NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा Summary

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा Summary

कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameउषा
कवि | Poetशमशेर बहादुर सिंह | Shamsher Bahadur Singh
अध्याय संख्या | Chapter number06
अध्याय प्रकार | Chapter typeकविता | POEM
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


शमशेर बहादुर सिंह जीवन परिचय class 12 | Shamsher Bahadur Singh Biography


वैचारिक दृष्टि से मार्क्सवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह का जन्म 13 जनवरी सन् 1911 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश किन्तु अब उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। उनकी शिक्षा स्थानीय पाठशाला में हुई। 

उन्होंने हाईस्कूल तथा इंटर की परीक्षा गोंडा में उत्तीर्ण की तत्पश्चात् वे विद्याध्ययन के लिए इलाहाबाद चले गए। वहाँ से उन्होंने बी. ए. तथा एम. ए. (पूर्वार्द्ध) की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्हें ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ तथा ‘कबीर सम्मान’ सहित अनेक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 1993 में वे चिरनिद्रा में लीन हो गए। 

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा Summary
शमशेर बहादुर सिंह जीवन परिचय class 12 

आरंभि रचनाएँ— शमशेर बहादुर सिंह भी ‘दूसरे सप्तक’ के कवि हैं। इसके अतिरिक्त उनके काव्य-संग्रह हैं—कुछ कविताएँ (1959). कुछ और कविताएँ (1961), चुका भी हूँ नहीं में (1975), इतने पास अपने बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी आदि। इसके अतिरिक्त उन्होंने उर्दू-हिन्दी कोश का संपादन भी किया। 

प्रमुख साहित्यिक विशेषताएँ– यद्यपि वैचारिक दृष्टि से शमशेर बहादुर सिंह मार्क्सवादी कवि है परन्तु उनका कवि हृदय सौन्दर्यवादी है। उनमें प्रयोग की प्रवृत्ति अधिक है। उनकी कविता में सूक्ष्म और संश्लिष्ट अनुभवों की अभिव्यक्ति अधिक हुई है। उनका झुकाव अमूर्तन की ओर अधिक है। यही कारण है कि कहीं-कहीं उनकी कविता दुरूह हो जाती है। लेकिन परिष्कृत बिंब, उत्कृष्ट शिल्प और आत्मीयता का भाव उनकी कविताओं को असामान्य बनाता है।

भाषा शैली — शमशेर बहादुर सिंह ने अपनी कविता के माध्यम से कथा और शिल्प दोनों को समान महत्व दिया है। उनकी रचनाओं पर उर्दू शायरी का प्रभाव है। इसी कारण उनमें संज्ञा तथा विशेषण की अपेक्षा सर्वनामों, क्रियाओं, अवयवों तथा मुहावरों पर अधिक बल दिया गया है। इनकी भाषा-शैली से कविता बहुत रोचक बन गयी है।


उषा का सारांश | summary of usha


प्रस्तुत कविता में सूर्योदय के ठीक पहले उपा के आगमन के कारण क्षण-क्षण में बदलते हुए प्रकृति के स्वरूप का वर्णन है। कवि प्रयोगवादी है जिनके उपमान, बिंब, प्रतीक सब अपने हैं, नए हैं। 

ये धूसर और भदेस को भी अपने काम की चीज बना लेते हैं। पुराने उपमान, बिंव व प्रतीक इनको अपने लिए उपयुक्त नहीं लगते। इस कविता में प्रातःकाल के नीले नभ को कवि ने देखा जिसकी तुलना परंपरागत ढंग से

सागर से की जाती रही है किंतु कवि इस आकाश को राख से लीपा हुआ चौका कहता है। उसे इस बात की परवाह भी नहीं है कि चौका राख से नहीं अपितु गोवर से लीपा जाता है। वह यह भी भूल गया है कि चीका आकार में छोटा होता है। 

उपमान उपमेय से बड़ा व श्रेष्ठ होना चाहिए। दूसरा रूप प्रस्तुत करते हुए कवि कहता है कि प्रातःकाल का नभ उस सिल के समान है जिस पर लाल कैसर पीसी गई हो और वह सिल अब धुल गई है। 

इसमें आकाश की लालिमा की तुलना है। आकाश के इसी रंग को कवि स्लेट पर लाल खड़िया चाक के रूप में देखता है। आकाश के नीले रूप को व्यक्त करते हुए कवि कहता है कि उषा नीले आलू में किसी की गीर

