NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक Easy Summary

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 


NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक Easy Summary


कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameनमक
लेखक | writerरज़िया सज्जाद ज़हीर | Razia Sajjad Zaheer
अध्याय संख्या | Chapter number16
अध्याय प्रकार | Chapter typeकहानी | Story
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


रज़िया सज्जाद ज़हीर का जीवन-परिचय


प्रश्न- लेखिका रज़िया सज्जाद ज़हीर का जीवन-परिचय दीजिए। 

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उत्तर- रज़िया सज्जाद ज़हीर का जन्म 15 फरवरी सन् 1917 ई. को राजस्थान राज्य के अजमेर जिले में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई तत्पश्यात् इन्होंने स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में स्नातक (बी.ए.) की परीक्षा उत्तीर्ण की। विवाहोपरांत इन्हें इलाहाबाद में रहना पड़ा। 

इसीलिए इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू विषय में एम. ए. परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1947 ई. में लखनऊ के करामात हुसैन गर्ल्स कॉलेज में इन्होंने अध्यापन कार्य किया। बाद में इन्होंने इस कार्य को छोड़ दिया। सन् 1965 ई. में उनकी नियुक्ति सोवियत सूचना विभाग में हो गई। 

इन्हें विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया जिनमें ‘सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार’, ‘उर्दू अकादमी’ (उत्तर प्रदेश) तथा ‘अखिल भारतीय लेखिका संघ आवार्ड’ प्रमुख हैं। 18 दिसंबर, 1979 ई. को इनका देहांत हो गया।

रचनाएँ – इनकी रचनाओं में जर्द गुलाब (उर्दू कहानी संग्रह) तथा ‘अल्लाह बंदा ले’ प्रमुख हैं। 

साहित्यिक विशेषताएँ-रजिया सज्जाद जहीर ने अपनी कहानियों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और आधुनिक युग में पारिवारिक मूल्यों को उभारने का प्रयास किया है। 

उनकी कहानियों में सामाजिक यथार्थ और मानवीय गुणों का सहज सामंजस्य किया गया है। भाषा-शैली- इनकी रचनाओं में उर्दू भाषा की प्रधानता रही है। इनकी भाषा सहज, सरल व मुहावरेदार है। इन्होंने अपनी रचनाओं में जन-मानस की भाषा प्रयुक्त की है।


नमक पाठ का सारांश 


नमक पाठ का सारांश: प्रस्तुत कहानी में भारत-पाक विभाजन के बाद दोनों देशों के विस्थापित पुनर्वासित व्यक्तियों की भावनाओं का मार्मिक वर्णन है। इस माध्यम से अपने-पराए, देश-परदेश के नए मापदंड दिए  हैं। विस्थापित होकर भारत में रह रही सिक्ख बीबी आज भी लाहौर को ही वतन मानती है और सौगात के रूप में लाहौर का नमक चाहती है। 

पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी देहली को अपना वतन बताता है। भारतीय कस्टम अधिकारी सुनीलदास गुप्त ढाका को अपना वतन कहता है। राजनीतिक यथार्थ के आधार पर भले ही अब इनका वतन बदला गया है किंतु इनका हृदय क्रमशः लाहौर, देहली व ढाका से ही जुड़ा है। 

अपने जन्म स्थानों से विस्थापित ये लोग हृदय के स्तर पर अपने मूल स्थान को भुला नहीं पाए है। लेखिका आशा करती है कि राजनीतिक सीमाएँ एक दिन बेमानी हो जाएँगी। इस प्रकार की आशा का जीवित रहना तीनों राष्ट्रों के हित में है।

कीर्तन में भेंट-सफिया अपने पड़ोसी सिख परिवार के घर कीर्तन में गई थी। जहाँ सिख बीबी को देखकर उसे अपनी माँ का स्मरण हो आया क्योंकि वह स्त्री उसकी माँ को हमशक्ल थी। 

सफिया की प्रेम वृष्टि से प्रभावित होकर सिख बीबी ने भी उसके विषय में जानकारी करनी चाही। घर की बहू ने बताया कि सफिया मुसलमान है जिसके भाई लाहौर में रहते हैं। यह उनसे मिलने कल लाहौर जा रही है। 

सिख बीबी ने बताया कि उसका वतन भी लाहौर है और उसे वहाँ के व्यक्ति, वहाँ का खाना, पहनावा, सैर-सपाटे और जिंदादिली आज भी याद आती है। लाहौर की याद में सिख बीबी की आँखों में आँसू निकल आते हैं। 

सफ़िया ने सांत्वना देने को दृष्टि से पूछा कि क्या आप लाहौर से कोई सौगात मँगाना चाहेंगी। इसके उत्तर में बीबी ने थोड़े-से लाहौरी नमक की इच्छा प्रकट की। एक

लाहौर से सफ़िया की विदाई— सफिया लाहौर में पंद्रह दिन रुकी। सफिया की इतनी खातिरदारी हुई, इतना प्यार मिला कि उसे पता नहीं नहीं चला कि कैसे पंद्रह दिन बीत गए। उसे मित्रों, शुभचिंतकों व संबंधियों से ढेर सारे उपहार मिले । उसने सिख बीबी के लिए भी एक सेर (एक किलो से थोड़ा कम) लाहौरी नमक ले लिया था। सामान की पेंकिग चल रही थी।

पुलिस अफसर भाई से बातचीत – पाकिस्तान से भारत नमक ले जाना गैरकानूनी है। अतः सफिया ने इस सौगात को ले जाने के संबंध में अपने भाई से बात की जो एक बड़ा पुलिस अफसर था। सफिया के पूछने पर भाई ने बताया कि नमक ले जाना गैरकानूनी है और कस्टम वाले आपके सामान की तलाशी लेंगे। वैसे भी भारत में नमक की कोई कमी नहीं है। 

