NCERT Solutions for Class 12 Business Studies Chapter 3 In hindi व्यावसायिक वातावरण Notes Pdf

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NCERT Solutions for Class 12 Business Studies Chapter 3 In hindi


कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter03
अध्याय का नाम | Chapter Nameव्यावसायिक वातावरण | Business Environment
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectव्यवसाय अध्ययन | business studies
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | question answer
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व्यावसायिक वातावरण सारांश | Business Environment summary


व्यावसायिक वातावरण सारांश : व्यावसायिक वातावरण (पर्यावरण) से आशय उन समस्त बाहरी आर्थिक, सामाजिक राजनीतिक एवं तकनीकी शक्तियों से है जो कि व्यवसाय एवं उसके प्रचलन को प्रभावित करता है। आधुनिक युग में व्यावसायिक पर्यावरण के अध्ययन पर विशेष बल दिया जा रहा है क्योंकि इसका अध्ययन प्रबंधकीय निर्णयन के लिए नितान्त आवश्यक है।

व्यावसायिक वातावरण या पर्यावरण के विभिन्न आयाम हैं जैसे राजनीतिक पर्यावरण, आर्थिक पर्यावरण, सामाजिक पर्यावरण, वैधानिक नियमन पर्यावरण तथा तकनीकी पर्यावरण इत्यादि ।

वातावरण Business Environment

आर्थिक पर्यावरण की प्रकृति गत्यात्मक होती है अर्थात् उसमें निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं भारत में भी व्यावसायिक पर्यावरण परिवर्तन हुए हैं और उसका दीर आज भी चालू है। किसी व्यवसाय की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह बदलते हुए व्यावसायिक पर्यावरण का पूर्वानुमान एवं सही पहचान करके उसके अनुरूप अपने को समायोजित करने में कहाँ तक सफल रहा है। 

भारत में बदलते हुये आर्थिक पर्यावरण का अध्ययन प्रमुख रूप से दो समयावधियों के अन्तर्गत किया जा सकता है। पहली समयावधि 1951-1990 ई. तक के आर्थिक पर्यावरण का अध्ययन किया जाता है। दूसरी समयावधि में 1991 ई. की नवीन आर्थिक नीति और उदारीकरण, निजी तथा विश्वव्यापीकरण के संदर्भ में सरकारी नीति में हुये परिवर्तनों का व्यवसाय तथा उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है। 

अभी हमारे देश में नई आर्थिक नीति के अन्तर्गत उदारीकरण और विश्वीकरण की नीति को अपनाया जा रहा है जिससे कि भारतीय

अर्थव्यवस्था संतुलित बन सके। पर्यावरण सदा गतिशील एवं परिवर्तनशील होता है। व्यवसाय को पर्यावरण में होनेवाले परिवर्तन के साथ समन्वय स्थापित करने के लिये परिवर्तनशील होना पड़ता है। इसके लिये बड़ी संख्या में कुशल और अनुभवी प्रबंधकों की आवश्यकता पड़ती है। 

यह प्रबंधक व्यावसायिक वातावरण में होने वाले परिवर्तन के प्रति उत्तरदायी होते हैं। वे बदलते हुये पर्यावरण के अनुसार व्यवसाय को भी संचालित करते हैं। परिणामस्वरूप व्यवसाय में लाभ होता है जिसके कारण व्यवसाय सफल होता है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. व्यावसायिक वातावरण से आप क्या समझते हैं ? (What do you mean by Business Environment?) 

Ans. व्यावसायिक वातावरण या पर्यावरण का अर्थ उन समस्त बाहरी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा तकनीकी शक्तियों से है जो कि व्यवसाय एवं उसके प्रचलन को प्रभावित करते हैं। वास्तव में, व्यावसायिक वातावरण का आशय व्यवसाय करने की दशाओं से है। जिस प्रकार का वातावरण रहता है उसी के अनुसार व्यापार को चलाया जाता है। 

Q. 2. वी. पी. माइकेल द्वारा दिये गये व्यावसायिक पर्यावरण की परिभाषा को लिखें। (Give the definition of Business Enviornment given by V. P. Michael.)

Ans. वी. पी. माइकेल ने व्यावसायिक पर्यावरण की परिभाषा देते हुये कहा है कि व्यावसायिक पर्यावरण पर्यावरणीय घटकों का सम्मिलित रूप है जो कि व्यवसाय के लिए पर्यावरण प्रदान करता है। इसका ऐसे प्रत्येक व्यावसायिक संगठन से प्रत्यक्ष संबंध है जोकि उसमें क्रियाशील होता है। 

Q. 3. व्यावसायिक पर्यावरण का क्या महत्त्व है ?

(What is the importance of Business Environment?) 

Ans. व्यावसायिक पर्यावरण के विभिन्न महत्त्व हैं। जो इस प्रकार हैं-

1. जोखिमों एवं खतरों की जानकारी देने में सहायक, 2. व्यावसाय का लाभार्जन, उत्तरजीि एवं विकास, 

3. सुदृढ़ता एवं कमजोरियों की जानकारी देने में सहायक, 

4. पर्यावरण द्वारा उत्स अवसरों का सदुपयोग, 

5. भावी मोर्चाबंदी करने में सहायक, 

6. छवि निर्माण में सहाय

7. संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग। 

Q.4. व्यवसाय तथा वातावरण में क्या संबंध हैं ? (What is the relationship between Business and Environment?)

Ans. व्यावसायिक वातावरण विभिन्न गतिशील, जटिल व अनियन्त्रित वाह्य आर्थिक, सामाजि राजनीतिक, भौतिक व तकनीकी घटकों का योग है जिनके भीतर व्यवसाय को कार्य करना पड़ है। वातावरण ही व्यवसाय को नए आकार, स्वरूप, नयी भूमिकाएँ, मान्यताएँ व नये तेवर ग्र करने को बाध्य करता है। व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए वातावरण नए-नए अवसरों के खोजकर नए-नए अवसर प्रदान करता है।

Q.5. खतरों के प्रति सतर्कता में वातावरण कहाँ तक सहायक है ? (To what extent environment protects from external threats?) 

Ans. व्यवसाय एक खुले वातवरण में कार्य करता है। विकास की तेज दौड़ ने भौगोलिक सीमाओं को गौण कर दिया है। अर्थव्यवस्थाओं में खुलापन आ रहा है। इस खुलेपन से जहाँ तक और नए-नए अवसर मिलते हैं वहीं दूसरी तरह यह नये खतरों, संकटों व समस्याओं के उत्पन्न हो जाने की आशंका बनी रहती है। 

आर्थिक नीतियाँ माँग में वृद्धि व कमी, उपभोक्ता प्रवृत्ति प्रतिस्पर्धा आदि में होने वाले परिवर्तन व्यवसाय के लिए चुनौतियाँ हैं। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए व्यावसायिक यातावरण का ज्ञान होना चाहिए।

Q.6. आर्थिक वातावरण से आप क्या समझते हैं ? यह व्यवसाय पर किस प्रकार प्रभाव डालता है? (What do you mean by Economic Environment? How is effects Business ? )

Ans. व्यवसाय के आर्थिक वातावरण में मुख्यतः तीन घटकों को शामिल किया जाता है- देश की आर्थिक प्रणाली, देश की आर्थिक नीतियाँ, देश में विद्यमान आर्थिक दशाएँ, आर्थिक प्रणाली किसी देश की आर्थिक विचारधारा, आर्थिक संरचना को प्रदर्शित करती है। देश की आर्थिक नीतियाँ देश के उद्योग एवं आर्थिक क्रियाओं को प्रभावित करती हैं। 

आर्थिक दशाएँ आर्थिक विकास की सम्भावनाओं का पता लगाती हैं। इन तीन घटकों का व्यवसाय पर बहुत महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

Q.7. व्यवसाय के सामाजिक वातावरण से क्या आशय है ? इसका व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ता है? (What is Social Environment of business? How it effects business?) 

Ans. व्यावसाय का सामाजिक वातावरण समाज की प्रवृत्तियों, इच्छाओं, आकांक्षाओं, शिक्षा, बौद्धिक स्तर, मूल्य विश्वास, रीति-रिवाज एवं परम्पराओं आदि घटकों से निर्मित होता है। इन तत्वों की उपेक्षा करने से प्रबंधकों को समाज की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है। समाज के मूल्यों एवं लक्ष्यों की अवहेलना करके व्यवसाय को नहीं चलाया जा सकता है। अतः सामाजिक परिवेश के प्रति संचेतना ही व्यावसायिक संस्थाओं की गरिमा बढ़ाती है। 

Q.8. राजनीतिक वातावरण पर एक टिप्पणी लिखिए ।

Ans. राजनीतिक वातावरण (Political Environment) सरकार, प्रशासन तथा व्यवसाय के बीच होने वाली अन्तः क्रियाएँ व्यवसाय की कार्यशीलता को प्रभावित करती हैं। व्यवसाय की अनेक संरचनाओं का जन्म राजनीतिक निर्णयों के कारण होता है। कई बार ऐसे राजनीतिक निर्णय होते हैं। जो व्यवसाय की अभिवृद्धि में सहायक होते हैं। 

कई बार इन राजनीतिक निर्णयों का विपरीत प्रभाव भी व्यवसाय के ऊपर पड़ता है। कुछ निर्णय ऐसे भी होते हैं जो सारे व्यवसाय को ही बदलकर रख देते हैं। 

Q. 9. वैधानिक वातावरण पर एक नोट लिखिए । (Give a note on Legal Environment.)

Ans. वैधानिक वातावरण का क्षेत्र बहुत व्यापक है। इसके द्वारा आर्थिक जगत में व्यवसाय के सभी पहलुओं पर नियंत्रण रखा जाता है। व्यवसाय से संबंधित क्रियाएँ, जैसे—– अनुज्ञापन, काधिकार व प्रतिबन्धित संव्यवहार, प्रतिभूति निर्गमन, स्कन्ध एवं उपज विपणी, संविदा सम्पत्ति वं सम्पदा एजेन्सी विनियम साम्य प्रलेख बैंकों की क्रियाएँ कम्पनियों के निर्माण से लेकर समापन क की सभी क्रियाएँ वैधानिक वातावरण में शामिल होती हैं।

Q.10. व्यावसायिक वातवरण पर सरकार की नीतियों का क्या प्रभाव पड़ता है ? (How Govt. Politics affects the business environment 2)

Ans. सरकार की नीतियों का व्यावसायिक वातावरण पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। सरकारी तियों ही देश में उद्योगों की स्थापना, संरक्षण और विकास में सहायता देती हैं तथा राष्ट्र के लोगों को विनियोग करने की प्रेरणा देती है तथा विनियोग करने की दशाएँ तथा परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं। आज जो राष्ट्र आर्थिक विकास कर रहे हैं उनकी आर्थिक प्रगति का श्रेय वहीं की आर्थिक नीतियों को दिया जाता है।

Q. 11. भारत के व्यावसायिक वातावरण में आर्थिक नीतियों की क्या भूमिका है ? (What is the importance of Economic Politics in Indian Business Environment ? )

Ans. हमारे देश में आर्थिक नियोजन की प्रणाली के माध्यम से पंचवर्षीय योजनाओं का निष्पादन होता है जिनके प्रमुख उद्देश्य वहाँ के लोगों के आर्थिक जीवन को ऊँचा करना है। आर्थिक नियोजन के साथ-साथ कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जिनमें देश की आर्थिक नीति के माध्यम से ही क्रियान्वयन होता है। जैसे मौद्रिक नीति, सार्वजनिक व्यय एवं ऋण नीति, घाटे की वित्त व्यवस्था आदि क्षेत्रों में आर्थिक नीतियों का प्रभाव पड़ता है।

Q. 12. भारत में आर्थिक उदारीकरण के लिए सरकार ने क्या परिवर्तन किए हैं? (In India what changes have been made by Govt. for Economic Liberalization ?) 

Ans. भारत में आर्थिक उदारीकरण के लिए सरकार ने निम्न कदम उठाए हैं-

(i) नयी वित्तीय प्रणाली, (ii) मौद्रिक प्रवृत्तियाँ, (iii) औद्योगिक नीति में परिवर्तन, (iv) विदेशी विनियोजन एवं प्रौद्योगिकी को आमन्त्रित करना, (v) सार्वजनिक क्षेत्र के लिए नीतियों का निर्माण, (vi) एकाधिकारी उद्योगों के लिए नीति, (vii) विदेशी व्यापार नीति में परिवर्तन आदि कदम सरकार द्वारा उठाए गए हैं।

Q.13. सरकार ने नयी औद्योगिक नीति में क्या उदारीकरण कदम उठाये हैं ? (What steps are taken by Govt. in New industrial policy for liberalization?)

Ans. 24 जुलाई, 1991 को घोषित औद्योगिक नीति में बहुत से उदारवादी कदम उठाए गए हैं जिसके अन्तर्गत अनुज्ञापन व्यवस्था को लगभग समाप्त कर दिया गया है। आरक्षित उद्योगों के द्वारा निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए गए हैं। विदेशी फर्मों को अधिक रियायतें दी गई है। इस नयी औद्योगिक नीति का उद्देश्य भारतीय औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अनावश्यक नियन्त्रणों से मुक्त करना है। 

Q.14. विदेशी विनियोजन एवं औद्योगिक तकनीक के संबंध में क्या आर्थिक नीति अपनाई गयी है ? (What policy is adopted for foreign investment and industrial techniques ? )

Ans. विदेशी विनियोगों तथा प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने आर्थिक नीति में बहुत से उदारवादी परिवर्तन किए हैं। विदेशी विनियोग को आकर्षित करने के लिए विदेशियों को 51 प्रतिशत हिस्सा देने का निर्णय किया गया है। पहले यह हिस्सा 40 प्रतिशत होता था। अब नीति के अनुसार विदेशी पूँजी से संबंधित उद्योग के लिए पूँजीगत माल के आयात हेतु विदेशी दिनिमय की व्यवस्था की जाती है। 48 उद्योगों को यह छूट दी गई है कि वह सरकार से पूर्ण अनुमति लिए विदेशी विशेषज्ञ नियुक्त कर सकते हैं।

Q. 15. एकाधिकारी उद्योगों के लिए क्या नीति बनायी गई हैं ? (What policy is adopted by Govt. for monopoly industries ? ) 

Ans. उदारीकरण की नीति में एकाधिकार एवं प्रतिबन्धनात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम के अंतर्गत आने वाली कम्पनियों की परिसम्पत्ति सीमा को समाप्त कर दिया गया है। अब इकाइयों की स्थापना, विस्तार, विलयन समामेलन तथा आधुनिकीकरण के लिए तथा संचालकों नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। 

नयी नीति की घोषणा एक बहुत बड़ा प्रभाव यह हुआ है कि एकाधिकारी एवं प्रतिबन्धात्मक व्यापार अधिनियम से संद प्रायः समाप्त हो गए हैं।

Q. 16. भारत में आर्थिक उदारीकरण की नीति का विदेशी व्यापार नीति पर क्या प्रभाव पड़ा है ? (What is impact of Economic Liberalisation of foreign trade policy in India ?) 