झिलमिल देह हिलती सी लगती है। अंत में इस निष्कर्ष पर आता है कि सूर्योदय होते ही उपा का जादू समाप्त हो रहा है।


उषा काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे

भोर का नभ

राख से लीपा हुआ चौका

(अभी गीला पड़ा है )

बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से

कि जैसे घुल गई हो।

स्लेट पर या लाल खड़िया चाक

मल दी हो किसी ने

नील जल में या किसी की

गौर झिलमिल देह

जैसे हिल रही हो । और

जादू टूटता है इस उपा का अब

सूर्योदय हो रहा है ।

शब्दार्थ

उषा — सूर्योदय से पूर्व पूरब दिशा की लालिमा नीला शंख – अत्यधिक नीला । भोर — प्रातः काल । सिल- रसोई का पत्थर का एक टुकड़ा जिस पर मसाले या चटनी पीसी जाती है। देह—शरीर । 

प्रसंग

यह कविता ‘उपा’ हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता शमशेर बहादुर सिंह हैं। इस कविता में सूर्योदय से पहले प्रभावशाली आकाश का वर्णन किया गया है। 

व्याख्या 

प्रातः काल के आकाश में नीलिमा की बहुत गहनता थी। उस कारण प्रातः काल का आकाश ऐसा लग रहा था। जैसे किसी ने अपने चीके को राख से लीप दिया हो और ताजा तिपने के कारण अभी गीला बना हो। आकाश में भी तो आर्द्रता (गोला) है। 

कवि दूसरी कल्पना करते हुए कहता है कि ऐसा लगता है कि किसी महिला ने अपनी बहुत काली सिल मानो लाल कैंसर से धोई हो। आकाश की नीलिमा काली सिल तथा उपा के कारण आई लालिगा की समता कैंसर की लालिमा से की गई है। 

कवि का मन अभी भरा नहीं है। उसे लगता है कि मानो किसी बालक ने अपनी स्लेट पर लाल खड़िया चाक घिस दिया हो। 

आकाश की नीलिमा में उपा की तालिमा को देखकर पता है कि कोई श्वेतवर्णा झिलमिलाती देहयष्टि नीले जल में हिल रही हों। किंतु अब सूर्योदय हो रहा है और उषा का यह जादू (प्रभाव) घट रहा है।

सौंदर्य बोध 

उषा का स्वाभाविक वर्णन है। समस्त कविता बिंबात्मक है। नूतन उपमानों का प्रयोग हैं। उपमानों में ‘राख से लीपा चौका’ या ‘काली सिल’ पर प्रयोगवादी सोच है। भाषा सरल व बोलचाल की है तथा उषा के लिए ‘गौर झिलमिल देह’ सुंदर प्रयोग है। 

पूरे छंद में संदेह अलंकार है। ‘प्रात नमः वर्णन है। हुआ चौका’ में गम्योत्प्रेक्षा अलंकार है। यहाँ पर प्रकृति का अलंकार


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प्रश्न 1. कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है ?

उत्तर—कविता में नीले नम को राख से लिपे चीका के समान बताया है। दूसरे वि काली सिल से तुलना की गई है। तीसरे में स्लेट पर लाल खड़िया चाक को उपमान बताया है। लीपा आँगन, काली सिल या स्लेट गाँव के परिवेश में ही परिचित शब्द है। महानगर के ने कभी लीपा हुआ चौका देखा भी नहीं होगा। 

मिक्सी वाले सिल से अपरिचित ही रहते हैं। स्कूल में पढ़ने वालों ने तो स्लेट का परिचय पाया नहीं है। अतः शब्दचित्र गाँव के सुबह के है। जहाँ तक गतिशीलता का प्रश्न है, वह भी सही है। पहले चौका लीपा जाता है, तभी का प्रयोग होगा और उसके बाद ही बालक के हाथ में स्लेट दी जाएगी। 

प्रश्न 2. 