सफिया ने बताया कि माँ की हमशक्ल एक सिख बीबी ने नमक मँगाया है और यह में सौगात की तरह ले जाना चाहती हूँ। भाई के तर्क करने पर सफिया ने कहा कि मैं तो चोरी छिपे नहीं अपितु दिखाकर ले जाना चाहती हूँ। सफिया ने प्रेम, आदमियत व शालीनता को कानून से ऊपर मानकर नमक ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता प्रकट कर दी। 

भाई के ये कहने पर कि आप नमक नहीं ले जा पायेंगी, बदनामी अवश्य होगी। क्रोध की अधिकता से सफिया की आँखों में आँसू आ गए।

नमक ले जाने की योजना — सफिया ने रात को सामान की पैकिंग की। सामान सूटकेट और बिस्तरबंद में आ गए। शेष रह गई कीनू (संतरे और माल्टे को मिलाकर पैदा किया गया फल, माल्टे की तरह रंगीन और मीठा, संतरे की तरह नाजुक) की एक टोकरी और नमक की पुड़िया सफिया ने नमक की पुड़िया कीनू की टोकरी में नीचे छिपा दी। 

उसने लाहौर आते समय देखा। था कि भारत से जाने वाले केला ले जा रहे थे और पाकिस्तान से आनेवाले कीनू ला रहे थे। कस्टम वाले इन फलों की जाँच नहीं कर रहे थे। उसे विश्वास था कि इस प्रकार नमक सुरक्षित । पहुँच जाएगा। अतः नमक को कीनू की टोकरी में छिपा दिया गया।

सफ़िया की स्वप्न — सामान की पैकिंग के बाद सफिया सो गई। वह लाहौर के घर के सौंदर्य, यहाँ के परिवेश, भाई, मित्र और संबंधियों के संबंध में स्वप्न देख रही है। भतीजियों की भोली-भोली बात याद आ रही है। कल चले जाने और फिर कब आने या कभी भी न आ पाने की चिंता भी स्वप्न में है। 

सिख बीबी और उसकी आँख से निकले आँसू, इकबाल का मकबरा, लाहौर का किला उसे सभी दिखाई दे रहे हैं। अचानक उसकी आँख खुल जाती हैं क्योंकि नींद में उसका पैर कीनू की टोकरी पर जा पड़ा था जिनको देते समय उसके दोस्त ने कहा था- यह हिंदुस्तान पाकिस्तान की एकता का मेया है।

ट्रेन में सफिया फर्स्ट क्लास के वेटिंग रूम में बैठी सफिया सोच रही थी कि आस-पास, उपर इतने लोग हैं, लेकिन सिर्फ वही जानती है कि टोकरी की तह में कीनूओं के नीचे नमक दुक्रिया है। 

अब उसका सामान जाँच के लिए कस्टमवालों के पास जाने लगा तो सफिया को -सा कंपन हुआ। उसने तय किया कि प्रेम की सौगात चोरी से नहीं ले जाएगी। अतः नमक पुडिया निकालकर बैग में रख ली। जब सामान जाँच के बाद रेल की ओर चला तो उसने कस्टम अधिकारी को अपनी समस्या बताई। 

समस्या से पहले सफिया ने पूछ लिया था कि कहाँ के रहनेवाले हैं। अधिकारी ने अपना वतन देहली बताया था। इसी आधार पर सफिया हिम्मत बढ़ गई और उसके हैंडबैग से पुड़िया निकालकर मेज पर रख दी। सफिया ने सारी कहानी सुना दी थी। 

कस्टम अधिकारी ने स्वयं अपने हाथ से पुड़िया बैग में रख दी। जब सफिया दलने लगी तो कस्टम अधिकारी ने कहा, “मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।

” सफिया से अंत में कस्टम अधिकारी ने कहा, “जामा मस्जिद की सीढ़ियों को मेरा सलाम कहिएगा और उन खातून को यह नमक देते वक्त मेरी तरह से कहिएगा कि लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा, तो बाकी सब रफ्ता रफ्ता ठीक हो जाएगा।

‘ गाड़ी भारत की ओर बढ़ रही थी। अटारी में पाकिस्तान पुलिस उतर गई, हिंदुस्तानी पुलिस सवार हुई। सफिया सोचती रही- एक जवान, एक-सी सूरतें और लिबास, एक-सा लबोलहजा और एक-सा अंदाज, फिर भी दोनों के हाथों में भरी हुई बंदूके। 

अमृतसर में कस्टम — अमृतसर में कस्टम वाले फर्स्ट क्लास वालों के सामान की जाँच उनके डिब्बे के सामने ही कर रहे थे। सफिया का सारा सामान देखा जा चुका था। सफिया ने अपना हैंडबैग खोलकर पुड़िया निकाली और कस्टम अधिकारी से कहा मेरे पास थोड़ा-सा नमक है। 

सफिया ने अधिकारी को सब कुछ बता दिया। अधिकारी ने सफिया की बात गौर से सुनी और सफिया के सामान को ध्यान रखने का निर्देश देते हुए सफिया से कहा, ‘इधर आइए जरा’ ।

अधिकारी सफिया को प्लेटफार्म के कमरे में ले गया। सम्मान से बैठाया, चाय पिलाई और फिर एक किताब दिखाई जिसके ऊपर लिखा था- ” शमसुलइसलाम की तरफ से सुनीलदास गुप्त को प्यार के साथ, ढाका 1946″ सफिया के पूछने पर सुनीलदास गुप्त ने बड़े गर्व से कहा- मेरा वतन ढाका है। 