Ans. इस नीति के फलस्वरूप विदेशी व्यापार के क्षेत्र में भारत ने सफलता प्राप्त की है। यह नीति आयातों के प्रति अत्यंत उदार है। नई नीति में 201 वस्तुओं का आयात खुले सामान्य लाइसेन्स के अधीन कर दिया गया है 153 वस्तुओं का आयात राजकीय व्यापार से मुक्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त इस नीति से स्वतः लाइसेंसिंग व्यवस्था की समाप्ति, कम्प्यूटर प्रणाली के आयात में उदारता से टेक्नोलोजी आयात को प्रोत्साहन मिला है। 

Q.17. नई आर्थिक नीति के अन्तर्गत मौद्रिक प्रवृत्तियों में क्या परिवर्तन किये गये हैं? (What monetary affairs are changed on new economic policy?)

Ans. मौद्रिक क्षेत्र में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किये गए हैं। वार्षिक मुद्रा पूर्ति नियन्त्रण की अवधारणा को अर्थव्यवस्था में स्थान दिया गया है। चक्रवर्ती समिति ने विवेकाधीन मुद्राबाद की विचारधारा को स्वीकार कर लिया है। मुद्रा स्फीति को रोकने के लिए अनेक निर्णय लिये गए हैं। इसके अतिरिक्त सरकारी ऋणों पर ब्याज की दरों को बढ़ाया जाना, ब्याज दरों का सूचीकरण करना आदि प्रवृत्तियाँ भी मीद्रिक क्षेत्र में विकसित हो रही है। 

Q. 18. व्यवसाय के साधारण वातावरण के तत्व कौन-कौन से हैं ?(What constitutes, general environment of business 2 )

 Ans. किसी भी संगठन के वातावरण को साधारणतया तीन अलग-अलग स्तरों में विभक्त किया जाता है। साधारण वातावरण कार्यशील, वातावरण एवं आन्तरिक वातावरण। साधारण वातावरण के तत्व निम्नलिखित हैं- (i) आर्थिक वातावरण, (ii) अनार्थिक वातावरण,

(iii) सामाजिक वातावरण तथा (iv) राजनैतिक वातावरण।

Q. 19. व्यवसाय तथा वातावरण की जानकारी का क्या महत्त्व है ? (What is the importance of knowing about business and environment?)

Ans. व्यवसाय तथा वातावरण की जानकारी का महत्त्व निम्नलिखित है-

1. व्यवसाय के आन्तरिक वातावरण में होने वाले परिवर्तन की जानकारी, व्यवसाय को अपनी आन्तरिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

2. व्यवसाय की चुनौतियों एवं समस्याओं की जानकारी उचित समय पर प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक वातावरण का ज्ञान होना चाहिए।

3. बदलते हुए परिवेश में व्यवसाय की स्थिति अनुसार मजबूत बनाये रखने तथा बदलते परिवेश का सामना करने के लिए व्यावसायिक वातावरण की जानकारी आवश्यक है। 

4. अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, संस्थाओं की कार्य प्रणाली, दबावों से उत्पन्न समस्याएँ तथा चुनौतियों आदि का सामना करने के लिए व्यावसायिक वातावरण की जानकारी आवश्यक है। 

Q. 20. व्यावसायिक पर्यावरण में परिवर्तन पर प्रबंधकीय प्रतिक्रिया का उल्लेख करें। (Explain Mangerial response to changes in Business Environment.) 

Ans. व्यावसायिक पर्यावरण में परिवर्तनों पर प्रबंधकीय प्रतिक्रिया का उल्लेख इस प्रकार किया जा सकता है

1. अधिग्रहण एवं दिलय, 2. पूँजीगत ढाँचा, 3. विविधीकरण की रणनीति 4. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का दृढ़ीकरण, 5. उपभोक्ताओं पर केन्द्रित, 6. वितरण एवं प्रत्यक्ष विपणन, 7. ब्राण्ड छवि 8 टेक्नोलाजी उन्नयन, 9. प्रतिस्पर्धी विज्ञापन, 10 प्रत्याशा तथा अनुकूलन 11. उत्पादन क्षमता, 12, श्रमिकों में मानसिक क्रान्ति, 13. सामाजिक उत्तरदायित्व पर बल तथा 14. प्रबंधकीय शैली में परिवर्तन।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. व्यावसायिक वातावरण से आप क्या समझते हैं ? (What do you understand by Business Environment?)

Ans. व्यवसाय एक समूह वाचक शब्द है जो आर्थिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक, व्यावसायिक, सांस्कृतिक आदि अनेक बाह्य परिस्थितियों तथा वातावरण से सम्मिश्रण में उत्पन्न हुआ है। सभी व्यावसायिक क्रियाएँ समाज के परिवेश में ही पूरी हो जाती हैं। कोई भी व्यावसायिक क्रिया समाज के परिवेश में ही पूरी हो जाती हैं। कोई भी व्यावसायिक क्रिया मनुष्य के बिना जंगल में सम्पन्न नहीं की जा सकती है। इस प्रकार व्यवसाय का पालन-पोषण समाज के अन्दर ही होता है। व्यावसायिक वातावरण को बाह्य शक्तियों एवं दशाएँ प्रभावित करती हैं। 

ये बाह्य शक्तियाँ व्यावसायिक संस्था तथा इन प्रबन्धकों के नियन्त्रण से बाहर होती है और संस्था के कार्य संचालन को प्रभावित करती हैं। ये बाह्य विशिष्ट एवं सामान्य होती हैं। विशिष्ट शक्तियों से तात्पर्य व्यवसाय के ग्राहकों, लेनदारों एवं ऋणदाताओं से है जो कि प्रत्यक्ष रूप से व्यापार के संचालन को प्रभावित करती हैं। सामान्य शक्तियों जैसे—सरकार की नीतियाँ, मजदूर संघ, प्रतियोगी फर्मों की गतिविधियों एवं तकनीकी परिवर्तन भी व्यवसाय को प्रभावित करते हैं।

Q. 2. “व्यवसाय वह है जो उसका वातावरण उसे बनाता है।” वर्णन कीजिए। (“Business is what its environment has made it.” Discuss.) Or, स्पष्ट कीजिए वातावरण की शक्तियाँ और व्यावसायिक क्रियाएँ किस प्रकार

आपस में सम्बन्धित हैं। (“Discuss how environment forces and business activities are interrelated.)

Ans. [ सर्वप्रथम प्रश्न संख्या 1 का संक्षिप्त वर्णन करना है।] स्पष्ट है कि व्यावसायिक फर्म अपने वातावरण से धन, सामग्री, मशीन और अन्य साधन

प्राप्त करता है। मूल्य, गुण या पूर्ति में कोई परिवर्तन निश्चित रूप से फर्म को प्रभावित करेगा। 50 इसी प्रस्तु और सेवा को अर्पित की जाती है। समाज यह निर्धारित करता कि वस्तु के गुण, मात्रा और कीमत क्या हो जिसे वह स्वीकार करेंगे। अतः फर्म की विद्यमान इस बात पर निर्भर है कि वातावरण उसकी वस्तुओं और सेवाओं किसी व्यवसाय की विद्यमान समाप्त होना निर्धारित करता है। अतः वातावरण और व्यावसाय बड़ी व्यावसायिक इकाई के लि पूर्ण है। व्यवसाय को अपने वातावरण के आधार पर बदलते रहना चाहिए। 

Q.3. व्यावसायिक वातावरण पर गतिशील स्वरूप के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए। (Explain Impact of Globalization on Business Environment.) 

Ans. व्यावसायिक वातावरण पर गतिशील स्वरूप के प्रभाव (Impact of Globalization on Business Environment)- अर्थ (Meaning)—व्यावसायिक वातावरण में बहुत तेजी से तथा महत्त्वपूर्ण परिवर्तन है रहे हैं। सरकार का बढ़ता हुआ हस्तक्षेप, तेजी से बदलती हुई प्रौद्योगिकी (Technology) तद अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का बदलता हुआ स्वरूप। Globalisation का बीज सर्वप्रथम भारत के 1991 में योचा गया जब भारत सरकार द्वारा नई आर्थिक नीति जुलाई, 1991 में घोषित की ग थी। इस नई आर्थिक नीति के अन्तर्गत भारतीय कम्पनियों को विदेशी कम्पनियों के सहयोग से भारत में उद्योग स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई तथा विदेशों में भारतीय कम्पनियों को विदेशी

कम्पनियों के साथ उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया गया। प्रभाव (Impact ) गतिशील (Globalisation) का प्रभाव व्यावसायिक वातावरण में निम्नलिखित परिवर्तनों से स्पष्ट होता है-

1. विदेशी व्यापार का आकार तेजी से बढ़ा है।

2. हाल के वर्षों में भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल, सीमेन्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों को जापान, पश्चिमी जर्मनी तथा संयुक्त अमेरिका के उद्योगों के साथ सहयोग के बारे में समझौता। करने की आता दी है।

3. भारत के विदेशी व्यापार के ढाँचे के बदलते स्वरूप और विदेशी उद्योगों के सहयोग ने भारतीय व्यावसायिक वातावरण को ही बदल दिया है।

4. आपात करों में एक सीमा तक कमी की गई।

5. प्राथमिक उद्योगों में 51 प्रतिशत विदेशी विनियोग को स्वतः स्वीकृति प्रदान की गई। 

6. निश्चित किए गए उच्च प्राथमिक उद्योगों में विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग को बेरोकटोक स्वीकृति प्रदान की गई है। वाणिज्य उन सभी क्रियाओं का समूह है जो वास्तव में उत्पादन के वितरण तक प्रयोग में साई जाती है।

Q.4. राजनीतिक, शासकीय एवं प्रशासनिक वातावरण से आप क्या समझते हैं ? विस्तार से समझाइए यह आर्थिक वातावरण को किस प्रकार प्रभावित करता है ? (What do you understand by Political, Ruling or Government Environment? Explain its detail how it affects business environment.

Ans. राजनीतिक, सरकार, प्रशासन तथा व्यवसाय के बीच होने वाली अंतर क्रियाएँ व्यवसाय की कार्यशीलता को प्रभावित करती है। व्यवसाय की अनेक संरचनाओं का जन्म राजनीतिक निर्णयो के कारण होता है। इन राजनीतिक निर्णयों का व्यवसाय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, परन्तु कई बार हुन निर्णयों का विपरीत प्रभाव पड़ता है। 

कुछ राजनीतिक निर्णय व्यवसाय को पूरी तरह बदल देते हैं। राजनीतिक पक्ष के साथ जो दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष जुड़ा हुआ है वह सरकारी या शासकी

पक्ष है। विभिन्न सत्ताधारी सरकारे अलग-अलग प्रकार से व्यवसाय को प्रभावित करती हैं। 

अतः व्यवसाय के लिए राजनीतिक, शासकीय तथा प्रशासकीय वातावरण से परिचित होना तथा समयानुसार इस बातावरण से व्यावसायिक हितों की पूर्ति करना आवश्यक होता है। 

Q.5. वैधानिक वातावरण व्यावसायिक वातावरण को किस प्रकार प्रभावित करता है ? (How legal environment affects Business Environment ?)

Ans. किसी देश का वैधानिक वातावरण उसके आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन को प्रभावित करता है। वैधानिक वातावरण से व्यवस्थय को संरक्षण भी मिलता है तथा यह सही उग से कार्य करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। वैधानिक ढाँचे के द्वारा जनहित की अभिवृद्धि के प्रयास किये जाते हैं। 

कानून के द्वारा सामाजिक कल्याण एवं जन  आकांक्षाओं के लिए क्रियाओं पर अनेक प्रतिबंध लगाये जाते हैं। वैधानिक वातावरण का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। इसके द्वारा आर्थिक जगत में व्यवसाय के सभी पहलुओं पर नियंत्रण रखा जाता है। व्यावसाय के अलग- अलग पक्षों के लिए अलग-अलग अधिनियमों का निर्माण किया जाता है। 

विधान मण्डलों समितियों तथा आयोगों का गठन किया जाता है तथा देश के संविधान के अधीन न्यायालयों एवं न्यायाधिकरणों की स्थापना की जाती है।

Q.6. व्यवसाय को प्रभावित करने वाले आर्थिक वातावरण का वर्णन कीजिए। (Give the factors of Economic Environment affecting business.)

Ans. प्रत्येक प्रकार का व्यवसाय आर्थिक वातावरण को चाहता है। पूँजी, संयंत्र एवं मशीनें, भवन, स्टॉक, कार्यालय उपकरण, नकद संसापान आदि व्यवसाय को गहन रूप से प्रभावित करते यह अर्थव्यवस्था में कुशल श्रमिकों एवं तकनीशियनों की उपलब्धि एवं कीमत भी व्यवसाय के लिए विचारणीय होती है। देश की कीमत स्तर, उत्पादकता, सरकार की कर एवं राजकोषीय नीतियाँ भी महत्त्वपूर्ण रूप से व्यावसायिक क्रियाओं को प्रभावित करती है। 

व्यवसाय के आर्थिक वातावरण में ३. मुख्यतया तीन घटकों का समावेश होता है— देश की आर्थिक प्रणाली, देश की आर्थिक नीतियों तथा देश में विद्यमान आर्थिक दशाएँ। इसके अतिरिक्त आर्थिक वातावरण के दो महत्त्वपूर्ण घटक है व्यवसाय के साहसी प्रबंधक तथा इसके ग्राहक ।

Q.7. देश की आर्थिक नीतियों से आप क्या समझते हैं ? और ये व्यवसाय को किस प्रकार प्रभावित करती हैं ? (What do you understand by Economic Policies of a nations ? And how it affects Business?)