भोर का नभ 

राख से लीपा हुआ चौका 

(अभी गोला पड़ा है) 

नयी कविता में कोष्ठक, 

विराम चिन्हों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता क अर्थ देता है । 

उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है ? समझाइए ।

उत्तर— नयी कविता की अपनी तकनीक है जिसमें कवि कोष्ठक, विराम चिन्हों और पंक्तिय के बीच के स्थान के माध्यम से भी अपनी बात कहता है। यहाँ कोष्ठक में ‘अभी गीला पड़ा है। के द्वारा कवि ने यह बताया है कि चीके की लिपाई अभी-अभी उषा-वेला में ही हुई है। चौड़े का यह गोलापन प्रातःकाल की आर्द्रता (गोलापन) का सूचक है।  

3.अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दधि खींचिए ।

उत्तर – प्रातः कालीन सूर्य उदित हो रहा है जो ऐसा लगता है मानो नीले सरोवर में स्नान करके बाहर आ रहा हो। यह सूर्य लाल रंग का पक्षी लगता है जिसने तारों को चुन-चुनकर अपना भोजन बना लिया है। 

ओसकण से यह अपनी प्यास शांत कर रहा है। अभी यह जमीन पर न उतरकर ऊपर पर्वत शिखरों या वृक्षों अथवा अट्टालिकाओं पर ही बैठा है। सूर्यास्त का सूर्य ऐसा प्रतीत होता है, मानो थका हुआ पक्षी विश्राम चाहता है। 

थकान के कारण उसका श्वेत रूप भी अब लाल हो गया है। अब विश्राम के लिए सूर्य अपने घर आकाश में लौट रहा है। कैसे धीमे-धीमे वह घर में प्रवेश कर रहा है। उसकी यह चाल उसकी थकान को मिटा रही है। (छात्र सागर में उदित व अस्त होते सूर्य को देखें )

आपसदारी – सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता ‘बीती विभावरी जाग री’ और अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ की पंक्तियाँ आगे बॉक्स में दी जा रही है। ‘उषा’ कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए नीचे दिए गए बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विशलेषण कीजिए और भी यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज्यादा अच्छी लगी और क्यों ?

  • • उपमान
  • शब्द चयन
  • परिवेश
  • ‘बीती विभावरी जाग री !
  • अंबर पनघट में डुबो रही- तारा-घट ऊषा नागरी ।
  • राग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,
  • किसलय का अंचल डोल रहा, तो यह लतिका भी भर लाई- मधु मुकुल नवस रस गागरी ।
  • अधरों में राग अमंद पिए,
  • अलकों में मलयज बंद किए-
  • तू अब तक सोई है आली आँखों में भरे विहाग री ।
  • भोर का बावरा अहेरी
  • -जयशंकर प्रसाद
  • पहले बिछाता है आलोक की लाल-लाल कनियाँ
  • पर जब खींचता है जाल को छोटी-छोटी चिड़ियाँ, मँझोले परेवे, बड़े-बड़े पंखी
  • बांध लेता है सभी को साथ;
  • डैनों वाले डील वाले डॉल के बेडौल
  • उड़ने जहाज
  • कलस-तिसूल वाले मंदिर – शिखर से ले
  • तारघर की नाटी मोटी चिपटी गोल घुस्सों वाली उपयोगी संदुरी
  • बेपनाह काया को
  • गोधूली की धूल को, मोटरों के धुएं को भी पार्क के किनारे पुष्पिताग्र कर्णिकार की आलोक खची तन्वि रूप-रेखा को
  • और दूर कचरा जलानेवाली कल की उद्दंड चिमनियों को, जर
  • धुआँ यों उगलती हैं मानो उसी मात्र से अहेरी हो हरा देंगी ।। -सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

उत्तर- 

तीन कवि जयशंकर प्रसाद, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और शमशेर बहादुर सिंह की तीन कविता प्रभावकालीन बेला का वर्णन कर रही हैं। इन तीनों कविताओं की उपमान, शब्दचयन व परिवेश की दृष्टि से तुलना करने पर निष्कर्ष यह आता है-

जयशंकर प्रसाद :

1. उपमान- प्रसाद जी ने आकाश को पनघट व उषा को पनिहारिन तथा नक्षत्रों को घाट कहा है। उन्होंने पक्षियों की स्वर, कोंपलों के आँचल के साथ लतिका रूपी पनिहारिन के द्वारा मधु गागरी का वर्णन किया है। नायिका के अघरों में अमंद राग, पलकों में बंद मलयज तथा मलयज तथा आँखों में विहाग राग देखा है।