बचपन में हम जनरूल और टैगोर दोनों को ही पढ़ते थे। विभाजन से पहले वर्ष पड़ने वाली मेरी सालगिरह पर मेरे मित्र ने मुझे यह किताब दी थी। सुनीलदास ढाका की याद में खो गया और कहने लगा, “वैसे तो डाम कोलकाता में भी होता है, जैसे नमक यहाँ भी होता है, पर हमारे यहाँ के डाभ की क्या बात है। हमारी जमीन, हमारे पानी का मजा ही कुछ और है।”

 और पुड़िया सफिया के बैग में रखकर आगे-आगे चलने लगा। पीछे-पीछे सफिया चली। जब सफिया अमृतसर के पुल पर चढ़ रही थी, तब पुल की सबसे निचली सीढ़ी के पास सुनीलदा गुप्त सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। सफिया सोच रही थी- “किसका वतन कहाँ है वह जो कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ।” 


नमक पाठ का शब्दार्थ 


जिस्म शरीर । नेकी—- भलमनसाहत । मुहब्बत- स्नेह, प्रेम। रहमदिली— करुणा । रोशनी- प्रकाश | उम्दा — अच्छा। नफीस—सुरुचिपूर्ण । रसिया-शौकीन। आहिस्ता-आहिस्ता — धीरे-धीरे । सितारे आँसू, नक्षत्र | साडा- हमारा सलाम-प्रणाम, नमस्कार। जवाब उत्तर । रुखसत- विदा। 

सौगात – उपहार, भेंट। परदेसी—दूसरे देश की निवासी अज़ीज — प्रिय। हिस्से-बखरे- बँटवारा। ज़रा-तनिक । बाजी— दीदी। हुकूमत — शासन। मुरौवत — संकोच। यकीन—–विश्वास । शायर—–—कवि । तोहफा—भेंट, उपहार, सौगात। 

अदीब – साहित्यकार । बेहतर—अच्छा। कीनू- संतरे और माल्टे को मिलाकर पैदा किया गया फल, माल्टे की तरह रंगीन और मीठा, संतरे की तरह नाजुक हावी – प्रभावी। वक्त — समय। महसूस अनुभूत । रान जाँघ । तरकीब उपाय । दरख्त-वृक्ष। अक्स कार्बन कापी मासूमियत भोलापन। 

सरहद—-सीमा दूध-काली पास। वेटिंग रूम-प्रतीक्षालय सिर्फ केवल तह-नीचे खिचड़ी बाल कुछ काले और कुछ सफेद बाल खत्म समाप्त। खातून नारी, स्त्री रफ्ता रफ्ता—धीरे-धीरे हसरत-अभिलाषा इच्छा नज़र दृष्टि लिबास पहनावा लबोलहजा बोलचल का तरीका अंदाज़ ढंग नवाज्—सम्मानित करना। मुश्किल — कठिनाई। टाइटल वाले सफे—–मुख पृष्ठ । फख गये। ‘डाभ कच्चा नारियल वतन देश


नमक पाठ का प्रश्नोत्तर


प्रश्न 1. सफिया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से क्यों मना कर दिया? 

उत्तर—सफिया के भाई के अनुसार पाकिस्तान की सीमा से पार नमक ले जाना गैर-कानूनी था। साथ ही उसे डर था कि सीमा पर तैनात कस्टम वाले उसे नमक नहीं ले जाने देंगे और मुफ्त में उन सबकी बदनामी भी हो जाएगी। इसी कारण उसके भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से मना कर दिया।

प्रश्न 2. नमक की पुड़िया ले जाने के संबंध में सफिया के मन में क्या द्वंद्व था? 

उत्तर- नमक की पुड़िया ले जाने के संबंध में सफिया के मन में यह द्वंद्व था कि वह उसे किस प्रकार लखनऊ ले जाकर सिख बीबी को दे। वह उसे छिपा कर ले जाए या फिर सीमा पर तैनात कस्टम अधिकारियों को दिखाकर ले जाए।

इसके साथ ही वह सोचने लगी कि यदि कस्टम अधिकारी उसे वह नमक नहीं ले जाने देंगे तो उसने अपनी माँ से जो वायदा किया था उसका क्या होगा? लेकिन उसने सोचा कि वह जान देकर भी अपने किए गए वायदे को निभाएगी।

प्रश्न 3. जब सफिया अमृतसर पुल पर चढ़ रही थी तो कस्टम ऑफिसर निचली सीढ़ी के पास सिर झुकाए चुपचाप क्यों खड़े थे? 

उत्तर—कस्टम ऑफिसर का हृदय मानवीय गुणों से युक्त था। वह सफिया के मन के भावों को अच्छी तरह समझ चुका था। वह यह भी मानता था कि भारत-पाक विभाजन के बाद सीमा के दोनों तरफ के विस्थापितों को राजनीतिक बाध्यता ने अलग तो कर दिया है, किंतु उनके दिल अभी भी जुड़े हुए हैं। 

इसी कारण प्रेम के प्रतीक चमक को लेकर सफिया जब अमृतसर पुल पर चढ़ रही थी तो कस्टम ऑफिसर निचली सीढ़ी के पास सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे।

प्रश्न 4. लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा या मेरा वतन ढाका है जैसे उद्गार किस सामाजिक यथार्थ का संकेत करते हैं ?

