NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग Easy Summary

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग Summary

कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameबादल राग
कवि | Poetसूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | Suryakant Tripathi ‘Nirala’
अध्याय संख्या | Chapter number07
अध्याय प्रकार | Chapter typeकविता | POEM
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन परिचय Class 12 | Suryakant Tripathi ‘Nirala’ Biography


उत्तर—सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म सन् 1899 में बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक गाँव में हुआ। इसके पिता का नाम श्री रामसहाय त्रिपाठी था। वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के निवासी थे। 

 Class 12 Hindi Aroh Chapter 7
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन परिचय Class 12

बाद में नौकरी के लिए महिषादल चले गए। निराला की प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई। चौदह वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह मनोहरा देवी से हुआ, किन्तु उनका पारिवारिक जीवन सुखमय नहीं रहा। 

1918 में ही इनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। बाद में एक-एक कर उनके परिवार के सभी सदस्यों की मृत्यु ने उन्हें बहुत व्यथित कर दिया । उनकी एकमात्र पुत्री सरोज के निधन ने तो उन्हें हिलाकर रख दिया। उन्होंने संस्कृत, बंगला तथा अंग्रेजी का अध्ययन किया। उनको साहित्य के अतिरिक्त दर्शन व संगीत के प्रति रुचि थी। 

उनकी विचारधारा पर स्वामी रामकृष्ण परमहंस तथा स्वामी विवेकानंद का गहरा प्रभाव पड़ा। उनका व्यक्तित्व निराला था। इसी कारण उनका साहित्य जगत में ‘निराला’ नाम पड़ा।

बंगाल में जन्म लेने और वहीं रहने के कारण उनकी मातृभाषा बंगला जैसी ही थी। किन्तु उन्होंने हिन्दी पत्रिकाओं ‘सरस्वती’ तथा ‘मर्यादा’ की पुरानी प्रतियों के माध्य से हिन्दी में दक्षता प्राप्त की। अनेक पारिवारिक विपत्तियों को झेलते हुए वे कवि-कर्म में जुटे रहे। उन्होंने ‘समन्वय’, ‘मतवाला’ तथा ‘सुध’ नामक पत्रिकाओं का संपादन किया। वे स्वभाव से अत्यधिक स्वाभिमानी तथा क्रांतिकारी थे। 1961 ई. में उनका देहांत हो गया।

रचनाएँ– ‘निराला’ की प्रसिद्ध रचनाएँ निम्न हैं- 

(क) काव्य-परिमल, अनामिका, गीतिका, अपरा, नये पत्ते, राम की शक्ति पूजा, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अर्चना आदि ।

(ख) उपन्यास अलका, निरूपमा, चोटी की पकड़ आदि । (ग) कहानी संग्रह — लिली, सखी, चतुरी चमार आदि । (घ) निबंध संग्रह – प्रबंध की प्रतिमा ।

साहित्यिक विशेषताएँ– निराला ने हिंदी साहित्य में काव्य लेखन के साथ-साथ गद्य लेखन पर भी समान अधिकार रखा। उनकी प्रतिभा के दर्शन उनकी सभी प्रकार की रचनाओं जैसे काव्य, उपन्यास, कहानी, निबंध, आलोचना आदि में होते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के अन्तर्गत प्रकृति का सुंदर एवं सजीव चित्रण किया, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के दर्शन कराए,

स्वतंत्रता और राष्ट्रप्रेम के प्रति लोगों में चेतना भरने का प्रयास किया। भाषा-शैली- निराला ने शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली की हो अपनी काव्य-भाषा बनाया। उनकी भाषा पर संस्कृत, बंगला, व फारसी, का यथेष्ट प्रभाव है। उनका शब्द चयन और भावों की अभिव्यक्ति अनुपम है । 

उन्होंने हिन्दी साहित्य रचना में मुक्त छंदों का प्रयोग किया। भाव तथा कला पक्ष की नवीनता की तुलना अन्य किसी से करना संभव नहीं हो पाता। उनके मुक्त छंदों में गीतात्मकता, चित्रात्मकता, सौन्दर्यानुभूति, भाव-प्रवणता, प्राकृतिक सौन्दर्य, प्रगतिशील विचार, प्रेमाभिव्यंजना, भाव प्रवाह, आदि विद्यमान हैं।


बादल राग कविता का सारांश


कविता के अनामिका नामक संग्रह में ‘बादल राग’ कविता छह खंडों में संकलित है। प्रस्तुत अंश बादल राग का छटा खंड है। इस कविता में कवि का आहान क्रांति के रूप में रह रहा है। 

एक ओर बादल के आगमन से कृपक-मजदूर जैसे छोटे लोगों का हित होता है, तो दूसरी ओर से क्रांति से भी छोटे ही लाभ में रहते हैं। क्रांति के विप्लव में अस्थिर सुख नष्ट होते हैं, छोटे तो शोभा ही पाते हैं। अतः किसान-मजदूर की आकांक्षाएँ बादल को नव-निर्माण के राग के रूप में पुकारा रही हैं।