Ans. किसी देश की आर्थिक नीतियाँ उस देश में पनपने वाले व्यवसाय, उद्योग एवं आर्थिक क्रियाओं को महत्त्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करती हैं। आर्थिक क्रियाओं में उतार-चढ़ाव, वृद्धि संकुचन, निर्यात, संवर्धन विस्तार, विकास, शोध, प्रतिस्पर्धा आदि उस देश की आर्थिक नीतियों से प्रभावित होते हैं एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में आर्थिक नीतियों का निर्धारण आर्थिक समानता रोजगार सृजन, स्थायित्व, गरीबी निवारण मुद्रा स्फीति एवं संकुचन पर नियंत्रण, साधन आवंटन, आय वृद्धि, आंतरिक बचत एवं विनियोजन अभिवृद्धि आदि लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। एक देश की प्रमुख नीतियों निम्न हो सकती है-

1. औद्योगिक नीति, 2. मौद्रिक नीति, 3. राजकोषीय नीति, 4. कर नीति, 5. घाटे की वित्त व्यवस्था एवं 6. आय, रोजगार, मूल्यनीति ।

Q.8. सामाजिक वातावरण की व्यावसायिक वातावरण में क्या भूमिका हैं ? (What is the role of Social Environment in Business Environment ?) 

Ans. व्यावसायिक वातावरण के निर्माण में सामाजिक वातावरण की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इसमें कुछ महत्त्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं— 1. समाज में यह विश्वास बढ़ा है कि कार्य की इच्छा क्षमता रखने वाले व्यक्तियों के लिए समाज में सदा अवसर विद्यमान रहते हैं।

2. व्यवसाय के प्रति श्रद्धा एवं विश्वास। 

3. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विशेष रूप से प्रतियोगिता की भावना का विकास।

4. जाति, धर्म और सम्प्रदाय से परे व्यक्ति के प्रति आदर भावना।

5. ज्ञान व शिक्षा के प्रति प्रेम।

6. तर्क विज्ञान एवं तकनीकी में विश्वास।

7. जीवन की उच्च गुणवत्ता।

Q.9. आर्थिक दशा का व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ता है ? आर्थिक दशाएँ कौन-कौन सी हो सकती हैं ? (Give impact of Economic conditions on Business ? Gly different types of Economic Conditions.)

Ans. आर्थिक दशाएँ एक और आर्थिक प्रगति की सूचक मानी जाती हैं और दूसरी ओर आर्थिक विकास की सम्भावनाओं का आधार प्रस्तुत करती है। व्यवसाय के लिए आर्थिक दशाओं का महत्त्व व्यावसायिक सम्भावनाओं व अवसरों की पूर्ति से जुड़ा हुआ है। आर्थिक दशाएँ आर्थिक संवृद्धि लोगों के जीवन स्तर तथा जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है। व्यवसाय आर्थिक दशाओं के आधार पर नये बाजारों की खोज व्यवसाय के विस्तार, नए उत्पाद, विज्ञापन रणनीति सौ प्रतिशत निर्यात उपक्रमों आदि के बारे में योजनाएँ तथा कार्यक्रम तैयार करता है।

प्रमुख आर्थिक दशाएँ निम्न हो सकती ह1. प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति, 2. आर्थिक विकास का स्तर 3. पूँजी निर्माण, 4. उपयोग का स्तर, 5. बाजार का आकार, 6. व्यावसायिक ढाँचा 

Q. 10. भारत में आर्थिक उदारीकरण की नीति का वर्णन कीजिए। (Discuss the policy of Economic Liberalisation in India.) 

Ans. 1985 में राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही सरकार की आर्थिक नीति में नयी प्रवृत्तियों की रूप रेखा खीची गई। प्रधानमंत्री ने जिन बातों पर विशेष ध्यान दिया वे थी उत्पादकता में वृद्धि आधुनिक प्रौद्योगिकी को आत्मसात करना तथा क्षमता के पूर्ण उपयोग को एक राष्ट्रीय अभियान का रूप देना। 

सार्वजनिक क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया और साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कमियों को दूर करना निश्चित किया गया। निजी क्षेत्र के लिए अधिक विस्तृत क्षेत्र उपलब्ध कराने के लिए बहुत से नीति संबंधी परिवर्तन किये गये जिनका संबंध औद्योगिक व अनुज्ञापन नीति, आयात-निर्यात नीति, प्रौद्योगिक उन्नति, विदेशी पूंजी संबंधी नीति से है। इसके साथ प्रशासकीय नियन्त्रणों एवं प्रतिबंधों को हटाने तथा राजकोषीय एवं प्रशासकीय नियमन प्रणाली के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।

Q. 11. देश के आर्थिक वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने क्या उपाय किये ? (What steps are taken by Govt. to improve Economic Environment or Business ? ) 

Ans. देश के आर्थिक वातावरण को प्रोत्साहित करने के उपायों को दो वर्गों में बाँटा गया है— (क) प्रत्यक्ष उपाय तथा (ख) अप्रत्यक्ष उपाय। 

प्रत्यक्ष उपाय 

1. आर्थिक व सामाजिक उपरिव्यय एवं पूंजी को व्यवस्था करना।

2.तीव्र आर्थिक विकास के लिए ठोस कार्यक्रम तैयार करना। 

3.देश के पूँजी निर्माण में योगदान देना।

4. औद्योगीकरण में प्रत्यक्ष रूप में भाग लेना।

अप्रत्यक्ष उपाय

1. प्रशुल्क नीति तैयार करना व इसे क्रियान्वित करना।

2. मूल्य नीति का निर्धारण करना।

3. राजकोषीय नीति व कर नीति के माध्यम से परिवर्तन लाना।

4.तटकर व विदेशी व्यापार नीति को लागू करना।

Q. 12. एक व्यवसाय के लिए किन-किन राजनीतिक, शासकीय तथा प्रशासकीय घाटकों की जानकारी होना आवश्यक है ? (What are administrative and political factors that should be known for a Business ?) 

Ans. व्यवसाय के लिए राजनीतिक एवं शासकीय वातावरण से परिचित होना आवश्यक है।

1. राजनीतिक विचारधारा, मत दृष्टिकोण। इसलिए एक व्यवसायी को राजनीतिक वातावरण के निम्न घटकों की जानकारी होनी चाहिए-

2. राजनीति शासन व्यवस्थाएँ जैसे— साम्यवादी, समाजवादी एवं प्रजातान्त्रिक शासन व्यवस्थायें।

3. राजकीय हस्तक्षेप, नियन्त्रण, विनिमय तथा उदारीकरण।

4. संसदीय, विधायी एवं प्रशासनिक निर्णायक

5. केन्द्र, राज्य, स्थानीय शासन का स्वरूप।

6. सरकार व शासन तन्त्र

Q. 13. किसी देश की आर्थिक नीतियाँ व्यवसाय तथा उद्योगों पर क्या प्रभाव डालती ? विस्तृत वर्णन करें। (What are the impacts of economical policies on the edustry of a business ? Explain.) Or, भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए आर्थिक परिवर्तन किस प्रकार से भारतीय नवसाय की कार्य-पद्धति को प्रभावित करती है ? (How the economic changes itiated by the Government of India influence the working of Indian business?)

Ans. किसी देश की आर्थिक नीतियाँ उस देश में पनपने वाले व्यवसाय उद्योग एवं आर्थिक क्रयाओं को महत्त्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करती हैं। आर्थिक क्रियाओं में उतार-चढ़ाव, वृद्धि कुचन, स्थानीयकरण, संवर्धन, विस्तार, विकास, रोध आदि उस देश की आर्थिक नीतियों निर्यात प्रभावित होते हैं किसी विकासशील अर्थव्यवस्था में आर्थिक नीतियों का निर्धारण आर्थिक समानता, रोजगार, गरीबी निवारण मुद्रा स्फीति पर नियन्त्रण आय वृद्धि सापनों का बँटवारा पूँजी निर्माण निर्यात संवर्धन विदेशी विनियोजन आदि के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। एक देश की आर्थिक नीति में निम्न नीतियों को शामिल किया जाता है। ये नीतियों देश के व्यवसाय तथा उद्योगों का आधार पर होती है-

1. औद्योगिक नीति, 2. राजकोषीय नीति, 3. कर नीति, 4. घाटे की वित्त व्यवस्था, 5. विशिष्ट उद्योगों के लिए नीति, 6. मौद्रिक नीति एवं 7 आय रोजगार मूल्य नीति ।

Q. 14. व्यावसायिक वातावरण की आवश्यकता क्यों अनुभव हुई ? (Why there is need of Business Environment ?)

Ans. व्यावसायिक वातावरण की आवश्यकता व्यवसाय की बढ़ती हुई जटिलताओं को सरल करने के लिए हुई। व्यवसाय की निम्न बढ़ती हुई जटिलताओं के कारण व्यावसायिक वातावरण की आवश्यकता अनुभव हुई—

1. व्यवसाय में बढ़ता हुआ राजकीय हस्तक्षेप। 

2. आधुनिक व्यावसायिक जगत में होने वाले तकनीकी परिवर्तन 

3 श्रमिकों से संबंधित समस्याएँ। 

4. विदेशी कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा का बढ़ना। 

5. बढ़ती हुई प्रदूषण की समस्या 

6. विशाल वित्तीय साधनों की आवश्यकता। 

Q. 15. आर्थिक वातावरण के निर्माण में सरकार की क्या भूमिका है ? (What is the Role of Government in providing Economic Environment?) 

Ans. सभी देशों में चाहे वे पूँजी व्यवस्था के अधीन हो या साम्यवादी अथवा समाजवादी या मिश्रित आर्थिक व्यवस्था के अधीन आते हों, सरकार की भूमिका महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं। सरकार की भूमिका सभी आर्थिक प्रणालियों में एक जैसी नहीं होती है। इसके अनेक कारण, जैसे विकास का स्तर, प्रतिस्पर्धा गरीबी का स्तर, राज्य का कल्याणकारी स्वरूप आदि प्रमुख हि। । सामान्यतः किसी देश की सरकार निम्नलिखित चार प्रकार की भूमिका निभाती है। 

1. नियमकर्त्ता की भूमिका 

2. प्रवर्तन या संवर्धन की भूमिका ।

3. उद्भियता की भूमिका ।

4. नियोजनकर्त्ता की भूमिका ।

Q. 16. आर्थिक वातावरण को बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या कार्य किये हैं ? (What steps have been taken by Government development of Economic Environment ? )

Ans. 

1. देश में सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखना। 

2. देश के विकास की मनोवृत्ति को पनपाना। 

3. आर्थिक संस्थाओं को विकासवर्धक बनाना। 

4. साधनों के सदुपयोग को बढ़ाना। 

5. आय के वितरण को प्रभावित करना 

6. पूर्ण रोजगार की स्थिति लाना। 

7. आर्थिक उच्चावचनों को नियंत्रित करना। 

8. विकास के आवश्यकतानुसार विनियोग को बढ़ाना। 9. मुद्रा की मात्रा पर नियंत्रण रखना।

Q.17. आर्थिक वातावरण के प्रमुख अवयव कौन-कौन से हैं? (What are the major components of Economic Environment?)

Ans. आर्थिक वातावरण— आर्थिक वातावरण के तत्व है–सकल राष्ट्रीय उत्पादन नियमित लाभ, मूल्य वृद्धि की दर, उत्पादकता रोजगार की दर भुगतान शेष व्याज की दर कर की दर एवं उपभोक्ता की आप ऋण एवं आर्थिक बातावरण संगठन नीतियों एवं कार्यों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए 1982 में आर्थिक रूप में सीमेन्ट पर उठाये नियंत्रण के कारण उसकी उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप आपूर्ति में वृद्धि हुई जिसने बाजार की स्थिति को दुर्लभता से पर्याप्त आधिकेष में परिवर्तित कर दिया। 

Q. 18. क्या बातावण में परिवर्तन व्यावसायिक निर्णयों को प्रभावित करता है ? (Do change in environment influence the business decision ?) 

Ans. व्यावसायिक वातावरण दो प्रकार के वातावरणों से घिरा रहता है-

(क) आर्थिक वातावरण एवं (ख) अनार्थिक वातावरण।

दोनों में ही वातावरण में होने वाले परिवर्तनों से व्यावसायिक वातावरण प्रभावित होता है और इसी के साथ व्यावसायिक वातावरण को प्रभावित करता है।

Q. 19. भारतीय प्रबंधकों को इन परिवर्तनों के कारण क्या प्रक्रिया है? (In what way Indian managers responded to these changes?)

Ans. भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए आर्थिक परिवर्तनों ने भारतीय व्यवसाय तथा भारतीय प्रबंधकों को काफी हद तक प्रभावित किया है। भारतीय पूँजीगत ढाँचा मजबूत हुआ है। भारतीय कम्पनियों की पहुँच अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक हो गई है। विदेश में रहने वाले लोगों के भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्वास सुदृढ हुआ है। भारतीय कम्पनियों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. व्यावसायिक वातावरण का अर्थ बतलाइए। इसके विभिन्न घटक कौन-कौन-से हैं? (Explain meaning of Business Environment. What are the different components of Business Environment ?)

Ans. व्यावसायिक वातावरण (Business Environment) रेनीकी एवं शाइल (Raineeke & Shoell) के अनुसार, ‘वातावरण उन समस्त बाहरी घटकों का योग है जिनके प्रति व्यवसाय अपने को अनादरित (Exposed) करता है तथा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है।” (“The environment of business consists of all those external a things to which it is exposed any by which it may be influenced, directly or indirectly.”)