उत्तर—यह यथार्थ प्राकृतिक है क्योंकि मनुष्य का लगाव उसके गुणों के आधार पर होता है। हम जहाँ जन्म लेते हैं, जहाँ रहते हैं या जिन लोगों के संपर्क में रहते हैं उनसे एक विशेष अपनत्व के भाव उत्पन्न हो जाते हैं। वह उनसे चाहकर भी अलग नहीं हो सकता है। 

किंतु कुछ राजनीतिक स्वार्थी तत्त्वों के कारण हमें कभी-कभी अलग-अलग रहने पर विवश कर देते हैं, किंतु इस प्रकार का अलगाव उनके अंतर्मन को छू नहीं सकता है; वह उनके दिलों पर कब्जा नहीं कर पाता है। 

प्रश्न 5. नमक ले जाने के बारे में सफिया के मन में उठे द्वंद्वों के आधार पर उसकी चारित्रिक विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर— नमक ले जाने के बारे में सफिया के मन में उठे द्वंद्वों के आधार पर उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- 

(i) सर्वधर्म प्रेमी—सफिया सर्वधर्म प्रेमी है। वह सिख बीबी की इच्छा के अनुसार लाहौर से ले आती है। इसके लिए वह अपने भाई द्वारा मना करने पर उसे भी भला-बुरा कहती है। नमक न ले जाने की बात को किसी भी प्रकार मानने को तैयार नहीं होती है। 

(ii) दृढ़ संकल्पी – सफिया ने सिख बीबी से लाहौर से नमक लाने का वायदा किया था। इसके लिए वह अनेक कष्ट भी सहने को तैयार रहती है। वह सोचती है कि उसे जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा। इस प्रकार वह अन्त में नमक ले जाने का दृढ संकल्प पूरा भी करती है। 

(iii) स्पष्टवादिनी सफिया में स्पष्टवादिता है। वह सीमा पर कस्टम अधिकारी को नमक के विषय में स्पष्ट बता देती है उसकी इसी स्पष्टवादिता के कारण कस्टम अधिकारी नमक ले जाने के लिए मना नहीं करता बल्कि अमृतसर के पुल पर चढ़ते समय कस्टम अधिकारी सिर नीचा करके खड़ा हो जाता है।

इस प्रकार सफिया सर्वधर्म एकता को महत्त्व देने वाली, देश प्रेमी, स्पष्टवादिनी और वायदे को निभाने वाली महिला है। वहाँ जाति, धर्म और मजहब को महत्त्व नहीं देती बल्कि प्यार, मुहब्बत, इंसानियत आदि मानवीय गुणों को ही जीवन का आधार मानती है।

प्रश्न 6. मानचित्र पर एक लकीर खींच देने भर से जमीन और जनता बँट नहीं जाती है—उचित तर्कों व उदाहरणों के जरिये इसकी पुष्टि करें। 

उत्तर—प्रस्तुत पाठ भारत-पाक विभाजन के बाद सीमा के दोनों तरफ विस्थापित और पुनर्वासित लोगों के दिलों को आपस में टटोलती हुई एक कहानी है। लोगों का धार्मिक आधार पर बँटवारा कर दिया गया, किंतु लोगों की भावनाएँ उनसे अलग नहीं हुई हैं। सफिया मुसलमान होते हुए भी सिख बीवी के लिए नमक ले जाने का भरपूर प्रयत्न करती है तथा नमक ले जाकर अपना वायदा भी निभाती है।

दूसरी ओर दोनों देशों की सीमाएँ बँट जाने के बाद सीमा पर कस्टम अधिकारी तैनात कर दिया गया ताकि कोई भी व्यक्ति गैर-कानूनी वस्तुओं को एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं ला सके या ले जा सके। किंतु कस्टम अधिकारी सफिया को सम्मान सहित नमक ले जाने देता है। 

सिख बीबी भी लाहौर को अपना वतन बताती है और पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी देहली को अपना वतन बताता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि दो देशों में अलग-अलग रहते हुए भी उनकी भावनाएँ परस्पर जुड़ी

हुई हैं। अतः यह कहना झूठ है कि मानचित्र पर एक लकीर खींच देने भर से जमीन और जनता बँट जाती है। 

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

प्रश्न 7. ‘नमक’ कहानी में भारत व पाक की जनता के आरोपित भेद भावों के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ है, कैसे? 

उत्तर—पाकिस्तान अपनी क्षुद्र राजनीति के कारण वहाँ के लोगों को मजहबी शिक्षा देता है। वह कश्मीर को हड़पने के लिए आतंकवाद का सहारा लेना चाहता है। इसके लिए वह आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाता है।

किंतु भारत को यह मान्य नहीं है क्योंकि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। वह प्यार और सौहार्द के साथ रहना चाहता है। किंतु इसके लिए पाकिस्तान के दावे को एक झटके में नकार देता है या कहा जा सकता है कि वह उसे मुँहतोड़ जवाब दे देता है। 

भारत पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता चाहता है किंतु पाकिस्तान दो मुँही बात करता है। वह कारगिल में घुसपैठ करवाता है तो कभी भारतीय संसद पर हमला कराता है। अतः कहा जा सकता है कि भारत व पाक की जनता के आरोपित भेद भावों के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ है। क्यों कहा गया ?

प्रश्न 8. क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं, कुछ मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इंसानियत के नहीं होते?

उत्तर-सफिया के भाई के अनुसार लाहौर से जाते समय उसके द्वारा नमक ले जाना गैर- कानूनी था। इस प्रकार की वस्तुएं कस्टम अधिकारी एक सीमा से दूसरी सीमा में नहीं ले जाने दे सकते। 

इस पर सफिया ने उससे कहा कि सभी जगह केवल देश का कानून ही काम नहीं करता अपितु व्यक्ति के अपने नियम भी होते हैं। वह मानवता के आधार पर विचार कर कानूनी और गैर-कानूनी विषयों के बारे में अपने विवेक से काम ले सकता है। इसी कारण सफिया ने अपने भाई से ऐसा कहा । 