अरे विप्लव के बादल, संसार की तपन से तप्त पृथ्वी पर तेरी गर्जना आशा का संचार करती है। जब तेरी भयंकर गर्जना होती है, जब तू मूसलाधार जल वर्षा करता है, जब तू भयंकर आवाज करता है, तो संसार भयभीत हो जाता है। हे बादल ! जब तू वज्रपात करता है तो पर्वतों के शरीर हो इत-विक्षत हो उठते हैं। 



तेरी आकाश से भी मुकाबला करने की प्रवृत्ति से बड़े-बड़े वीर भी धा जाते हैं। दूसरी और तू अपने जल से छोटे-छोटे पौधों को भी आनंदित करता है। वनस्पति हिल-हिला कर अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करती हुई ऐसी लागती है कि मानो वे हाथ हिलाकर तुझे दुला रहे हैं। कवि बादल को संबोधित करते हुए कहता है, तू विप्लव राग मा रहा है और विश्व से लघुमानव का ही हित होता है। 

अट्टालिकाओं पर तो आतंक का भय समाया रहता है। जल-विप्लन प्लावन सदा पंक पर ही होता है। खिलते हुए कमलों से तो सदैव जल-वर्षण होता ही रहता है। बादल के व्रज गर्जन से अर्थात् क्रांतिकारी के विप्लव घोष से कोष बंद हो जाते हैं, प्रसन्नता दुःख में बदल जाती है। घनी जनों के हृदय आतंक से काँप जाते हैं। 

भयभीत होकर वे अपने मुख और नेत्र ढाँपे हुए हैं। उनकी भुजाएँ कमजोर हैं, शरीर क्षीण है। ऐसे में अरे विप्लवी वीर तुझे कृषक मजदूर अधीरता से बुला रहा है क्योंकि अब उसमें केवल अस्थि मात्र शेष है। उसके शरीर को अट्टालिकाओं में बैठे पनियों ने चूस लिया है। इस हाड़ मात्र निर्धन के जीवन पारावार तू ही है। वस्तुतः बादलराग के माध्यम से कवि ने किसानों और मजदूरों की दीन-हीन दशा का वर्णन किया है।

काव्यांश


1.बादल राग कविता की सप्रसंग व्याख्या 


तिरती है समीर सागर पर

अस्थिर सुख एवं दुख की छाया- 

जग के दग्धा हृदय पर

निर्दय विप्लव की प्लावित माया- 

यह तेरी रण-तरी 

भरी आकांक्षाओं से,

घन, भेरी-गर्जन से सजग सुप्त अंकुर 

उर में पृथवी के, आशाओं से 

नवजीवन की, ऊंचा कर सिर,

ताक रहे हैं, ऐ विप्लव, के बादल ! 

फिर-फिर

बार-बार गर्जन

वर्षण है मूसलाधार,

हृदय थाम लेता संसार, 

सुन-सुन घोर वज्र-हुंकार ।

शब्दार्थ 

तिरती है— तैर रही है। समीर—पवन । अस्थिर — क्षणिक । दग्ध— तप्त, तपा हुआ। विप्लव—क्रांति, बाढ़। प्लावित – डूबा हुआ। रण- तरी — युद्ध की नौका। आकांक्षाओं -अभिलाषाओं, इच्छाओं। भेरी-गर्जन — युद्ध के समय होने वाली आवाज। सजग — सचेत । सुप्त—सोया हुआ । उर—हृदय, भीतर। नवजीवन – नई, फसल, नया समाज । वर्षण – वरसना । 

प्रसंग 

यह पद्यांश ‘अनामिका’ में संकलित ‘बादल राग’ छह से उद्धृत है। इसके रचयिता महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। इस अंश में बादलों के आगमन को क्रांति के रूप में वर्णित किया गया है। 

व्याख्या

वादल फिर-फिर कर बार-बार गर्जना करते हुए मूसलाधार रूप में बरस रहे हैं। इस वर्षा की ओर गंभीर वज्र जैसी डरावनी हुंकार को सुनकर संसार हृदय थाम कर भयभीत होता है। संसार भयंकर तपन से तप रहा था। अब सागर के विराट पक्ष पर ठंडी वायु तैर रही है। इसी प्रकार जब क्रांति का आगमन होता है, क्रांतिकारियों को घोर गर्जना होती है तो उसका प्रभाव भी व्यापक क्षेत्र पर पड़ता है। 

जिनके पास सुख के साधन होते हैं, वे क्रांति के आगमन से दुःखी हो उठते हैं। वर्षा भी छोटे-मोटे सुखों को अपने में समेटती आगे बढ़ जाती है। क्रांति भी उथल-पुथल करती छोटी-मोटी सुखों को नष्ट करती है। क्रांतिकारी का युद्ध घोष सजग बनता है। 