विलियम ग्लूक एवं जाक (William Glueck and Jouch) के शब्दों में, “वातावरण में सु धर्म के बाहर के घटक सम्मिलित होते हैं, जो फर्म के लिए लगातार अवसर तथा खतरे उत्पन्न करते हैं। इनमें सामाजिक, आर्थिक, प्रौद्योगिकी एवं राजनीतिक दशाएँ प्रमुख हैं।”

रिचमैन तथा कोपन (Richman and Copin) के मतानुसार, “वातावरण में ऐसे दबाव एवं नियन्त्रण होते हैं जो अधिकतर फर्म एवं प्रवन्धकों के नियन्त्रण के बाहर होते हैं।” उपर्युक्त विचारों से स्पष्ट है कि व्यावसायिक वातावरण विभिन्न गतिशील, जटिल व अनियन्त्रित

बाहरी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, भौतिक व तकनीकी घटकों का योग है, जिनके अन्तर्गत व्यवसाय को कार्य करना पड़ता है। वातावरण ही व्यवसाय को नये आकार, स्वरूप, नयी भूमिकाएँ, मान्यताएँ व नये तेवर अपनाने को बाध्य करता है। अनेक परिस्थितियों में नये अवसरों की खोज में वातावरण से व्यवसाय को प्रोत्साहन व एक नयी ऊर्जा प्राप्त होती है। यह भी सत्य है कि व्यवसाय भी वातावरण के परिवर्तन में एक महत्त्वपूर्ण घटक होता है। 

55 सीको आर्थिक क्षेत्र में अनेक निर्णय लेने होते है-उत्पादन का प्रकार, किरम, मूल्य गत संरचना, उत्पादन प्रणाली वितरण श्रृंखला, आय प्रबन्ध आदि स्वतन्त्र अर्थव्यवस्था में ये निर्णय व्यवसायी द्वारा लिये जाते है। व्यवसायी वर्ग अपने निर्णय गतिशील वातावरण को ध्यान में रखकर सेता है। व्यवसाय की समस्त क्रियाएं राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, वैधानिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के सन्दर्भ में निर्धारित होती है। 

अतः एक सतर्क एवं जागरूक व्यवसायी वातावरण की उपेक्षा नहीं करता है, अपितु वरण की बाधाओं, सीमाओं, अवसरों एवं नीतियों को स्वीकार करके ही व्यावसायिक निर्णय लेता है। व्यावसायिक वातावरण के घटक (Components of Business Environment) व्यवसायिक वातावरण अत्यन्त विशाल एवं जटिल है। यह विभिन्न घटकों का जाल सूत्र है, साथ

ही यह प्रतिपल परिवर्तनशील है। इसकी शक्तियों (Forces), दशाएँ एवं प्रभाव निरन्तर गतिशील है। व्यवसाय, प्रगति एवं विकास दो तत्त्वों पर निर्भर करता है—व्यवसाय की अपनी किस्म (The quality of the business itself) तथा इसका बाहरी घटक जिसमे यह पोषित एवं विकसित होता है। व्यावसायिक वातावरण के विभिन्न घटक (Different Components of Business Environment). आर्थिक घटक (Economic Components) – इसके अन्तर्गत आर्थिक घटनाएँ आर्थिक नीतियाँ, माँग, पूर्ति, विनियोग, औद्योगिक प्रवृत्तियों एवं आर्थिक दबाव, विनियोग प्रवाह व स्तर, आयात-निर्यात, राजकोषीय व कराधान नीतियों, मौद्रिक नीति आदि सम्मिलित है।

2. भौगोलिक एवं पारिस्थितिक घटक (Geographical and Ecological | Components) इसमें प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण, जलवायु, स्थानाकृति, समुद्री एवं आकाशीय संरचना, भूगर्भीय संसाधन, चुम्बकीय एवं सौर ऊर्जा आदि सम्मिलित है।

3. राजनीतिक घटक (Political Components) इसमें शासकीय अवस्था आर्थिक व शासन प्रणाली, राजनीतिक दृष्टि, प्रशासनिक संस्थाएँ, संवैधानिक व्यवस्था, सुरक्षा आदि सम्मिलित हैं।

4. सामाजिक-सांस्कृतिक घटक (Social and Cultural Components)- इसमें सामाजिक मूल्य, प्रथाएँ, आस्थाएँ, धारणाएँ, सामाजिक व्यवस्था, भौतिकवाद, धर्म, संस्कृति, संस्कार आदि प्रमुख हैं।

5. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय घटक (Science and Technological Components) – इसके अंतर्गत वैज्ञानिक शोध व स्तर, प्रौद्योगिकी विकास, यान्त्रिकी, आण्विक शक्ति, सेटेलाइट संचार व्यवस्था, आकाशीय शोध प्रयोगशालाएँ आदि प्रमुख हैं।

6. वैधानिक एवं न्यायिक घटक (Legal and Judicial Components) — इसमें न्याय व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक, औद्योगिक श्रम नियन्त्रण सन्नियम, प्रशासन व्यवस्था आदि मुख्य माने जाते हैं। 

7. अन्य घटक (Other Components ) – जनसंख्या, शैक्षणिक स्तर उपभोक्ता व्यवहार,

सुरक्षा, संकट व खतरे, अन्तर्राष्ट्रीय शक्तियाँ, औद्योगिक शक्ति व संघर्ष आदि सम्मिलित हैं।

Q.2. हाल ही के समय में औद्योगिक नीति में कौन-से परिवर्तन किए गए हैं? (What changes were made in the industrial policy in the recent past ?)

Ans. नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy)-

1. कुछ निश्चित उद्योगों को छोड़कर अनेक लाइसेंस मुक्त किया गया है।

2. औद्योगिक पंजीकरण योजनाओं की समाप्ति की गई है।

3. एक नई व्यापक सुविधा भी प्रारंभ की गई जो कार्य संचालन को अधिक लोच प्रदान करती है।

4. संसद द्वारा सूचना तकनीकी बिल पारित किया गया।

5. 34 उच्च प्राथमिकता उद्योगों में नई कम्पनियों के लिए 51% तक विदेशी समता के लिए अनुमति दी गई। वर्तमान कम्पनियों भी नई कार्य योजना अथवा विस्तार कार्यक्रम के हानि होने पर भी 51% तक की विदेशी समता एकत्रित कर सकती है। 

6. इलेक्ट्रानिक के क्षेत्र में 100% तक का सीधा विदेशी निवेश प्राप्त करने के Electronic Hardware Technology Park Scheme (EHTP) नाम से सरकार ने। योजना का प्रारम्भ किया।

7. जहाँ विदेशी समता द्वारा विदेशी मुद्रा की उपलब्धता निश्चित है यहाँ पूँजीगत वस्तुओं लिए स्वतः अनुमति दी जाती है।

8. कुछ निर्धारित उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगो विदेशी तकनीकी के आयात एवं रॉयल्टी भुगतान के लिए स्वचालित व्यक्तिगत योजना प्रारंभ कर दी है। 

9. विदेशी निवेशकों द्वारा लाभांश प्रत्यार्पण दर रोक का वापस ले लिया गया है।

10. विदेशी निवेश प्रस्तावों को शीघ्र अनुमति के लिए विशिष्ट अधिकार प्राप्त विदेशी निवे प्रवर्तन योर्ड (FIPB) की स्थापना की गई है।

11. सरकार ने बहुत से प्रतिबंधों को समाप्त किया तथा विदेशी में भारतीय कम्पनियों से सीधे निवेश का उदार करा दिया गया।

12. विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 पारित किया गया। इसने FERA का स्थान लिया

13. सभी उत्पादों पर से प्रतिबंध हटा लिए गये।

14. FTZ का स्थान SE ने ले लिया।

15. कृषि आर्थिक जोन योजना लागू की गई।

16. आने वाले समय में प्रयोग के लिए सम्पत्ति की सीमा समाप्त कर दी। यह सीमा किस भी कम्पनी को धारा 8 सीमा रेखा में ले आती है अथवा इसे प्रभुत्व प्राप्त कम्पनी बनाती है।

17. MRTP निवेश के हेतु प्रार्थना पत्र के लिए किसी MRTP की अनुमति के आवश्यकता नहीं है न किसी नई इकाई की स्थापना अथवा विस्तार विलय यदि सम्मिश्रण एवं अधिग्रहण के लिए अनुमोदन की आवश्यकता है।

18. शेयरों के प्राप्त करने / हस्तान्तरण पर लगे प्रतिबन्धों को हटा दिया गया है।

19. पी. ए.यू. की महत्त्वपूर्ण भूमिका को सीमित कर दिया गया है तथा युद्ध सामग्री पर आशानुशक्ति एवं रेलवे जैसी कुछ आधारभूत उद्योग को मात्र इसके अधीन कर दिया है।

20. BIFR के कार्यक्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र बढ़ा दिया गया है। 

21. PSUS की भूमिका को समाप्त कर दिया गया। यह निर्णय लिया गया कि नये PSUS स्थापित नहीं किए जाएंगे। सरकार के अतिरिक्त समता अंश के माध्यम से वर्तमान विस्तार नहीं किया जायेगा। PSUS के विस्तार के लिए आवश्यक पूँजी बाजार से जुटाने का निर्देश दिया गया। सरकार द्वारा क्रय के लिए निविदा जारी करना मूल्य प्राथमिकता को समाप्त कर दिया गया। 

घाटे में चल रही PSUS के BIFR के क्षेत्र में लाने का निर्णय पुनसंरचना कार्यक्रम का भाग था। बीमार इकाइयों की पुनर्स्थापना के लिए कोई पन नहीं दिया जायेगा PSUS में सरकारी समता पूँजी का विनिवेश कर दिया जायेगा।

नई व्यापार नीति (New Trade Policy) विदेशी व्यापार के उदारीकरण ने देश के विदेशी व्यापार की स्थिति में बहुत अधिक परिवर्तन कर दिया है। आयात-निर्यात व्यापार को नियंत्रण के चंगुल से मुक्त कर दिया है। एक ही झटके में देश की आयात-निर्यात गतिविधियों पर वर्षों पुराने

नियंत्रण को समाप्त कर दिया तथा इन वर्षों के दौरान बहुत-सी कमजोर नीतियाँ जिन्होंने विदेशी व्यापार एवं निवेश नीति को प्रभावित किया हुआ था को वापस ले लिया गया।

Q.3. 1991 में भारत सरकार ने किन आर्थिक परिवर्तनों को प्रारंभ किया है। कुछ महत्त्वपूर्ण प्रमुख परिवर्तनों को संक्षेप में समझाइये।

(What economic changes initiated by the government of Indian since 1991 ? Explain in brief the major changes.)

Ans. आर्थिक परिवर्तन (Economic Changes)

1. थोड़ी-सी गैर अनुमति वाली मदों को छोड़कर लगभग अन्य सभी पदों के आयात को दे दी गई। 

2. आयात को पूरी तरह से लाइसेंस की पकड़ से हटा दिया गया है तथा अधिकांश आयात की दिशा परिवर्तन कर दिया गया है।

3. पूँजीगत वस्तुओं को सम्मिलित कर अनेक मदों पर आयात शुल्क में भारी कटौती की गई है।

4. अनावश्यक उपभोक्ता वस्तुओं को छोड़कर शेष सभी वस्तुओं पर आयात शुल्क को घटा कर 30% और उससे भी कम कर दिया गया।

5. शुल्क एवं विनिमय दर सम्भावित सम्मानित बाजार पाटने को सम्मिलित कर व्यापार के प्रवाह को नियंत्रित करने के साधन के रूप में प्रयोग किए जायेंगे तथा मात्रा संबंधी प्रतिबंध को हटाना होगा।

6. सरकार ने 1992-1993 में रुपया / दोहरा विनियम दर पद्धति आंशिक परिवर्तन प्रणाली लागू की तथा 1993-94 में चालू खाता एकीकृत विनिमय दर पद्धति पूर्ण परिवर्तन प्रणाली लागू की।

7. आंशिक परिवर्तनियता ने दोहरी मूल्य नीति प्रणाली के अंतर्गत 60% देश में प्राप्त मुद्रा के रुपये में परिवर्तन की छूट दी है। विदेशी मुद्रा को बाजार द्वारा निर्धारित दर से परिवर्तन की छूट दी है। विदेशी मुद्रा को बाजार द्वारा निर्धारित दर से परिवर्तित किया जा सकेगा जबकि 40% को सरकारी विनियम दर से तत्पश्चात् सरकार ने स्थिति में और सुधार किया तथा रुपये को व्यापार के होने पर पूरी तरह से परिवर्तनीय कर दिया।

8. निर्यात कर की समाप्ति।

9. सस्ती दर पर निर्यात साख एवं आयात कर में कटौती।

10. व्यापार के होने पर रुपये की परिवर्तितता ने निर्यात के लिए प्रोत्साहन का कार्य किया। 11. निर्यात को बढ़ावा देने से संबंधित प्रक्रिया को सरल करना। जून 1962 से प्रभावित 161 मदों पर निर्यात को भारी आयात शुल्क की क्षतिपूर्ति को बढ़ा दिया गया तथा जून 1993 से इस क्षतिपूर्ति बढ़ोतरी को अतिरिक्त 331 मदों पर लागू कर दिया। शुल्क वापसी आयात को निर्यात उत्पादों के विनिर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल पर लगाई ऊँचे दर पर आयात शुल्क के कारण निर्यातक के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में और अच्छे ढंग से प्रतियोगिता के योग्य संभव हुआ।

12. निर्यात मूलक इकाई (EOU) योजना एवं निर्यात क्षेत्र (EPZ) योजना को सरल बनाया तथा कृषि बागवानी, मत्स्य पालन, मुर्गीपालन एवं पशुपालन में इन योजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया गया।

13. नई निर्यात वृद्धि पूँजीगत वस्तु योजना (EPCGS) निर्यात एक अन्य प्रोत्साहन को योजना निर्यात की शर्त के साथ पूँजीगत वस्तुओं को इसने 15% के आयातकर को छूट पर आयात को छूट दी। 

14. मान लिए गए निर्यात, विनिर्माता जिन पर ISO 9000 एवं 14000 का प्रमाण पत्र था को लाइसेंस के योग्य माना गया तथा निर्यात की परिभाषाओं और उदार बनाया गया।

EOO/SEPZ से आपूर्ति EPGC लाइसेंस के बदले आपूर्ति की सीमा निर्धारित करती है तथा पूर्व लाइसेंसों के बदले आपूर्ति को निर्यात मान्यता प्रदान की गई है। राजस्व एवं मौद्रिक सुधार (Financial Reforms)—

1. राजस्व घाटे में कमी।

2. कर प्रणाली में सुधार।

3. निगमित कर एवं व्यक्ति आय कर की दर का घटाया गया।

4. पूँजीलाभ कर एवं पन कर के निपटाने में कुछ 

वर्तमान छूटों एवं रियायतों को हटाया गया तथा कर भुगतान एवं परिवर्तनों को अधिक महबूत किया गया।

5. अप्रत्यक्ष कर उत्पादन कर एवं आयात कर में पर्याप्त कटौती की गई।

6. वैधानिक तरलता अनुपात में चरणवद्ध कटौती ।

7. जमा ब्याज दरों के मामलों में कुछ सीमा तक लोच की अनुमति।

8. पूँजी की पर्याप्तता, आप को मान्यता तथा ऋण पर हानि के लिए प्रावधान के स में मान निर्धारित किये।

9. पूँजी के आधार पर छूढ़ता प्राप्त करने तथा पूँजी की पर्याप्तता के नये मानदंड को पू करने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों को पूँजी बाजार जाने की अनुमति प्रदान की।