प्रश्न 9. भावना के स्थान पर बुद्धि धीरे-धीरे उस पर हावी हो रही थी। 

उत्तर- सफिया लाहौर से वापस लौटते समय नमक ले जाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थी। उसके भाई द्वारा मना करने पर भी उसने गुस्से में बुरा-भला कहा। वह साहित्यकार की भाषा में उससे तर्क करने लगी। वह भावना में पूरी तरह वह गई। लेकिन जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो वह अपने मन में नमक ले जाने के विषय में विचार करने लगी। इसीलिए ऐसा कहा गया। 

प्रश्न 10.मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।

उत्तर—सीमाओं का विभाजन हो जाने के बाद भी लोगों की भावनाएँ यथावत बनी रहती हैं। इस प्रकार का विभाजन उनके अंतर्मन को छू नहीं सकता है। प्यार की कोई सीमा नहीं होती। इसीलिए ऐसा कहा गया है।

प्रश्न 11. हमारी जमीन हमारे पानी का मजा ही कुछ और है। 

उत्तर—प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जन्म स्थली से गहरा लगाव रहता है। वह किसी कारणवश यदि कहीं दूसरी जगह रहने भी लग जाए तो भी उसके प्रति लगाव की भावना यथावत् बनी रहती है। उसे उस स्थान की प्रत्येक वस्तु भी अच्छी लगती है। इसीलिए ऐसा कहा गया है।

प्रश्न 12. फिर पलकों से कुछ सितारे टूटकर दूधिया आँचल में समा जाते हैं। 

उत्तर—व्यक्ति जब अतीत की बातों का स्मरण करता है तो वह सुख में व्यतीत किए गए दिनों को याद कर उसमें खो जाता है। उसके मन में उत्पन्न विचार भुलाए नहीं भुलाते हैं।

प्रश्न 13 किसका वतन कहाँ है- वह जो कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ। 

उत्तर- लेखिका के अनुसार राजनीतिक बाध्यता ने लोगों को उनके जन्म स्थानों से तो विस्थापित कर दिया, किंतु उनके दिलों पर कब्जा नहीं कर पाई। इस प्रकार मानवता या देश सीमा रेखा के दोनों तरफ ही विद्यमान रहती है।

प्रश्न 14. ‘नमक’ कहानी में हिंदुस्तान पाकिस्तान में रहने वाले लोगों की भावनाओं, संवेदनाओं को उभारा गया है। वर्तमान संदर्भ में इन संवेदनाओं की स्थिति को तर्क सहित स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर—’नमक’ कहानी के माध्यम से लेखिका ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान में रहने वाले लोग के बीच सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को उभारने का सफल प्रयास किया है। विभाजन के बाद लोगों की राजनीतिक बाध्यता ने उन्हें अलग-अलग रहने को मजबूर कर दिया, लेकिन वे दिल से अलग होने को नहीं पचा सके। 

किंतु वर्तमान समय में पाकिस्तानी क्षुद्र राजनीति ने दोनों के लोगों के बीच घृणा के बीज बो दिए हैं। पाकिस्तान जैसे छोटे देश का रक्षा खर्च लगभग भारत के रक्षा खर्च के बराबर है। वहाँ की राजनीति ही भारत में आतंकवाद फैलाने पर टिकी हुई है।

 वह अपना नुकसान कर भी भारत को हानि पहुंचाना चाहता है। उसे यह ज्ञान नहीं है कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश की एकता अखंड है, वह प्रत्येक विषम परिस्थितियों का मुकाबला करने की क्षमता रखता है। 

सीमा पर आतंकवाद के लिए प्रशिक्षण, सीमा पर अंधाधुंध गोलाबारी, विमान अपहरण, संसद पर आतंकवादी हमला, कारगिल युद्ध आदि सभी पाकिस्तान की संकुचित मानसिकता को दर्शाते हैं।

प्रश्न 15. सफिया की मनःस्थिति को कहानी में एक विशिष्ट संदर्भ में अलग तरह से स्पष्ट किया गया है। अगर आप सफिया की जगह होते होतीं तो क्या आपकी मनःस्थिति श्री वैसी ही होती? स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर- सफिया के माध्यम से लेखिका ने सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और मानवीय गुणों को दर्शाने का सफल प्रयास किया है। 

अतः हम भी यदि सफिया की जगह होते तो हमारी भी मनःस्थिति उसकी भाँति ही होती क्योंकि मानवता धर्म और मजहब में निवास नहीं करती, वह तो व्यक्ति के हृदय में निवास करती है। 

चाहे व्यक्ति किसी भी राष्ट्र में निवास करता हो, किंतु उसकी भावात्मक एकता उसे अन्य लोगों से जोड़े रखती है।

प्रश्न 16. भारत-पाकिस्तान के आपसी संबंधों को सुधारने के लिए दोनों सरकारें प्रयासरत हैं। व्यक्तिगत तौर पर आप इसमें क्या योगदान दे सकते/सकती हैं?

उत्तर— बूँद-बूँद से घड़ा भरता है और एक-एक व्यक्ति से राष्ट्र का निर्माण होता है। इस कथन के आधार पर कहा जा सकता है कि प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्र की उन्नति और विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि हम मजहबी ताकतों से संभल कर रहें और धार्मिक तथा सामाजिक द्वेषपूर्ण ताकतों से सचेत रहने के लिए दूसरों को प्रेरित करें तो हम भी दोनों देशों के बीच मधुर संबंध बनाने में रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। 

प्रश्न 17. लेखिका ने विभाजन से उपजी विस्थापन की समस्या का चित्रण करते हुए सफिया व सिख बीबी के माध्यम से यह भी परोक्ष रूप से संकेत किया है कि इसमें भी विवाह की रीति के कारण स्त्री सबसे अधिक विस्थापित है। क्या आप इससे सहमत हैं? 

