचित्र की सहायता से स्फीतिक अंतराल की अवधारणा को-समझाइए। (Discuss the concept of inflationary gap with the help of a diagram.)

Ans. किसी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार संतुलन की स्थिति को बनाये रखने के लिए जितनी कुल माँग की आवश्यकता होती है यदि कुल माँग उससे अधिक हो तो इनके अन्तर को स्फीतिक अन्तराल कहा जाता है।

इसे कम करने के लिए रोजगार में वृद्धि करनी चाहिए। रोजगार के अधिक अवसर प्रदान किये जाने चाहिए। पूर्ण रोजगार संतुलन की स्थिति की साम्य स्थिति बनाने का प्रथल करना चाहिए। माँग और और पूर्ति के अन्तयल को कम करना चाहिए।

Q.31. केन्द्रीय बैंक के निम्नलिखित कार्यों को समझाए (Explain the following functions of the central Bank)-

(i) जारीकर्ता बैंक (Bank of Issue), 

(ii) बैंकों का बैंक (Banker’s Bank)

Ans. केन्द्रीय बैंक के निम्नलिखित कार्य है-

1. मुद्रा निर्गमन (Issue of Currency) देश में मुद्रा-निर्गमन अर्थात् मुद्रा जारी करने का एकमात्र शीर्ष संस्थान केन्द्रीय बैंक है। केन्द्रीय बैंक को अपने द्वारा जारी मुद्रा की मूल्य परिसम्पत्तियों का सुरक्षित भंडार रखना पड़ता है। इन परिसम्पत्तियों में सोना, चाँदी, सिक्के, विदेशी मुद्रा तथा प्रतिभूतियों शामिल होती हैं।

केन्द्रीय बैंक से उधार लेने का अधिकार केन्द्रीय सरकार का है। सरकार अपनी प्रतिभूतियाँ, केन्द्रीय बैंक को बेचती है तथा जब भी केन्द्रीय बैंक इन

प्रतिभूतियों को खरीदता है, इनके मान के समतुल्य मुद्रा जारी कर देता है, जिससे मुद्रापूर्ति में वृद्धि हो जाती है। केन्द्रीय बैंक का बैंकिंग विभाग मुद्रा वे के परिचालन या उसके निरस्त्रीकरण का कार्य करता है। सरकार बजट के घाटे से निपटने के लिए केन्द्रीय बैंक से ऋण लेती है। केन्द्रीय बैंक अपने पास जमा राशि से या नये

नोट छापकर सरकार को मदद करता है। 2. बैंकों का बैंक तथा पर्यवेक्षक (Banker’s Bank and the Super- vision Bank) व्यावसायिक बैंकों को अपनी सम्पूर्ण जमा का एक निश्चित अंश 43 केन्द्रीय बैंक में जमा करना पड़ता है, जिसे नकद जमा अनुपात कहते है। केन्द्रीय बैंक इस राशि को सुरक्षित रखता है, बैंकों को अल्पावधि ऋण देता है तथा बैंकों को केन्द्रीकृत समाशोधन की सुविधा प्रदान करता है।

केन्द्रीय बैंक, व्यावसायिक बैंकों का पर्यवेक्षण, नियमन और नियंत्रण करता है। इसमें बैंकों को लाइसेंस जारी करना, विलय, परिसमापन, प्रबंधन आदि कार्य सम्मिलित होते हैं।

Q. 32. सरकारी बजट के क्या उद्देश्य हैं? (What are the objectives of a government budget?) 

Ans. सरकार का बजट सरकार की आय तथा व्यय का वित्तीय नियोजन है। एक वित्तीय वर्ष की अवधि में समस्त अनुमानित सरकारी आय तथा व्यय के ब्यौरे को ‘सरकारी बजट’ कहा जाता है। केन्द्रीय सरकार के इस वार्षिक विवरण को ‘केन्द्रीय बजट’ या ‘संघीय बजट’ भी कहा जाता है।

Or, ‘राजकोषीय नीति’ और ‘मौद्रिक नीति’ से आप क्या समझते हैं? उल्लेख करें। (What do you mean by ‘fiscal policy’ and ‘monetary policy’? Explain.) 

Ans. राजकोषीय नीति-सरकार करारोपण, सार्वजनिक ऋण आदि स्रोतो से सार्वजनिक आय प्राप्त करती है तथा इसे प्रशासन, प्रतिरक्षा, सार्वजनिक सेवाओं पर सार्वजनिक व्यय करती है। ये सब वित्तीय अथवा राजकोषीय क्रियाएँ है। इन क्रियाओं के निर्देशन एवं नियंत्रण से सम्बन्धित नीति को राजकोषीय नीति कहते हैं। दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक व्यथ के नियंत्रण और निर्देशन से सम्बन्धित नीति को ‘राजकोषीय नीति’ कहते हैं।

सार्वजनिक व्यय और सार्वजनिक आय मुख्य राजकोषीय उपकरण हैं। करारोपण, सार्वजनिक आय का मुख्य स्रोत है। मौद्रिक नीति-मुद्रा एवं साख की मात्रा के नियंत्रण एवं निर्देशन से सम्बन्धित सरकार की नीति को ‘नौद्रिक नीति’ कहते हैं। मौद्रिक नीति को देश के केन्द्रीय बैंक द्वारा लागू किया जाता है। भारत में मौद्रिक नीति को रिज़र्व बैंक लागू करता है। मौद्रिक नीति का मुख्य कार्य-क्षेत्र निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए साख की मात्रा को नियंत्रित करना है।

साख की मात्रा में वृद्धि होने पर निवेश व्यय बढ़ता है और इससे समग्र माँग का स्तर बढ़ता है। इसके विपरीत साख की मात्रा के कम होने पर निवेश व्यय कम होता है और इससे समग्र मॉग कम होती है। साख की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए केन्द्रीय बैंक द्वारा अपनाए गए सभी उपायों को मौद्रिक नीति के उपकरण कहते हैं।


NOTES & QUESTIONS ANSWER



MCQS IN ENGLISH



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कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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