10. बहुत समता पूँजी के 49% तक के विनिवेश की छूट दी। 

11. निजी क्षेत्र में बैंक स्थापित करने की अनुमति प्रदान की।

12. संसद द्वारा बीमा नियमन एवं विकास अधिनियम (IRDA) पारित किया गया। पूंजी बाजार में सुधार (Improvement in Capital Market)—

1. पोर्ट फोलियो निवेश योजना के अंतर्गत प्रवासी भारतीयों एवं विदेशी निगम इकाइयों द्वार भारतीय कम्पनियों के अंश ऋण पत्र प्राप्त करने की सीमा 5% से 24% तक बढ़ा दी।

2. सेबी (SEBI) को वैधानिक संस्था बना दिया गया। 

3. ऋण पत्रों एवं कर मुक्त वांड्स को छोड़कर सार्वजनिक क्षेत्र पर व्याज की दर पर लो प्रतिबंधों को हटा लिया गया है। इन प्रतिभूतियों पर ब्याज की दरों को अब बाजार शक्ति निर्धारित करेंगी।

4. इन निगम नियंत्रण (CCI) के कार्यालय को समाप्त कर दिया गया है। अंशों की स्वतः कीमत निर्धारण को अनुमति दी गई है।

5. बोनस अंशों को और उदार बनाया गया है।

6. निवेश कर्त्ता को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उपनोकर्स के पंजीयन की योजना लागू क गई। निजी क्षेत्र को म्युचल फड स्थापित करने की छूट दी गई है।

7. पेन्शन कोप, म्यूचलफड, निवेश न्यास, सम्पत्ति प्रबंधन कम्पनियाँ एवं संस्थागत पोर्टफोलियो प्रबंधक भारत के पूँजी बाजार में कार्यरत पूंजी बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए खोल दिया गया। विदेशी दलालों को पूँजी बाजार में कार्य करने की अनुमति दी गई।

8. आर्थिक सहायता की चरणवद्ध समाप्ति एवं मूल्य नियंत्रण उठाना। नकद क्षतिपूर्ति सहायता (CCS) जो निर्यात की आर्थिक सहायता का अधिकांश भाग है पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

9. उर्वरक एवं पैट्रो उत्पादों पर से सहायता को घटा दिया गया। उर्वरक में सरकार ने फॉर्ट फेविट पोटेशियम एवं मिश्रित उर्वरक को मूल्य नियंत्रण से मुक्त कर दिया।

10. लोहा एवं इस्पात पर से मूल्य एवं वितरण नियंत्रण को हटा लिया गया। 11. पेंट्री उत्पादों में सरकार ने टूवरीकंट के मूल्य पर से पूरी तरह से नियंत्रण हटा लिया। मिट्टी का तेल एवं एल. पी. जी. के संबंध में इसने दुहरे मूल्य एवं निजी क्षेत्र द्वारा समान्तर विपणन की छूट दी।

12. सरकार ने इन उत्पादों के आयात को भी दिशा में मोड़ दिया। अब भारतीय एवं विदेशी निजी क्षेत्र भी इन व्यवसायों में प्रवेश पा सकते हैं तथा उन उत्पादों की बिक्री कर सकते हैं। सरकार नेफथा के आयात की दिशा को मोड़ दिया तथा वास्तविक उपयोग कर्ताओं को विदेशी आपूर्ति कर्ताओं से सीधे अनुमति दे दी।

Q. 4. आर्थिक पर्यावरण का क्या अर्थ है? इसकी विशेषता क्या है ? (What is the meaning of economic environment? What is its advantages ? )

Ans. आर्थिक पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है अर्थात् आर्थिक पर्यावरण = आर्थिक पर्यावरण। आर्थिक का अभिप्राय—उन सब क्रियाओं को आर्थिक क्रिया कहा जाता है जो एक मनुष्य के द्वारा अपने जीविकोपार्जन के लिए की जाती है। मुख्य रूप से इन आर्थिक क्रियाओं को पाँचों भागों में बाँटा जा सकता है-

(i) उपभोग (ii) उत्पादन (iii) विनिमय (iv) वितरण (v) राजस्व ।

पर्यावरण का अभिप्राय–पर्यावरण का अर्थ उन निकटवर्ती परिस्थितियों से है जो मनुष्य आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक जीवन आदि को प्रभावित करती है।

आर्थिक पर्यावरण इस प्रकार से समस्त सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक दशाएँ एकता समाज के आर्थिक उपभोग, उत्पादन, विनिमय, वितरण एवं को प्रभावित करती है या प्रभावित होती हैं, आर्थिकती है। आर्थिक पर्यावरण की विशेषताएँ (Characteristics of Economic Environment)-

पर्यावरण की निम्नलिखित विशेषताएँ-

“(i) आर्थिक क्रियाओं से संबंध (Relationship with Economic Environment)- आर्थिक पर्यावरण का संबंध मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं से होता है। आर्थिक याओं में कृषि उद्योग को शामिल किया जाता है।

“(ii) अनेक तत्वों का प्रभाव (Impact of Other Factors)—–आर्थिक पर्यावरण पर राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय तत्वों का प्रभाव पड़ता है। भौतिक व सामाजिक पर्यावरण इसके स्वरूप आकार आदि को निर्धारित करते हैं।

(ii) सरकार द्वारा मार्गदर्शन ( Government Guidance) – आर्थिक पर्यावरण प्रायः नीतियों, प्रेरणा, विभिन्न प्रकार के सहायता कार्यक्रमों इत्यादि से प्रभावित होता है। 

(ii) जनसाधारण का दृष्टिकोण (Public View ) — यदि देश की जनता की विधारा सरकार की याद है तो येन-केन प्रकारेण अधिक-से-अधिक धनार्जन पर जोर दिया जायेगा व नैतिक का हास होगा। इससे आर्थिक पर्यावरण दूषित होगा।

(v) आप व धन का वितरण (Distribution of Income) – समाज में आय व धन का वितरण असमान होने पर आर्थिक पर्यावरण आर्थिक सत्ता के संकेन्द्रण के कारण कुण्डित हो जाता है। घोर-बाजारी, रिश्वतखोरी आदि अनेक अवैध तरीकों का ज्यादा उपयोग होने लगता है।

(i) पूँजी की उपलब्धता (Availability of Capital)—पर्याप्त मात्रा में पूँजी उपलब्ध देने पर विविध प्रकार के व्यवसाय व काम-धन्धे अपनी-अपनी रूथि के अनुसार जनता द्वारा चलाये कह सकते हैं। अतः आर्थिक वातावरण को विस्तार मिलता है इसके विपरीत जब पूँजी का अभाव होता है तो आर्थिक क्रियाएँ भी सिमट जाती हैं।

(vii) आर्थिक विचारधारा (Economic View ) — पूँजीवादी, समाजवादी, साम्यवादी, वादी, मिश्रित आदि अनेक आर्थिक विचारधाराएँ प्रचलित है जो आर्थिक पर्यावरण के स्वभाव लाकार, विस्तार आदि को प्रभावित करती है। देश में जैसी आर्थिक विचारधारा होती है, आर्थिक या भी उसी अनुरूप डल जाती है।

Q.5. आर्थिक पर्यावरण को प्रभावित करने वाले घटक कौन-कौन से हैं? (What are the factors affecting Economic Environment?)

Ans. आर्थिक पर्यावरण को निम्नलिखित अनेक तत्व प्रभावित करते हैं- 

1. प्राकृतिक साधनों की उपलब्धता व विदोहन (Availability of Natural Resources ) देश में आर्थिक पर्यावरण वहाँ उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता व उनके उदित विदोहन पर निर्भर करता है। देश की स्थिति का मुख्य रूप से जलवायु, व्यापार तथा पीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है जो देश भू-खण्डों के मध्य में स्थित है, ये सभी देशों से आसानी से व्यापार कर सकते हैं, जबकि जो देश पूर्व अथवा पश्चिम में एक कोने में स्थित है. उसे अनेक देशों से व्यापार करने में दूरी संबंधित कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 

2. मानवीय संसाधन व उनका उपयोग (Availability of Human Resources) – मानवीय संसाधन आर्थिक पर्यावरण का प्रमुख निर्धारक पटक है। जिन देशों में पर्याप्त संख्या में नवीय संसाधन उपलब्ध होते हैं तथा श्रम शक्ति कुशल, मेहनती व प्रशिक्षित होती है यहाँ तीन से आर्थिक विकास होते हैं। देश में उत्पादन की मात्रा, रोजगार का स्तर तथा तकनीकी विकास मानवीय संसाधनों की उपलब्धि व उनके इष्टतम प्रयोग पर निर्भर है।

3. आर्थिक प्रणाली (Economic System) किसी देश की आर्थिक प्रणाली का उस देश के निवासियों के आर्थिक जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। विश्व में तीन प्रकार की अर्थव्यवस्थाएँ प्रचलित है— पूँजीवादी, समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्थाएँ पूँजीवादी में सरकार का न्यूनतम हस्तक्षेप होता है। समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन विनिमय वितरण आदि पर सरकार क नियंत्रण होता है। मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक दोनों का सामंजस्य होता है। 

4. आर्थिक नीतियाँ (Economic Policies) किसी भी देश के आर्थिक पर्यावरण उस देश का आर्थिक नीतियों का व्यापक एवं महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। आर्थिक नीतियों में मीि नीति, राजकोषीय नीति, औद्योगिक नीति, कृषि नीति, जनसंख्या नीति, कीमत नीति, व्यापारि नीति, आयात-निर्यात नीति, परिवहन नीति, रोजगार नीति आदि का समावेश रहता है।

5. आर्थिक दशाएँ (Economic Condition) देश में मौजूद विभिन्न परिस्थितियों उस देश के आर्थिक पर्यावरण पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। इन आर्थिक दशाओं मे मुख्य रूप से आर्थिक विकास का स्तर राष्ट्रीय आय का स्तर बीमा व बैंकिंग व्यवस्था कर संरचन सहायता, विदेशी ग्रहण भार, व्यापार संतुलन व भुगतान संतुलन की दशा, आधारभूत उपलब्धता, व्यापार चक्र, निर्धनता, बेकारी, आर्थिक विषमता आहे अनेक ऐसे किए जाते हैं। मुद्रा बाजार व पूंजी बाजार (Money Market and Capital Market

6.आर्थिक पर्यावरण के निर्माण में मुद्रा बाजार व पूंजी बाजार का अत्यंत है। मुद्रा बाजार द्वारा अल्पकालीन ऋणों व साख की व्यवस्था की जाती है तथा पूंजी बाजार economic policy) देश के महत्त्वपूर्ण स्थान हो दीर्घकालीन साख की व्यवस्था की जाती है ये बाजार जितने देश में पूंजी में उतनी ही अधिक गतिशीलता होगी। विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले आर्थिक सुधारों का वर्णन कीजिए।  

Q.6. नवीन आर्थिक नीति की सफलता एवं आलोचनाओं की व्याख्या करें। (Explain the successes and criticism of new economic policy.)

Ans. नवीन आर्थिक नीति को सफलताएँ- 1. राष्ट्रीय आय में वृद्धि (Increase in National Income) – प्रचलित मूल्ये आधार पर भारत की राष्ट्रीय आय 1990-91 में 4,50,280 करोड़ रु. थी जो 1999-200 में 15.90,301 करोड़ रु. हो गई। 1993-94 की कीमतों के आधार पर 1990-91 में ए आप 6,14,386 करोड़ रु. भी जो 1999-2000 में बढ़कर 10,11,224 करोड़ रु. हो

2. विकास की दर में वृद्धि (Increase in Development Rate) – 1991-92 में देख में आर्थिक विकास की दर मात्र 0.8 प्रतिशत रह गई थी, वह नवीन आर्थिक नीति के अन्तर्गत किये गये विभिन्न आर्थिक सुधारों के परिणामस्वरूप बढ़कर 1996-97 में 6.7 प्रतिशत हो गई।

3. निर्यात व्यापार में वृद्धि (Increase in Foreign Trade) – 1990-91 में भारत का निर्मात व्यापार 32,553 करोड़ था जो 1996-97 में बढ़कर 1,18,817 करोड़ रु. तथा 1998- 09 में 19,753 करोड़ रु. से गया।

4. विदेशी विनिमय कोषों में वृद्धि (Increase in Foreign Exchange Reserves)— स्वयं और SDR को छोड़कर देश में 1991-92 में विदेशी मुद्रा भण्डार केवल 14,578 करोड़ रु. का ही रह गया था। इससे विदेशी निवेशक आशंकित हो गये थे तथा वे अपने निवेश भारत से बाहर ले जाने लगे। 1997-98 में पुनः बढ़कर 1.02.507 करोड़ रु. हो गया। 

5. राजकोषीय घाटे में कमी (Decrease in Fiscal Deficit) – 1990-91 में सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.) के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय पाटा 7.7% था। 1991-92 में आर्थिक सुधारों को लागू करने के बाद यह 5.4% रह गया। 

नवीन आर्थिक नीति की आलोचनाएँ-

1. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का प्रवेश (Entrance of MNCs)— उदारीकरण व निजीकरण नीति को प्रोत्साहन देने के कारण कम्पनियों का भारत में प्रवेश बढ़ गया। इससे स्वदेशी कम्पनियों के समक्ष अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है।

2. बेरोजगारी में वृद्धि (Increase in unemployment )—– विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ने, स्वदेशी उद्योगों के बंद होने तथा आधुनिकतम विदेशी तकनीक अपनाने के कारण देश में बेरोजगारी समस्या पीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती जा रही है।

3. विदेशी निवेश में वृद्धि (Increase in Foreign Investment )—उदारीकरण के कारण विदेशी पूंजी भारत में अपने पैर निरन्तर फैलाती जा रही है। इस विदेशी पूंजी पर एक अवधि के बाद चुकाये जाने वाले भारी भरकम व्याज तथा लाभांश का जब देश में पलायन होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था अनेक संकटों में घिर जाएगी।

4. दबाव की राजनीति (Pressure Politics)—विकसित राष्ट्र भारत पर मुक्त व्यापार अपनाने हेतु दबाव डाल रहे हैं जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका अग्रणी है। विदेशी कम्पनियों उन्हें क्षेत्रों में अपना विनियोग करना चाहती है। जहाँ स्वदेशी कम्पनियाँ बहुत अच्छा कारोबार कर रही हैं। 

5. आर्थिक विषमता का संकट (Monetary Inequalities) उदारीकरण व निजीकरण नीति का सारा लाभ बड़े औद्योगिक घराने व व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा विदेशी निवेश ही बटोर रहे हैं। अनेक प्रकार के शुल्कों में दी जाने वाली रियायतों के कारण सरकारी खजाने में आप घटी है। 

Q.8. आर्थिक नियोजन से क्या अभिप्राय है ? आर्थिक नियोजन की विशेषता बतायें। (What does economic planning mean? Explain the importance of conomic planning.) 