उत्तर—यह सही है कि स्त्री को विवाह की रीति सबसे अधिक विस्थापित करती है। वह पुरुष-प्रथान समाज में शादी के बाद अपनी ससुराल में जाकर रहने को बाध्य हो जाती है। उसे अपने ससुराल पक्ष के रीति-रिवाजों, परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं में ही अपनी रुचि रखनी पड़ती है। अतः इस कथन से हम पूर्णतया सहमत है। किंतु यह भी सत्य है कि वह दो परिवारों के मध्य धुरी का काम करती है। वह प्यार, सहिष्णुता, दया, त्याग आदि गुणों द्वारा आदर्श स्थापित भी कर सकती है। 

प्रश्न 18 विभाजन की अनेक स्वरूपों में बँटी जनता को मिलाने की अनेक भूमियाँ हो सकती हैं रक्त संबंध, विज्ञान, साहित्य व कला। इसमें से कौन सबसे ताकतवर है और क्यों?

उत्तर- विभाजन के अनेक स्वरूपों में बँटी जनता को मिलाने की अनेक भूमियों में रक्त संबंध, विज्ञान, साहित्य और कला का अपना-अपना स्थान है, किंतु इनमें से साहित्य और कला का स्थान सबसे ताकतवर के रूप में जाना जा सकता है। साहित्य और कला में वह क्षमता है। जो विभिन्न देशों के मध्य पारस्परिक सौहार्द की भावना को बढ़ाती है। सच्चे साहित्य में पारस्परिक भेद भाव, घृणा, हिंसा आदि को मिटाने की क्षमता होती है। वह व्यक्ति में सद्गुणों का विकास करता है और भटकते हुए लोगों को सन्मार्ग पर लाने का कार्य करता है।


नमक पाठ का गद्यांश संबंधी प्रश्नोत्तर


1. उन सिख बीबी को देखकर सफिया हैरान रह गई थी, किस कदर वह उसकी माँ से मिलती थी। वह भारी भरकम जिस्म, छोटी-छोटी चमकदार आँखें, जिनमें नेकी, मुहब्बत और रहमदिली की रोशनी जगमगाया करती थी। 

चेहरा जैसे कोई खुली हुई किताब वैसा ही सफेद बारीक मलमल का दुपट्टा जैसा उसकी अम्मा मुहर्रम में ओढ़ा करती थी। जब सफिया ने कई बार उनकी तरफ मुहब्बत से देखा तो उन्होंने भी उसके बारे में घर की बहू से पूछा। उन्हें बताया गया कि ये मुसलमान है। कल ही सुबह लाहौर जा रही है अपने भाइयों से मिलने, जिन्हें इन्होंने कई साल से नहीं देखा। 

लाहौर का नाम सुनकर वे उठकर सफिया के पास आ बैठी और उसे बताने लगीं कि उनका लाहीर कितना प्यारा शहर है। वहाँ के लोग कैसे खूबसूरत होते हैं, उम्दा खाने और नफीस कपड़ों के शीकीन, सैर-सपाटे के रसिया, जिंदादिली की तसवीर।

प्रश्न – 

(क) पाठ तथा लेखिका का नाम बताइए ।

(ख) सिख बीबी को देखकर सड़या क्यों हैरान रह गई थी ?

(ग) सफ़िया के बारे में घर की बहू ने किसको क्या बताया ? 

(घ) सिख बीबी ने लाहौर के बारे में किसको क्या बताया ?

उत्तर-

(क) पाठ – नमक , लेखिका- रज़िया सज्जाद ज़हीर। 

(ख) सिख बीबी को देखकर सफिया हैरान रह गई थी क्योंकि वह उसकी माँ की हमशक्ल लगती थी। सफिया की माँ के समान ही भारी-भरकम शरीर, छोटी चमकदार आँखें जिनसे प्रेम, भलमनसाहत और करुणा की रोशनी निकल रही थी। उसकी माँ जैसा ही मुख। वैसा ही बारीक मलमल का दुपट्टा जैसा उसकी माँ मुहर्रम में ओढ़ा करती थी। 

(ग) सफिया के बारे में घर की बहू ने सिख बीबी को बताया कि सफिया मुसलमान है। वह अपने भाइयों से मिलने कल सुबह लाहौर जा रही है। भाइयों को उसने कई साल से नहीं देखा है।

(घ) सिख बीबी ने सफिया को बताया कि लाहौर बहुत प्यारा शहर है। वहाँ के व्यक्ति सुंदर होते हैं। वे उम्दा खाने और नफीस कपड़ों के शौकीन होते हैं। लाहौर निवासी जिंदादिल इंसान हैं और वे सैर-सपाटे का आनंद लेते हैं।


2. अब तक सफिया का गुस्सा उतर चुका था। भावना के स्थान पर बुद्धि धीरे-धीरे उस पर हावी हो रही थी। नमक की पुड़िया ले तो जानी है, पर कैसे ? अच्छा, अगर इसे हाथ में ले लें और कस्टमवालों के सामने सबसे पहले इसी को रख दें ? 

लेकिन अगर कस्टमवालों ने न जाने दिया तो मजबूरी है, छोड़ देंगे। लेकिन फिर उस वायदे का क्या होगा जो हमने अपनी माँ से किया था ? हम अपने को सैयद कहते हैं। फिर वायदा करके झुठलाने के क्या मायने ? जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा। मगर कैसे ? 

अच्छा, अगर इसे कीनुओं की टोकरी में सबसे नीचे रख लिया जाए तो इतने कीनुओं के ढेर में भला कौन इसे देखेगा ? और अगर देख लिया ? नहीं जी, फलों की टोकरियाँ तो आते वक्त भी किसी की नहीं देखी जा रही थीं। उधर से केले, इधर से कीनू सब ही ला रहे थे, ले जा रहे थे। यही ठीक है, फिर देखा जाएगा। 

प्रश्न – (क) पाठ तथा लेखिका का नाम बताइए।

(ख) भावना के स्थान पर बुद्धि के हावी होने से क्या आशय है ? (ग) सफ़िया के मन में क्या द्वंद्व चल रहा था ?