2. शब्द चयन-संस्कृत को कोमलकांत तत्सम शब्दावली है। उपा नागरी पर तारा घाट है।

तो ततिका अपनी कोमलता के कारण गागर नहीं गागरी लाई है। कोंपल के आँचल की कोमलता अनूठी है। विभावरी, पनघट, नागरी, कुल-कुल, किसलय का अंचल, लतिका, नवल रस गागरी, अघरों में राग, अलकों में मलयज, आँखों में विहाग जैसे शब्द चयन ने कविता को अमर बना दिया है। 

3. परिवेश – प्रातःकाल देवियाँ सूर्योदय से पहले ही कुआँ, नदी या सरोवर से जल लाती हैं। पक्षी कलरव करते हैं। हवा चलने लगती है। पुष्पों की गंध उड़ने लगती है। देर रात तक गानों का आनंद लेने वाले सोए रहते हैं। अतः पूरी कविता परिवेश से जुड़ी है।

अज्ञेय

1. उपमान — कवि ने सूर्य को शिकारी और आलोक को जाल बताया है और उसमें सारे संसार को फँसा बताया है। अर्थात् सूर्य का प्रकाश सव पर पड़ता है। उपमानों का बाहुल्य नहीं है।

2. शब्द चयन कवि ने संस्कृत की तत्सम शब्दावली के साथ बोलचाल के शब्द भी लिए है- ‘पुष्पिताग्र कर्णिकार की आलोच खची तन्वि रूप-रेखा कलस-तिसूल, मंझोले परेवे, डील वाले डॉल के बेडौल, तारधरनटीमोटी बेपनाह, पार्क आदि। भाव की दृष्टि से शब्द चयन उपयुक्त है। 3. परिवेश-प्रातः काल के परिवेश का केवल इतना वर्णन है कि प्रकाश की किरण सब और पड़ रही हैं।

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

शमशेर बहादुर सिंह

1. उपमान आकाश के लिए नीला शंख, राख से लीपा चौका, काली सिल, लात खड़ियाचाक से रंगी स्लेट नील जल उपमान दिए हैं। जिनमें नीला शंख व नीला परंपरागत है शेष नए हैं जो असंगत लगते हैं। 

2. शब्द-घयन—–नीला शंख अच्छा प्रयोग है। गीर झिलमिल देह, जादू टूटना, लाल खड़ियाचाक, का गलना, राज्य से लीपा हुआ प्रभावी शब्द चयन है।

3. परिवेश——कविता प्रभातकालीन परिवेश से जुड़ी है। प्रभातकाल में चौका का लीपना, सिल का प्रयोग या चालकों का स्लेट लेना स्वाभाविक परिवेश बनते हैं। सूर्योदय के आगमन पर उपा का जादू भी समाप्त होता ही है। 

निष्कर्ष—इन कविताओं में जयशंकर प्रसाद की कविता अतुलनीय है। वह उपमान, शब्द चयन व परिवेश सभी दृष्टि से श्रेष्ठ है। श्रेष्ठता के कारण पहले दे चुके हैं।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1. ग्रामीण परिवेश के उपाकाल का संक्षेप में वर्णन कीजिए । 

उत्तर— अभी सूर्योदय के आगमन में देरी है। पूर्व दिशा के आकाश में लालिमा दिखाई दे रही है जिसने पहले आकर बता दिया है कि भुवनभारकर अपने रथ पर बैठकर आ रहे हैं। कृषक शीघ्रता से उठकर अपने पशुओं को चारा डालता है। गोवर-पानी की व्यवस्था करता है। नारियाँ गाय-भैंस का दूध निकाल रही हैं। 

अब दूध का मक्खन निकालने की तैयारी है। चौका लीपकर तैयार कर दिया। घर-आँगन साफ किए जा रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य कार्य में लगे हैं। बच्चे स्कूल की तैयारी कर रहे हैं। सूर्य के आगमन से पूर्व किसान बैलों को लेकर खेत पर चला गया है और देवियाँ बालकों का लंच बॉक्स तथा किसान का कलेवा तैयार कर रही हैं। ?