Ans. वर्तमान समय में आर्थिक नियोजन सर्वाधिक लोकप्रिय विषय है। आज दुनिया के -सभी विकसित एवं अर्द्ध-विकसित देशों के वातावरण में आर्थिक नियोजन की ध्वनि गूंज रही है। विश्व का प्रत्येक देश जो तीव्र आर्थिक विकास चाहता है वह भले ही पूँजीवादी देश हो या समाजवादी देश अथवा साम्यवादी देश, वह किसी-न-किसी रूप में आर्थिक नियोजन को अवश्य अपनाता है। आर्थिक नियोजन की लोकप्रियता प्रधानतः दो प्रकार के तत्वों पर आधारित है। 

अर्द्ध-विकसित राष्ट्र अपने साधनों का सर्वोत्तम प्रयोग कर तेजी से विकास करने के लिए नियोजन का सहारा लेते हैं। नियोजन के माध्यम से वे अपने देश में बेकारी व निर्धनता दूर करने प्रयत्न करते हैं। विकसित राष्ट्र और आर्थिक विकास करने व आर्थिक स्थायित्व के लिए -20 योजन का सहारा लेते हैं। यही नहीं कई देश मिलकर सामूहिक प्रयत्नों से विकास के लिए नियोजन का सहारा लेते हैं।

सिस के अनुसार नियोजित अर्थव्यवस्था आर्थिक संगठन की एक ऐसी प्रणाली जिसमे वैक्तिक और पृथक मंत्रों उपक्रमों एवं उद्योगों को एक व्यवस्था की समन्वित इ मानते हैं, जिनस उद्देश्य एक निश्चित अवधि में समस्त उपलब्ध साधनों का किसी अन की आवश्यकताओं का अधिकतम संतुष्टि के लिए उपयोग करना है।” आर्थिक नियोजन की विशेषताएँ-

1. आर्थिक संगठन की विधि (Method of Economic Integration)—आह नियोजन आर्थिक संगठन की एक विधि है, जिसमे अर्थव्यवस्था को विशेष प्रकार से व्यवस्ि किया जाता है।

2. निरन्तर प्रक्रिया (Continuous Process)- नियोजन अल्पकालीन न होकर निर चलाने वाली प्रक्रिया है। एक बार नियोजन अपनाने के बाद नियोजन प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

3. पूर्व निर्धारित उद्देश्य (Pre-determined Objectives) – आर्थिक नियोजन का निर्मा पूर्व निर्धारित तथा सुविचारित उद्देश्य को प्राप्त करना होता है।

4. प्राथमिकताओं का निर्धारण (Fixation of Priorities) आर्थिक सघन सदैव सी होते हैं। विकास के लिए संभावनाएं अधिक होती है, किन्तु सभी कार्य एक समय में पूरे नहीं हो प 5. मूल्यांकन (Evaluation)— नियोजित अर्थव्यवस्था में केवल विकास कार्यों का नियर साप ही नहीं होता है बल्कि उन कार्यक्रमों को लागू कर देने के बाद उन कार्यक्रमों का मूल्यांक भी किया जाता है।

6. राजकीय हस्तक्षेप (Government Interference ) — नियोजित अर्थव्यवस्था में आर्थि शक्तियों को स्वतंत्र रूप में कार्य करने के लिए खुला नहीं छोड़ा जाता है बल्कि हर आर्थिक है में हस्तक्षेप एवं नियंत्रण रहता है।

Q.9. आर्थिक नियोजन के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। (Explain the main objectives of economic planning.)

Ans. आर्थिक नियोजन के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार है–

(अ) आर्थिक उद्देश्य (Economical Objectives) — (i) तीव्र आर्थिक विकास (Fast Economical Development) नियोजन द्वारा

देश स्वतंत्र अर्थव्यवस्था की तुलना में अधिक तेजी से आर्थिक विकास करना चाहता है। देश समस्त साधनों के अनुकूलतम उपयोग द्वारा नियोजन में यह कार्य सरलता से किया जा सकता है।

(ii) उत्पादन में वृद्धि (Increase in Production) आर्थिक नियोजन द्वारा अर्थव्यवस्थ के सभी क्षेत्रों में उत्पादन में वृद्धि करने का उद्देश्य निर्धारित किया जाता है।

(iii) साधनों का सर्वोत्तम प्रयोग (Best Utilization of Resources)— अनियोजि अर्थव्यवस्था में साधनों का अविवेकपूर्ण उपयोग होता है जबकि नियोजित अर्थव्यवस्था में साप के सर्वोत्तम उपयोग की व्यवस्था की जाती है।

(ब) सामाजिक उद्देश्य (Social Objectives)-

(i) सामाजिक सुरक्षा (Social Security ) समाज के प्रत्येक सदस्य को समय-बे-सम

पाँच शत्रुओं, जैसे—मृत्यु, दुर्घटना, बीमारी, बुढ़ापा और बेकारी का सामना करना पड़ता आर्थिक नियोजन में इन शत्रुओं के विरुद्ध सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है। 

(ii) सामाजिक समानता (Social Equality) आर्थिक नियोजन में एक तरफ आ – समानता की स्थापना की जाती है वहीं सामाजिक समानता का उद्देश्य भी रखा जाता है। 

(iii) अहितकर कार्यों पर रोक (Control on Adulteration) नियोजन में व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं के उत्पादन एवं उनके वितरण पर रोक लगाई जाती

(स) राजनीतिक उद्देश्य (Political Objectives) 4 (i) विदेशी आक्रमण से सुरक्षा (Protection from Enemies) एक देश ज तैयोजन कार्यक्रमों से रक्षा ब्यवस्था को मजबूत करके विदेशी आक्रमणों से सुरक्षा का उद्देश्य प्र करता है।

(ii) शान्ति स्थापना (Establising Peace)—आज विश्व शांति स्थापना हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नियोजन की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी है।

(iii) अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग (International Co-operation)— दुनिया के अनेक देशों ने अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए नियोजन का प्रयोग किया है। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग विकास में सहायक होता है।

Q. 10. व्यवसाय का समुदाय या समाज के प्रति क्या उत्तरदायित्व है ? (What are the social responsibility of a Business?)

Ans. एक व्यवसायी भी वैसा ही नागरिक है जैसा कि अन्य नागरिक। इसलिए उसे भी एक अच्छे नागरिक की भाँति अपने कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिए। एक व्यवसायी के रूप में उसके अपने समुदाय के प्रति अनेक दायित्व है। जिन्हें भली-भाँति निभाना अच्छे नागरिक के लक्षण हैं।

ये दायित्व निम्नलिखित हैं–

(i) स्थानीय समुदाय को रोजगार देना (Providing Employment Opportunities)- जिस क्षेत्र या स्थान में व्यवसाय स्थित हो उसमें उसी क्षेत्र वालों को रोजगार दिया जाए। यदि तकनीकी तथा विशेष योग्यता वाले स्थानीय कर्मचारी उपलब्ध न हों तो भले वे बाहर से लिए जा सकते हैं। परन्तु व्यवसाय के अधिकांश लोग उसी स्थान विशेष के रखे जाने चाहिए। 

(ii) स्थानीय समुदाय को शिक्षा स्वास्थ्य आवास आदि की सुविधाएँ एवं सहायता प्रदान करना (Providing Housing Facilities) व्यवसायी अपनी कमाई का कुछ अंश अपने पास वाले क्षेत्र में विद्यालय, चिकित्सालय, आवास गृह, उद्यान, पुस्तकालय, बाल-वाटिका आदि बनाकर या उन्हें आर्थिक अनुदान प्रदान कर स्थानीय समुदाय की बहुत बड़ी समाज सेवा कर सकते हैं। 

(iii) जन समुदाय के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक होना (Uplifting Standard of Living) — स्थानीय लोगों को व्यवसाय में रोजगार देकर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है जो उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

(iv) असहाय व्यक्तियों और अपाहिजों को सहायता प्रदान करना (Helping Weaker Section of Society) समाज में जो असहाय या अपाहिज व्यक्ति हैं उनकी आर्थिक एवं अन्य प्रकार से सहायता करके व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व ठीक प्रकार से निभाया जा सकता है।

(v) समाज को उन्नति की ओर ले जाने वाले कार्यक्रमों में सहयोग देना (Helping National Social Services ) देश में प्रचलित सामाजिक कार्यक्रमों जैसे परिवार नियोजन, अल्प बचत, ग्राम-सुधार आदि गतिविधियों को आगे बढ़ाने में योगदान देना भी व्यवसाय का एक कम महत्त्वपूर्ण सामाजिक दायित्व नहीं है।

Q. 11. भारतीय नियोजन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए (Explain the main features of Indian Planning.)

Ans. (i) मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy ) – 1948 तथा बाद में 1956 की औद्योगिक नीतियों में निजी क्षेत्र के विकास के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के विकास को भी कुछ अति महत्त्वपूर्ण व आधारभूत क्षेत्रों में अपनाने का निश्चय किया गया था, उसी के परिणामस्वरूप योजनाओं में विकास लक्ष्य निजी व सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए जाते हैं। (ii) निर्देशित नियोजन (Property Directed Planning)– भारतीय योजना आयोग

कोई सरकारी संस्था नहीं है वरन् यह तो एक सलाहकारी संस्था है। इसके द्वारा तैयार की गई योजनाएँ थोपी नहीं जा सकती हैं। (iii) व्यापकता (Universality) भारत में योजनाओं का प्रारूप इस प्रकार तैयार किया जाता है कि देश का न तो कोई भोगौलिक क्षेत्र, न समाज का कोई वर्ग भले ही वह किसी पूजा

पद्धति में विश्वास रखता हो या सामाजिक वर्ग का हो और न अर्थव्यवस्था का कोई अंग नियोजन के क्षेत्र से बाहर रह पाता है। 

(iv) भौतिक व वित्तीय नियोजन (Physical and Financial Planning)- भारतीय नियोजन की यह विशेषता है कि नियोजन की सफलता के लिए भौतिक तथा वित्तीय संसाधनों के यथानुसार प्रयोग की व्यवस्था की जाती है। भौतिक आयोजन में वास्तविक साधनों को जुटाकर

उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जाते हैं और वित्तीय आयोजन में साधनों का आंकलन करके निवेश के लिए वित्त की व्यवस्था की जाती है।

(v) वत् प्रक्रिया (Continuous Process) – भारत में नियोजन प्रक्रिया एक अविरल चलने वाली सपा है। तीसरी योजना के उपरान्त आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाने के कारण पंचवर्षीय योजनाओं की प्रक्रिया को स्थगित करके एक-एक वर्ष की तीन योजनाएँ (1966-69) चालू की गई और पुनः 1969 में पंचवर्षीय योजना की प्रक्रिया, चीथी योजना (1969-74) के

रूप में प्रारंभ कर दी गई थी। 

Q. 12. व्यावसायिक वातावरण की विशेषताएं बतलाइए। (Explain characteristics of Business Environment.)

Ans. व्यावसायिक वातावरण की विशेषताएँ (Characteristics of Business Environment)—व्यावसायिक वातावरण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. व्यावसायिक वातावरण के घटकों में पारस्परिक निर्भरता (Factors of Business Environment are Interdependent) वातावरण अनेक घटकों से मिलकर बनता है। ये सभी घटक परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित होते है। इसलिए व्यवसाय पर पड़ने वाले प्रभाव को

स्वतन्त्र रूप से नहीं पहचाना जा सकता है। 2. व्यवसाय का सम्पूर्ण वातावरण गतिशील है (Whole Business Environment is. Dynamic) वातावरण अनेक घटकों से मिलकर बनती है और इन घटकों में से किसी-न-किसी में परिवर्तन होता रहता है।

3. व्यावसायिक वातावरण फर्मों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है (Business Environment hits Firms Differently ) यह आवश्यक नहीं है कि वातावरण में होने वाले किसी परिवर्तन का सभी व्यवसायों पर एक जैसा प्रभाव पड़े। अतः वातावरण की यह विशेषता है कि यह विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग रूप से प्रभावित करता है। 

4. व्यावसायिक वातावरण का दीर्घकालिक प्रभाव होता है (Business Environment has long-term Impact ) वातावरण में होने वाले परिवर्तन का व्यवसाय पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है क्योंकि परिवर्तित वातावरण व्यवसाय की लाभदायकता, उत्पादकता एवं विकास को प्रभावित करता रहता है।

5. अन्य विशेषताएँ (Others Chracteristics)— (i) व्यवसाय को समाज में परिवर्तन लाने का माध्यम माना जाता है। (ii) व्यावसायिक वातावरण अनिश्चित एवं अनियन्त्रित है। (iii) वातावरण के अनियन्त्रित घटकों का व्यवसाय पर असीमित प्रभाव पड़ता है तथा अनेक बाधाएँ मी उत्पन्न होती है। (iv) वातावरण में होने वाले आकस्मिक परिवर्तनों से अनेक खतरे उत्पन्न होते रहते हैं। (v) वातावरण में होने वाले बड़े एवं महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों की पहचान का दायित्व व्यवसाय पर ही है। (vi) व्यवसाय में विषम दशाओं के होते हुए भी एक व्यापक अनुकूलनशीलता का विद्यमान होना आवश्यक है।

Q.13. व्यावसायिक वातावरण का क्या महत्त्व है ?