(घ) अंत में सफ़िया ने क्या निर्णय लिया ?

उत्तर— 

(क) पाठ – नमक , लेखिका- रज़िया सज्जाद ज़हीर।

(ख) भावना से अभिभूत सफिया अपने छोटे भाई पुलिस अफसर से तर्क-वितर्क कर ही थी। अब तक वह सिख बीवी की भावनाओं में वह रही थी। भाई से कोई आश्वासन न मिलने पर उसने बुद्धि के द्वारा उपाय सोचना प्रारंभ कर दिया। चह विचार रही थी कि नमक की पुड़िया कैसे लेकर चले ।

(ग) सक्रिया के मन में था कि नमक को हाथ में लेकर चलू और कस्टमवालों के सामने र दूँ। फिर विचार उठा- यदि कस्टमवालों ने न जाने दिया, तो मजबूरी में नमक छोड़ना पड़ेगा। फिर भाव आता है कि हम सैयद हैं, वायदा करके निभाना चाहिए। माँ से जो वायदा कर आई हूँ, उस वायदे का क्या होगा। 

(घ) बंद से निकलते हुए सफिया ने निर्णय लिया कि नमक की पुड़िया कीनुओं की टोकरी की तह में रख ली जाए। फलों को कोई नहीं देखेगा क्योंकि आते वक्त उसने देखा कि लोग भारत से केले से जा रहे थे और पाकिस्तान’ से कीनू ला रहे थे कस्टमवाले फलों की टोकरी नहीं देख रहे थे।


3. जब उसका सामान कस्टम पर जांच के लिए बाहर निकाला जाने लगा तो उसे एक झिरझिरी-सी आई और एकदम से उसने फैसला किया कि मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा, नमक कस्टमवालों को दिखाएगी वह उसने जल्दी से पुड़िया निकाली और हैंडबैग में रख ली, जिसमें उसका पैसों का पर्स और पासपोर्ट आदि थे। 

जब सामान कस्टम से होकर रेल की तरफ चला तो वह एक फस्टम अफसर की तरफ बढ़ी। ज्यादातर मेजें खाली हो चुकी थीं। एक-दो पर इक्का-दुक्का सामान रखा था। वही एक साहब खड़े थे-तंबा कद, दुबला-पतला जिस्म, खिचड़ी बाल आँखों पर ऐनक वे कस्टम अफसर की दर्दी पहने तो थे मगर उनपर यह कुछ जैच नहीं रही थी। सफिया कुछ हिचकिचाकर बोली, “मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूँ ।” 

प्रश्न- 

(क) पाठ तथा लेखिका का नाम बताइए।

(ख) सफिया को झिरझिरी क्यों आई ? 

(ग) सफिया ने क्या निर्णय किया ?

(घ) पाकिस्तान के कस्टम अधिकारी के स्वरूप का वर्णन करें।

उत्तर- 

(क) पाठ नमक लेखिका रजिया सज्जाद जहीर 

(ख) सफिया का सामान जब कस्टम पर जाँच के लिए बाहर निकाला जाने लगा तो इस भय से वह काँप उठी कि अब उसकी चोरी पकड़ी जा सकती है।

(ग) सफिया ने निर्णय लिया कि वह मुहब्बत का तोहफा चोरी से नहीं ले जाएगी। वह नमक कस्टमवालों को दिखाएगी। अतः उसने पुड़िया निकालकर हैंडबैग में रख ली। 

(घ) पाकिस्तान के जिस कस्टम अधिकारी से सफिया ने बात की वह लंबे कद का दुबले-पतले शरीर का आदमी था। उसके बाल आधे पके हुए थे। आँखों पर ऐनक थी। कस्टम आफिसर की वर्दी पहनकर भी वह जँच नहीं रहा था।


नमक पाठ का प्रश्नोत्तर


प्रश्न 1. राजनैतिक सीमा तथा सत्ता लोलुप व मजहबी दुराग्रहों में घंटे होने के बावजूद हिंदुस्तान और पाकिस्तान में एक ही इंसानी दिल के टुकड़े धड़क रहे हैं, जो मिलने को आतुर हैं। पाठ के आधार पर समझाइए। 

उत्तर-भारत और पाकिस्तान लगभग पिछले साठ वर्ष से सचालोलुप राजनेताओं और मजहबी कट्टरपंथी धार्मिक कट्टरता के दुराग्रह के कारण संघर्ष ही करते रहे हैं। यह कहानी बताती है कि यह विभाजन या यह दुश्मनी सामान्य जनता के हृदय में नहीं है। 

यह कटु सत्य है कि. सामान्य जनता धर्म या क्षेत्र के आधर पर विभाजन या संघर्ष को हृदय के स्तर पर स्वीकार नहीं करती। तभी तो भारत की सिख बीबी लाहौर का नमक ही सौगात में चाहती है। 

पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी दिल्ली को अपना यतन बताता है और जामा मसजिद को सीढ़ियों को सलाम कहता है और भारतीय खातून को संदेश भेजता है-‘लाहौर अभी तक उनका वेतन है और देहली मेरा, तो बाकी सब रफ्ता रफ्ता ठीक हो जाएगा। 

भारतीय कस्टम अधिकारी सुनीलदास गुप्त ढाका को दतन मानते हुए वहाँ के नारियल को कोलकाता के नारियल से बेहतर मानता है। यह ढाका को आज भी अपनी जमीन मानता है वह कहता है, “हमारी जमीन हमारे पानी का मजा ही कुछ और है।”

 इन बातों से स्पष्ट है कि दोनों देशों की जनता के दिल में कोई भेद नहीं है। दोनों देशों को आपस में प्रेम और मित्र भाव रखना चाहिए। 

प्रश्न 2. लाहौर का नाम सुनते ही सिख बीवी सफिया के पास क्यों आकर बैठ गई? उसने लाहौर के विषय में क्या कहा?