प्रश्न 2. कविता क्या संदेश देती है 

उत्तर- इस कविता के माध्यम से कवि ग्रामीण समाज की प्रभातकालीन गतिशीलता को बताना पाहता है। उपाकाल में ही नारियाँ घर-आँगन साफ करती हैं और चौके को प्रतिदिन लीपती हैं, भले ही लिपाई गोबर व मिट्टी से होती है। रसोई में सिल का प्रयोग होने लगता है। बच्चे अपनी स्लेट व चाक लेकर पढ़ने-लिखने में लग जाते हैं अर्थात् समस्त ग्रामीण समाज व्यक्त हो जाता है किंतु कवि की दृष्टि से खेत की ओर जाता कृषक मजदूर ओझल ही रहा है।

प्रश्न 3. क्या उपा कविता प्रकृति-चित्रण के अंतर्गत आती है ? 

उत्तर—कविगण प्रकृति का विभिन्न रूपों में वर्णन करते आए हैं। प्रकृति का शुद्ध रूप आलंबन में प्रकृति-चित्रण कहलाता है। ऐसा वर्णन छायावादी कवियों ने खूब किया है। प्रकृति का उद्दीपन रूप में वर्णन हिंदी साहित्य में बहुत हुआ है। प्रकृति का अलंकृत रूप इस कविता में वर्णित हुआ है। प्रकृति में उषा बहुत ही मनोरम एवं रमणीय होती है। इस उषाकाल में उषा नील जल में अपनी गौरी झिलमिल देह को हिला रही है। उसने आकाश के स्वरूप में अनेक परिवर्तन किए हैं। अतः कविता प्रकृति-चित्रण की धरोहर है।

Q. महत्त्वपूर्ण काव्यांशों का काव्य सौंदर्य

निम्नलिखित काव्यांशों का भाव-सौंदर्य व शिल्प सौंदर्य लिखिए:

नील जल में या किसी की

गौर झिलमिल देह

जैसे हिल रही हो। और

जादू टूटता है इस उषा का अब सूर्योदय हो रहा है ।

उत्तर— भाव- सौंदर्य 

प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह भाग-2 में संकलित ‘शमशेर वहादुर सिंह’ द्वारा रचित ‘उषा’ नामक कविता से उद्धृत है। कवि ने विभिन्न उपमानों के माध्यम से उषा काल का वर्णन किया है। इसी क्रम में उषा काल ऐसा प्रतीक होता है, मानो नीले जल में किसी का गौर वर्ण झिलमिलाता हुआ शरीर हिल रहा हो। उषा काल में सुमस्त प्रकृति झिलमिलाती हुई-सी प्रतीत होती है। उसका एक विशेष आकर्षण सौन्दर्य से परिपूर्ण कर देता है। यह आकर्षण सूर्य के उदय होने पर टूटता है।

शिल्प सौदर्य – 

(क) शुद्ध, सहज एवं सरल खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है। 

(ख) ‘गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो’ में उपमा अलंकार का प्रयोग हुआ है।

(ग) तत्सम शब्दावली का प्रयोग हुआ है।


लघु उत्तराय प्रश्न


प्रश्न 1. कवि ने भोर के नभ की तुलना राख से लीपे गीले चौके से क्यों की है ? 

उत्तर- राख से लीपे गीले चीके में पानी की मात्रा (नमी) होती है। उसमें नीलिमा और श्वेतवर्ण का मिश्रण होता है। भोर के नभ में भी नमी (ओस कणों) की मात्रा होती है। उसमें भी हेलवणी नीलिमा होती है। इसी कारण कवि ने भोर के नभ की तुलना राख से लीपे गीले चौके से की है।

प्रश्न 2. ‘सिल’ से क्या अभिप्राय है ? कवि ने भोर के नभ को काली सिल को लाल केसर से घुले हुए के समान क्यों माना है ? 

उत्तर- ‘सिल’ से अभिप्राय शिला या चट्टान से है। यह प्रायः श्यामवर्णी होती है। इस पर लाल रंग वाली केसर रगड़ देने से लाल और काले रंग का मिश्रण हो जाता है। उसी प्रकार उपा काल में आकाश अंधकारयुक्त होता है। उसमें सूर्योदय से पहले की लालिमा के मिश्रण का रंग भी लाल केसर से घुली हुई शिला के समान दिखाई देता है।


Conclusion


नमस्कार Students,  मैंने इस पोस्ट को CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परीक्षा के लिए काफी सहायता प्रदान करेगा । तो मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें । 


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