(What is the importance of Business Environment ? )

Ans. व्यावसायिक वातावरण का महत्त्व (Importance of Business Environment)——–व्यावसायिक वातावरण का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होता है—- 

1. परिवर्तनों की जानकारी देने में सहायक (Helpful in providing information ; changes ) व्यवसाय के आन्तरिक वातावरण में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी, व्यवसाय को अपनी आन्तरिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

2. आने वाले संकटों की जानकारी देने में सहायक (Helpful in providing information Threats)—व्यवसाय की चुनीतियों एवं समस्याओं तथा आने वाले संकटों की जानकारी उचित समय पर प्राप्त करने के लिए व्यवसाय एवं वातावरण की अन्तक्रियाओं की जानकारी जरूरी है।

3. नयी चुनौतियों तथा समस्याओं की जानकारी प्राप्त करना (Toget information regarding new challenges and problems) नयाँ चुनौतियों, समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त करना। ये चुनौतियाँ निम्नलिखित स्वरूपों एवं स्रोतों में हो सकती है-

(i) पटती हुई उत्पादकता की समस्या । (ii) उत्पादन लागत में निरन्तर वृद्धि। (iii) उत्पादन प्रणाली, प्राविधियां तथा तकनीकी से तेजी से हो रहे परिवर्तन (iv) प्रबन्धकीय शैलियों, विधियों, एवं विचारणाराओं में होने वाले परिवर्तन (v) नयी प्रौद्योगिकी से उत्पन्न समस्याएँ (vi) फैशन, स्टाइल, डिजाइन, पहनावे आदि में अनिश्चित गति से परिवर्तन (vii) मानवीय व्यवहार को समझने से सम्बन्धित जटिलताएँ (viii) पारस्परिक सद्भाव को सद्विश्वास की गिरती हुई स्थिति।

4. सुदृढ़ता एवं कमजोरी की जानकरी देने में सहायक (Helpful in providing information regarding Strength and Weaknesses) व्यावसायिक वातावरण से व्यवसाया को यह जानकारी प्राप्त होती है कि उसका व्यवसाय वातावरण का सामना करने में कितना मजबूत अथवा कमजोर है।

5. भावी व्यूह रचना में सहायक (Helpful in formulating information regardings strength and Weaknesses) इसके अंतर्गत यह देखा जाता है कि प्रतियोगी फर्मे किस प्रकार व्यावसायिक वातावरण से लाभ उठा रही हैं और फिर उनके अनुसार ही योजनाएं तैयार की जाती हैं। 6. व्यावसायिक वातावरण के अन्य महत्त्वपूर्ण घटक (Other important Factors of

Business Environment)- 1. राजनीतिक अस्थिरता, दबाव समूहों की अत्यधिक सक्रियता, नौकरशाही का हावी होना।

सरकारी नीतियों, कानूनों अध्यादेशों, आदेशों, न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलता व विलम्बता का बढ़ता हुआ मजबूत जाल जिसमें व्यवसाय का उलझना कठिन नहीं। जनहित के नाम से करता हुआ शिकंजा जिससे व्यवसाय की स्वतन्त्र एवं स्वाधीन क्रियाएँ प्रायः असम्भव हो जाती हैं।

2. सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य मान्यताएँ, विश्वास, जाति व धर्म के प्रभाव, श्रम की गतिशीलता, कार्य और धन सम्पदा के प्रति आम जन के विचार, व्यवसाय के प्रति लोगों का व्यवहार व समाज में व्याप्त अन्य विश्वास व अशिक्षा आदि जो किसी भी व्यावसायिक योजना व कार्यक्रम को सफल या विफल बनाने के लिए काफी शक्तिशाली हैं।

3. खुले बाजार की अर्थव्यवस्थाओं के कारण अनिश्चित परिवर्तनों का आना तथा इनसे व्यवसाय के लिए अनेक खतरे उत्पन्न होना।

4. विभिन्न देशों की अपनी अलग-अलग शासन प्रणाली होने के कारण व्यवसाय की क्रियाओं के सीमित हो जाने की चुनौती ।

5. सरकारों की आर्थिक नीतियों में अनेक दिशाहीन एवं व्यवसाय में गतिरोध पैदा करने वाले परिवर्तनों के कारण उत्पन्न समस्याएँ। 

Q.14. व्यावसायिक वातावरण में परिवर्तन होने पर प्रबन्धकीय उत्तरदायित्व पर क्या प्रभाव होता है? (What is the Managerial Response due to changes in Business Environment 2 ) 

Ans. व्यावसायिक वातावरण में परिवर्तन (Changes in Business Environment)- व्यावसायिक वातावरण गतिशील (Dynamic) है, इसलिए इसमें निरन्तर परिवर्तन होते हैं। अतः समय के साथ-साथ व्यवसाय की समस्याएं भी परिवर्तित होती रहती हैं। उदाहरणार्थ-

1. अप्रवासन नियमों में परिवर्तन हो जाने से व्यवसायी के लिए विदेशों से कुशल व तकनीकी श्रम का आयात करना सरल हो जाए।

2. जनता के व्यवहार में परिवर्तन। 

3. राजनीतिक ढाँचे में परिवर्तन। 

4. आर्थिक नीतियों में परिवर्तन। 

5. वैधानिक नियमों में परिवर्तन। 

6. ग्राहकों की पसन्द में परिवर्तन।

7. उत्पादन प्रणाली, प्रविधियों तथा तकनीकी में परिवर्तन। 

8. बढ़ते हुए उपभोग, उपभोग के आकार एवं स्वरूप में परिवर्तन।

9 प्रबन्धकीय शैलियों, विधियों एवं विचारधाराओं में परिवर्तन 

10. प्रतियोगिता के स्वरूप में परिवर्तन। व्यावसायिक बातावरण में निरन्तर परिवर्तन के कारण व्यवसाय के उद्देश्य, योजनाएँ एवं नीतियाँ भी बदलती रहती हैं।

66 प्रबन्धकीय उत्तरदायित्व/कर्त्तव्य (Managerial Response ) —— प्रबन्धक के व्यवसाय में अनेक निर्णय लेने होते हैं, जैसे-उत्पादन का प्रक्रम, किस्म, मूल्य, लागत संरचना, उत्पादन प्रणाली, वितरण आदि प्रबन्धक अपने निर्णय परिवर्तित वातावरण को ध्यान में रखकर करता है। व्यवसाय की समस्त क्रियाएँ देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, वैधानिक, प्रौद्योगिकीय, नैतिक तथा सांस्कृतिक वातावरण के सन्दर्भ में निर्धारित होती है अतः सभी प्रबन्धक अपने व्यवसाय का सफलतापूर्वक संचालन एवं विकास करने के लिए परिवर्तनों की चुनौतियों को स्वीकार करके ही व्यावसायिक लेते हैं।

वातावरण विश्लेषण (Environment Analysis ) – वातावरण विश्लेषण द्वारा व्यावसायिक अवसरों तथा व्यवसाय की आन्तरिक क्षमताओं के भव्य एक उचित समायोजन किया जाता है। वातावरण की विभिन्न अवस्थाएँ एवं स्थिति व्यवसाय के उद्देश्यों के निर्धारण को प्रभावित करती है। अतः यह आवश्यक है कि वातावरण के विभिन्न घटकों-ग्राहक, सरकार, चुनौतियों, प्रतियोगिता स्तरों, प्रभावों तथा विभिन्न प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया जाये।

वातावरण विश्लेषण के लिए प्रयत्थक स्वोट विश्लेषण (SWOT Analysis) की सहायता खेते हैं। (SWOT) का अर्थ है-S-Strengths, W-Weaknesses, O-Opportunities, T-Threats), स्वॉट विश्लेषण के अन्तर्गत व्यवसाय की शक्तियों (Strengths), कमजोरियों (Weaknesses), अवसरों (Opportunities) तथा आशंकाओं (Threats) का विश्लेषण किया जाता है। 

इस विश्लेषण से व्यावसायिक वातावरण के परिवर्तनों से उत्पन्न खतरों, आशंकाओं तथा अवसरों की उचित पहचान हो सकती है। व्यवसाय की शक्तियों तथा कमजोरियों को ध्यान में रखकर नयी नीतियों को तैयार करने में सहायता मिलती है। जैसे—शक्तियों व कमियों का सम्बन्ध व्यवसाय के पास वित्तीय साधन उपलब्ध है या नहीं। कई बार व्यवसाय के नये अवसर प्राप्त होती हैं, लेकिन उसकी अपनी शक्ति इन्हें प्राप्त करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए स्वॉट (SWOT) विश्लेषण कम्पनी की सदैव सक्षम एवं परिस्थितियों के अनुसार चलने को तैयार रहने में सहायता करता है।

निदान एवं व्यूह रचना (Diagnosis And Strategy ) व्यावसायिक वातावरण विश्लेषण के परिणामों का निदान करके व्यूह रचना की योजना बनाई जाती है। ब्यूह रचना के निर्धारण के लिए वातावरण द्वारा प्रदत्त अवसर एवं आपत्ति (Environment Opportunities and threats)- तथा व्यवसाय की शक्ति एवं कमजोरी (Business Strength and Weakness) को आधार बनाया जाता है।

निदान का मुख्य कार्य प्रबन्धक एवं विभागीय प्रबन्धकों की एक टीम के द्वारा किया है। इस कार्य के लिए प्रबन्धक पेशेवर विशेषज्ञों की सहायता ली जाती है।

निदान एवं व्यूह रचना में निम्नलिखित घटकों का ध्यान रखना चाहिए- 1. कभी-कभी व्यूह रचना में परस्पर विरोधी कार्यों को भी करना होता है क्योंकि व्यूह रचना

गतिशील वातावरण के सन्दर्भ में निर्धारित होती है जैसे—एक संगठन एक ही समय में अपने एक व्यवसाय में वृद्धि कर सकता है तथा दूसरे व्यवसाय का विनिवेश भी कर सकता है। जबकि यह परस्पर विरोधी कार्य हैं।

2. व्यूह रचना अनुभवी प्रबन्धकों के कारण की जाए।

3.व्यूह रचनाकारों का आशावादी होना।

4. एक सतर्क एवं जागरूक व्यवसायी को परिवर्तन की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपितु

परिवर्तन को स्वीकार करके मनोवैज्ञानिक तैयारी करनी चाहिए।

Q. 15. व्यावसायिक वातावरण के विभिन्न आयामों का वर्णन कीजिए। (Discuss the various dimensions.)

Ans. व्यावसायिक वातावरण के आयाम अथवा समष्टि वातावरण अथवा सामान्य वातावरण मुख्य घटक निम्नलिखित है-

1. आर्थिक वातावरण (Economic Environment), 2. राजनैतिक वातावरण (Political Environment), 3. सामाजिक वातावरण (Social Environment), 4. वैधानिकनियमन वातावरण (Legal Regulatory Environment), तथा 

5. तकनीकी संबंधी वातावरण (Technological Environment)।

1. आर्थिक वातावरण (Economic Environment)- रामष्टि वातावरण के विभिन्न घटकों में आर्थिक वातावरण का विशेष महत्व है। आर्थिक वातावरण को तीन भागों में पीटा जा सकता है। अब हम इनके व्यवसाय पर प्रभाव का अध्ययन करेंगे। ये निम्नलिखित है-

(i) आर्थिक प्रणाली (Economic System) आर्थिक वातावरण को समझने के लिए किसी देश में प्रचलित आर्थिक प्रणाली की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। आर्थिक प्रणाली व्यवसाय के खुलेपन को प्रभावित करती है। आर्थिक प्रणाली मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है (a) समाजवादी आर्थिक प्रणाली (Socialistic Economic System)—इस प्रणाली में

व्यवसाय का संचालन एवं नियंत्रण सरकार के द्वारा होता है अर्थात् व्यक्तियों को व्यवसाय चलाने की कोई स्वतंत्रता नहीं होती। उत्पादन के सभी साधनों पर सरकार का नियंत्रण होता है। किसी को भी जी सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं होता। सभी व्यक्ति केन्द्रीय नियोजित अर्थव्यवस्था (Centrally Planned Economy) के लाभों का आनंद लेते हैं। 

अर्थव्यवस्था की यह पद्धति मुख्यतः रूस (Russia), चीन (China), हंगरी (Hungary) तथा पोलैण्ड (Poland) द्वारा अपनाई जाती है। (b) पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली (Capitalistic Economic System) – इस प्रणाली में व्यवसाय के निजी स्वामित्व पर अधिक बल दिया जाता है। अतः व्यवसाय का अधिक प्रसार होता है। इसे स्वतंत्र बाजार अर्थव्यवस्था भी कहते हैं। इसके अंतर्गत उत्पादन के साधनों (जैसे-श्रम, भूमि, पूँजी आदि) पर निजी लोगों का स्वामित्व होता है। 

क्या उत्पादित करना है, कैसे करना है और कौन करेगा, यह बाजार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है। निष्कर्म के रूप में कहा जा सकता है कि उपभोग (Consumption), उत्पादन (Production), वचत (Savings), विनियोग (Investment) आदि की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। यह अर्थव्यवस्था अमेरिका (U.S.A.) तथा कनाडा (Canada) में प्रचलित है।

(c) मिश्रित आर्थिक प्रणाली (Mixed Economic System) – इस प्रणाली के अंतर्गत व्यवसाय पर सरकार एवं निजी लोगों, दोनों का स्वामित्व होता है। इसके अंतर्गत कुछ आधारभूत उद्योग सरकार के नियंत्रण एवं स्वामित्व में चलाये जाते हैं। राष्ट्र हित को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से निजी क्षेत्र के उद्योगों पर भी सरकारी निगरानी रहती है। भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाने वाले देशों का एक अच्छा उदाहरण है।

(ii) आर्थिक नीतियाँ (Economic Policies) आर्थिक नीतियों का किसी देश के व्यवसाय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आर्थिक नीतियों का निर्धारण आर्थिक क्रियाओं के संचालन के लिए किया जाता है। आर्थिक क्रियाओं में आयात-निर्यात, रोजगार, कर ढाँचा, उद्योग, सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक ऋण, कृषि, विदेशी विनियोग आदि को सम्मिलित किया जाता है। इन सभी आर्थिक क्रियाओं के संचालन के लिए निम्नलिखित आर्थिक नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं-

(a) आयात-निर्यात नीति ( Import Export Policy), (b) रोजगार नीति (Employment Policy), (c) कर नीति ( Taxation Policy), (d) औद्योगिक नीति (Industrial Policy), (e) सार्वजनिक व्यय नीति (Public Expenditure Policy), (f) सार्वजनिक ऋण नीति (Public Debt Policy), (g) कृषि नीति (Agriculture Policy), (h) विदेशी विनियोग नीति (Foreign Investment Policy) आदि।

इन सभी नीतियों का व्यवसाय पर प्रभाव पड़ता है, जैसे-आया निर्या नीति के अंतर्गत आयात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू उद्योगों को लाभ होगा।

(iii) आर्थिक दशाएँ (Economic Conditions) –आर्थिक दशाओं का अभिप्राय उन दशाओं से है जिनका संबंध देश के आर्थिक विकास की संभावनाओं से है। आर्थिक दशाओं के आधार पर ही सरकार लोकहित में अनेक कार्यक्रम शुरू करती है। 