उत्तर—सिख बीबी का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। विभाजन के बाद भी वह लाहौर को ही अपना वतन मानती थी। अतः अपनी जन्म स्थली के विषय में सुनकर सिख बीबी सफिया के पास आकर बैठ गई।

प्रश्न 3. सिख बीबी ने सफिया से लाहौर से क्या सौगात लाने को कहा ? इससे उनकी किस विशेषता का पता चलता है ?

उत्तर—सिख बीबी ने सफिया से सौगात स्वरूप लाहौरी नमक लाने को कहा। इससे पता चलता है कि वह भारत-पाक के विभाजन को पचा नहीं पा रही थी। यह भावनात्मक रूप से पाकिस्तान से भी जुड़ी थी। उसे केवल राजनीतिक वाय्यता ने अलग कर रखा था। वह अपनी जन्म स्थली लाहौर से बहुत प्यार करती थी। वह उसे अपना वतन ही मानती थी।

प्रश्न 4. सफिया ने सिख बीवी में अपनी माँ जैसी क्या समानता देखी?

उत्तर—सफिया ने जब सिख बीबी को देखा तो वह हैरान हो गई, क्योंकि वह उसकी माँ से बहुत मिलती-जुलती थी। उसकी माँ के समान ही सिख बीबी का शरीर भारी-भरकम था। आँखें छोटी-छोटी थीं जिनसे नेकी, मुहब्बत और रहमदिली की रोशनी फूट रही थी। सफिया की माँ की आँखें ऐसी ही थीं। चेहरे पर भोलापन माँ जैसा ही था। उसकी माँ भी मुहर्रम के दिनों में ऐसा ही सफेद बारीक मलमल का दुपट्टा ओढ़ती थी जैसा सिख बीबी ने ओढ़ रखा था।

प्रश्न 5. सिख बीबी ने लाहौर के बारे में सफिया को क्या बताया?

उत्तर- सिख बीबी ने सफिया को बताया कि लाहौर बहुत प्यारा शहर है। वहाँ के लोग बहुत सुंदर होते हैं। अच्छा खाना और सुरुचिचूर्ण कपड़े पहनना उनका शौक है। घूम-फिर खूब मौज मस्ती करते हैं और बड़े जिंदादिल होते हैं। 

प्रश्न 6. “अगर सभी का दिमाग हम अदीवों की तरह घूमा हुआ होता तो यह दुनिया कुछ बेहतर ही जगह होती भैया।” सफिया ने ऐसा क्यों कहा ? स्पष्ट करें।

उत्तर— सफिया के पुलिस अफसर भाई ने सफिया से कहा था- “आप अदीब ठहरी और सभी अदीवों का दिमाग थोड़ा-सा तो जरूर ही घूमा हुआ होता है।” इसके उत्तर में ही सफिया ने उपर्युक्त वाक्य कहा था जिसके द्वारा वह यह कहना चाहती है कि सात्यिकार प्रेम, करुणा, उदारता, सहिष्णुता, मानवता व भाईचारे का संदेश देता है। अतः यदि सभी व्यक्ति अदीबों की तरह के होते तो दुनिया में घृणा, द्वेष, क्रोध, संघर्ष आदि न रहते और दुनिया मौजूदा स्थिति से अच्छी होती।

प्रश्न 7. सिख बीवी ने लाहौर का नमक ही क्यों मँगाया?

उत्तर—हम जहाँ पैदा होते हैं, वहाँ की उत्पन्न की हुई वस्तुएः हमारे प्रयोग में आती हैं। हमारा शरीर उनसे ही पुष्ट होता है, किंतु जब वफादारी की याद दिलाई जाती तो कहते हैं कि हमने वहाँ का न एक स्वाया है अथवा तूने उनका नमक खाया है अर्थात् नमक वफादारी का सूचक सिख बीबी ने भी लाहौर का नमक खाया है। अतः आज भी उसे लाहौर ही वतन लगता है। साहौर के प्रति ये वफादारी आगे भी दृढ होती रहे, इसके कारण वह लाहौरी नमक मँगाती है। 

प्रश्न 8 सफिया ने स्वप्न में लाहौर के कौन-से दृश्य देखे?

उत्तर- लेफिया ने सवप्न में इकबाल का मकबरा, लाहौर का किला, किले के पीछे डूबते हुए सूरज को नारंगी किरणें, आस-पास में फैलता उभरता अँधेरा तथा उस रंगीन अँधेरे में बहती हुई नरम हवा को देखा। सफिया ने उस हवा में रची हुई मौलसिरी की खुशबू और मकबरे की सीढ़ियों पर सिर झुकाए चुपचाप, उदास और बेजान से दो इंसान भी देखे। 

प्रश्न 9.सफिया के दोस्त ने कीनुओं को देते समय यह क्यों कहा था कि “यह हिंदुस्तान पाकिस्तान की एकता का मेवा है।” स्पष्ट करें। 

उत्तर—संतरा भारतीय फल है और माल्टा पाकिस्तानी कीनू संतरे व माल्टे को मिलाकर पैदा किया हुआ फल है। कीनू माल्टे की तरह रंगीन और मीठा है और संतरे की तरह नाजुक है। अतः इसे हिंदुस्तान पाकिस्तान की एकता का मेवा कहा जाता है जो पूर्णतः उचित है।


लेखक के द्वारा


नमस्कार Students, मैंने इस पोस्ट को (Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 ) CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परीक्षा के लिए काफी सहायता प्रदान करेगा । तो मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें


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