ये कार्यक्रम व्यवसाय को प्रभावित करते हैं। व्यवसायी इनसे प्रभावित होकर अनेक कार्यक्रम बनाते हैं जो इस प्रकार है-विज्ञापन रणनीति, नए बाजार की खोन, नए उत्पादों को बाजार में खाना, नई उत्पादन विधियाँ आदि आर्थिक दशाओं के कुछ उदाहरण निम्न है- (a) विदेशी पूँजी (Foreign Capital), (b) प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति (Supply of

Natural Resources), (c) आर्थिक विकास का स्तर (Level of Economic Development), (d) म्याज की दर (Rate of Interest), (e) राष्ट्रीय आय (National Income), (f) औद्योगिक विकास (Industrial Development), (g) विदेशी व्यापार (Foreign Trade), (h) सामान्य मूल्य स्तर (General Price Level) आदि ।

आर्थिक वातावरण का व्यवसाय पर प्रभाव (Impact of Economic Environment on Business)-आर्थिक वातावरण के व्यवसाय पर प्रभाव के मुख्य उदाहरण निम्नलिखित हैं-

(i) बैंकिंग सेक्टर में सुधार के उपरांत बैंकों द्वारा आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करवाना और बेहतर सेवाएं प्रदान करना। इससे व्यवसाय का तेजी से विकास हो रहा है।

(ii) आर्थिक वातावरण में परिवर्तन के कारण ही लिजिंग कम्पनियों (Leasing Cos.), म्यूचुअल फण्ड (Mutual Fund) तथा वैचर केपिटल व्यवसाय (Venture Capital Business) स्थापित हुए। 2. राजनैतिक वातावरण (Political Environment) राजनैतिक वातावरण विभिन्न

नैतिक दलों की विचारधाराओं (Ideologies) का योग होता है। इसके अंतर्गत सरकारी ओं से संबंधित तत्वों को सम्मिलित किया जाता है, जैसे- वर्तमान सरकार का प्रकार (अर्थात् “तीय अथवा बहुदलीय सरकार), विभिन्न उद्योगों के प्रति सरकारी दृष्टिकोण, विभिन्न नियमों

पारित करने की ओर प्रगति, राजनैतिक दलों के प्लेटफार्म, विभिन्न पदों के लिए प्रार्थियों का ज्ञान, विभिन्न समूहों द्वारा अपने हित में प्रभावपूर्ण समर्थन जुटाने के प्रयत्न आदि। प्रत्येक राजनैतिक दल का व्यावसायिक समुदाय (Business Community) के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण होता है। इसका जीवित उदाहरण चुनाव के दिनों में शेयर बाजार में होने वाले

उतार-चढ़ाव में देखा जा सकता है। हो सकता है कि किसी एक विशेष राजेतिक दल के सत्ता में आने की उम्मीद से अंशों के भाव आसमान को छूने लगे और किसी अन्य दल के सत्ता में आने की उम्मीद से अंशों के भाव न्यूनतम स्तर पर आ जाए। इससे स्पष्ट होता है कि पहले राजनैतिक दल का व्यवसायस के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है इसीलिए इसका शेयर बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तथा दूसरे राजनैतिक दल के सत्ता में आने की उम्मीद से अंशों के भाव

में भारी गिरावट का आना उसके व्यवसाय के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

 राजनैतिक वातावरण का व्यवसाय पर प्रभाव (Impact of Political Environment on Business)—राजनैतिक वातावरण के व्यवसाय पर प्रभाव के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं- (i) सन् 1977 में जनता सरकार ने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (Multinational Companies MNCs) के विरुद्ध सख्त रवैया अपनाया। परिणामस्वरूप, IBM व Coca-Cola को भारत

छोड़ना पड़ा। (ii) नई सरकार द्वारा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भारत में विनियोग के लिए प्रोत्साहित किया।

गया है। इससे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बड़े स्तर पर भारत में प्रवेश के दरवाजे खुल गए। परिणामस्वरूप, Coca-cola को भारत छोड़ना पड़ा।

(iii) राजनैतिक रूचि के कारण ही हैदराबाद (Hyderabad) को साइबराबाद (Cyberabad) अर्थात् सूचना तकनीकी (Information Technology-IT) का केन्द्र माना जाने लगा। परिणामस्वरूप, अनेक IT कम्पनियाँ स्थापित हुई।

3. सामाजिक वातावरण (Social Environment) — व्यवसाय सामज में ही जन्म लेता है और विकसित होता है। अतः समाज के विभिन्न घटकों का व्यवसाय पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। 

सामाजिक घटकों में रीति-रिवाज, फैशन, परम्पराएँ, इच्छाएँ, आकांक्षाएँ, शिक्षा का स्तर, जनसंख्या, लोगों का जीवन-स्तर, धार्मिक मूल्य, आय का वितरण, भ्रष्टाचार, पारिवारिक

ढाँचा, उपभोक्ता सतर्कता आदि को सम्मिलित किया जाता है। सामाजिक वातावरण का व्यवसाय पर प्रभाव (Impact of Social Environment on Business)- सभी सामाजिक पटक किसी-न-किसी रूप में व्यावसायिक निर्णयों को प्रभावित करते हैं। 

उदाहरण के लिए, वस्तुओं का उत्पादन फैशन के अनुसार ही करना पड़ता है। इसी प्रकार धार्मिक मूल्य व्यवसाय को प्रभावित करते हैं, जैसे कुछ वर्ष पहले बनस्पति घी के निर्माताओं द्वारा घी बनाने के लिए मांस का आयात किया गया था। लोगों के द्वारा इसका सख्त विरोध किए जाने पर सरकार ने इन घी अंश होने की खबर से लोगों ने उनका विरोध किया और उनके सेवन को कम कर दिया।

4. वैधानिक नियमन वातावरण (Legal-Regulatory Enviornmnet) व्यावसायिक गतिविधियों के जोड़ से ही वैधानिक नियमन वातावरण बनता है। जिन व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में अधिनियम बनाए जाते हैं उनमें मुख्य इस प्रकार हैं- क्रय-विक्रय, औद्योगिक झगड़े, मजदूरी, साझेदारी व्यवसाय का संचालन, कम्पनी व्यवसाय का संचालन, विदेशी विनिमय आदि ।

भारत में उपरोक्त व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित निम्नलिखित अधिनियम पास किए गए है- 

(i) वस्तु विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act),

(ii) औद्योगिक विवाद अधिनियम (Industrial Dispute Act),

(iii) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (Minimum Wage Act).

(iv) भारतीय साझेदारी अधिनियम (Indian Partnership Act). 

(v) भारतीय कम्पनी अधिनियम (Indian Companies Act,

(vi) विदेशी विनिमय प्रबन्ध अधिनियम (Foreign Exchange Management), 

(vii) ट्रेड मार्क अधिनियम (Trade Mark Act),

(viii) आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodity Act), 

(ix) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act),

(x) माप-तौल प्रमाप अधिनियम (Standards of Weights and Measures Act)। इन सभी अधिनियमों के प्रावधानों का व्यावसायिक निर्णयों पर प्रभाव पड़ता है।

वैधानिक नियमन वातावरण का व्यवसाय पर प्रभाव (Impact of Legal Regulatory Environment on Business)—वैधानिक नियमन वातावरण के व्यवाय पर प्रभाव के मुख्य उदाहरण निम्नलिखित है-

(i) पूँजी बाजार में नियंत्रण को हटाने से प्राथमिक बाजार में अनेक नए निर्गमनों (Issues) के माध्यम से बड़ी मात्रा में पूँजी एकत्रित हुई।

(ii) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment FDI) तथा विदेशी विनिमय (Foreign Exchange) पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का भारत में बड़ी मात्रा में प्रवेश हुआ। फलस्वरूप, विदेशी विनिमय भण्डार में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई।

5. तकनीकी संबंधी वातावरण (Technological Environment) तकनीकी के अंतर्गत वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने के लिए नई विधियों एवं यंत्रों की खोज को सम्मिलित किया जाता है। तकनीकी परिवर्तनों से बेहतर उत्पादन विधियाँ उपलब्ध होती हैं तथा कच्चे माल का अनुकूलतम प्रयोग संभव होता है। 

तकनीकी परिवर्तनों से व्यवसाय को अवसर (Opportunities) तथा खतरे (Threats) दोनों प्राप्त होते हैं। यदि कोई कम्पनी समय रहते इनको समझ लेती है तो वह अपने उद्देश्य को पूरा कर लेती है अन्यथा उसके अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाता है। उदाहरण के लिए, पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों के मद्देनजर ऑटोमोबाईल उद्योग (Autiomobile Industry) द्वारा पेट्रोल की कम खपत वाले वाहन तैयार करना एक तकनीकी परिवर्तन है। 

केवल वही कम्पनी जीवित रहेगी जो इस परिवर्तन से कदम से कदम मिलाकर चल सकेगी। अतः कम्पनियों को तकनीकी परिवर्तनों पर लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाया जा सके।

तकनीकी सम्बन्धी वातावरण का व्यवसाय का प्रभात (Impact of Technological Enviroment on Business) तकनीकी संबंधी वातावरण के व्यवसाय पर प्रभाव के उदाहरण

निम्नलिखित हैं- 

(i) बाजार में टेलीविजन आने से सिनेमा व रेडियो उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ा। 

(ii) बाजार में फोटोर मशीनें आने से कार्बन पेपर व्यवार पर विपरीत प्रभाव पड़ा।

((iii) बाजार में बनावटी धागे से बने वस्त्र आने से सूती वस्त्र उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ा।

(iv) डिजिटल पड़ियाँ (Digital Watches) ने परंपरागत घड़ियों (Traditional Watches) के व्यवसाय को लगभग समाप्त कर दिया।

Q.16. भारतीय आर्थिक वातावरण के बदलते स्वरूप का विवेचन करें। (Explain the changing scenario of Indian economic environment.)

Ans. भारत सरकार ने जुलाई 1991 से देश को आर्थिक संकट से उबारने तथा विकास की गति को तीव्र करने के लिए आर्थिक सुधारों (Economic Reforms) का सिलसिला शुरु किया। आर्थिक सुधारों का केंद्र उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) तथा वैश्वीकरण (Globalisation) रहा। इन तीनों शब्दों के अर्थ निम्न हैं-

1. उदारीकरण (Liberalisation ) — उदारीकरण का अर्थ अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतियोगी बनाने हेतु नौकरशाही शिकंजे से मुक्ति दिलाना है। (Liberalisation means to unshackle the economy from bureaucratic cobweb to make it more competitive.) इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

(i) अधिकतर उद्योगों में लाइसेंस की अनिवार्यता को समाप्त करना। 

(ii) व्यावसायिक क्रियाओं के पैमाने का स्वतंत्र निर्धारण करना।

(iii) वस्तुओं और सेवाओं के एक स्थान से दूसरे स्थान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना।

(iv) वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य निर्धारण में स्वतंत्रता।

अर्थव्यवस्था पर लगे अनावश्यक नियंत्रणों से मुक्ति । 

(vii) आयात-निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाना

(viii) विदेशी पूँजी व तकनीकी को आकर्षित करने को सरल बनाना।

2. निजीकरण (Privatisation ) — संक्षिप्त रूप में, निजीकरण का अभिप्राय ऐसी आर्थिक प्रक्रिया से है जिसके द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम को पूर्णतया या अंशतः निजी स्वामित्व में लाया जाता है। 

(In brief, privatisation means such an economic process through which some public sector undertaking is brought either partially or completely under private ownership.) व्यापक अर्थ में, नये उपक्रम को सार्वजनिक क्षेत्र की बजाए निजी क्षेत्र में स्थापित करना भी निजीकरण है। 

इतना ही नहीं बल्कि जिन वस्तुओं का उत्पादन पहले सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित था उनके उत्पादन से सार्वजनकि क्षेत्र को वंचित करना अथवा उन्हें वंचित किए बिना ही उनके उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र को अनुमति प्रदान करना भी निजीकरण कहलाता है।

इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका में कमी तथा निजी क्षेत्र की भूमिका में वृद्धि करना।

(ii) सरकार पर राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden) कम करना। 

(iii) सरकारी तंत्र (Goverment Machinery) के आकार को कम करना। 

(iv) आर्थिक विकास की गति को तेज करना । 

(v) उपक्रमों के प्रबन्ध को बेहतर करना। 

(vi) सरकारी कोषों में वृद्धि करना। 

(vii) सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों को निजी क्षेत्र के लिए भी खोलकर प्रतियोगिता में वृद्धि करना।

3. वैश्वीकरण (Globalisation) वैश्वीकरण का अर्थ अर्थव्यवस्था का शेष विश्व के साथ एकीकरण करने से है। (Globalisation means integrating the economy with the rest of the world.) इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) सभी देशों में वस्तुओं व सेवाओं का स्वतंत्र प्रवाह। (ii) सभी देशों में पूँजी का स्वतंत्र प्रवाह। 

(iii) सभी देशों में सूचनाओं एवं तकनीकी का स्वतंत्र प्रवाह। 

(iv) सभी देशों में लोगों का स्वतंत्र आना जाना 

(v) सभी देशों में समान झगड़े निवारण विधि।

FAQs

Q. सामान्य बाह्य वातावरण और विशिष्ट वाह्य वातावरण में क्या अन्तर है ? (Distinguish between general external environment and specific external environment.)

Ans. विशिष्ट बाह्य वातावरण से आशय उन वाम शक्तियों से है जो फर्म को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं जैसे-उपभोक्ता, लेनदार, माल के भेजने वाले व्यापारी आदि। इसके विपरीत सामान्य बाह्य वातावरण से अभिप्राय उन शक्तियों से है जो व्यवसाय को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है अर्थात् यह अन्य शक्तियों को प्रभावित करती है और वह अन्य शक्तियों व्यवसाय के वातावरण को प्रभावित करती हैं।

Q. सामाजिक वातावरण व्यावसायिक संस्थाओं को किस प्रकार प्रभावित करता है ? (How the Social Environment influenced the business activities ?) 

Ans. सामाजिक शक्तियाँ-व्यवसाय को वस्तुओं का उत्पादन ग्राहकों की आवश्यकतानुसार करना पड़ता है। व्यवसाय वस्तुओं के उत्पादन में लोगों के रीति-रिवाज, शिक्षा, विचारधारा एवं आय के स्तर की अनदेखी नहीं कर सकता है। आजादी के बाद से शिक्षा के प्रसार से पुस्तकों की माँग बढ़ी है। लोगों की आय में वृद्धि होने के कारण टी.बी., फ्रिज, पी.सी.आर. आदि की माँग बढ़ी है।


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