बादल भी तो यही करता है। पृथ्वी के भीतर सुप्त अवस्था में पड़े बीजों समान प्रभाव डालते हैं। क्रांति के समान सोई हुई जनता नींद को त्यागकर नई आशाएं एवं उत्साह से भर नूतन जीवन निर्माण में लग जाती हैं। संसार की जलन को देखकर ही तो बादल आते हैं। जनता के कष्टों की भयावहता ही क्रांति की जननी बनती है।

सौंदर्य बोध

कवि ने क्रांतिदूत के रूप में बादलों का आह्नान किया है। बादल और क्रांति के प्रभाव की समानता वर्णित है। ‘समीर-सागर’ में अनुप्रास व रूपक अलंकार है। ‘रण-तरी’ में रूपक अलंकार है तथा ‘सजग सुप्त’ में अनुप्रास अलंकार है। ‘बार-बार’, ‘फिर-फिर’ में पुनरुक्ति अलंकार है। छन्द विहीन कविता है। प्रकृति के कठोर रूप का वर्णन हुआ है। विभिन्न प्रकार के सुंदर बिंब है।

वर्षा से क्रांति का आहान कवि ने किया है। इसमें संस्कृत की तत्सम शब्दावली की अधिकता है। 


2 बादल राग कविता की सप्रसंग व्याख्या


अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर 

क्षत-क्षत हत अचल-शरीर, 

गगन स्पर्शी स्पर्द्धा धीर । 

हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार- 

शस्य अपार, 

हिल-हिल

खिल-खिल, 

हाथ हिलाते,

तुझे बुलाते, 

विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते ।

अट्टालिक नहीं है रे 

आतंक भवन

सदा पंक पर ही होता 

जल-विप्लव प्लावन,

क्षुद्र, प्रफुल्ल जलज से

सदा, छलकता नीर, 

रोग-शोक में भी हँसता है

शैशव का सुकुमार शरीर ।

शब्दार्थ — 

अशनि – पात — वंज्रपात। शापित — सोए हुए, मृत। उन्नत-बड़े-बड़े। क्षत-विक्षत-लहूलुहान, बुरी तरह से घायल । अचल शरीर- पर्वत, युद्ध में डटे रहने वाला वीर युद्धा। गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा आकाश को छूने की अभिलाषा, बड़े से बड़ा बलिदान करने का भाव। शस्य हरियाली। विप्लव-रव- क्रांति की हाहाकार, बाढ़ की आवाज। अट्टालिका—महल, ऊँचे ऊँचे भवन। पंक— कीचड़ । ‘जल-विप्लव – प्लावन – जल के द्वारा अपने में समा लेना, क्रांति की गोद में समा जाना। क्षुद्र नगण्य, तुच्छ प्रफुल्ल खिले हुए। जलज – कमल । शैशव बचपन । 

प्रसंग—

यह पद्यांश ‘अनामिका’ में संकलित ‘बादल राग’ से उद्धृत है। इसके रचयिता महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। प्रस्तुत अंश में बादल द्वारा की गई वर्षा व क्रांति के प्रभाव का वर्णन है।

व्याख्या

आकाश को छूने की होड़ करते हुए धीरे-गंभीर करने वाले बादल तथा क्रांति का उद्घोष करने वाले वीर वज्राघात से बड़े-बड़े वीरों को धराशायी कर देते हैं। बादल वज्राघात कर देते हैं। बादल वज्रापात से पर्वत की चोटियों को भी नष्ट-भ्रष्ट करता है, तो क्रांतिवीर बड़े-बड़े सैकड़ों गर्बीले बीरों को लहूलुहान करके घायल कर देते हैं अथवा मृत्यु को पहुँचा देते हैं। 

बादल के आगमन से छोटे-छोटे पौचों को प्रसन्नता होती है, चारों ओर हरियाली फैलती है । ये पौधे मानो अपनी प्रसन्नता प्रकट करते हुए हिल-हिलकर बादलों को आमंत्रित करते हैं। क्रांति से भी हमेशा लघुमानव प्रसन्न होता है। क्रांति का उद्घोष होते ही समाज का वंचित तबका छोटे लोगों का समाज प्रसन्न हो उठता है। 

क्रांतिकारियों को इन छोटे लोगों का ही आमंत्रण, समर्थन व सहयोग मिलता है। क्रांति से महलों में रहने वाले प्रसन्न नहीं होते। उनको अपने सुखों के छिन जाने का भय सताता रहता है। कमल कीचड़ में ही खिलता है। कमल के प्रफुल्ल स्वरूप से आनंद का जल टपकता ही रहता है। 

क्रांति छोटे लोगों के मुख पर प्रसन्नता लाती है। क्योंकि क्रांति करने वाले भी लघुमानव ही होते हैं। जिस प्रकार छोटा-सा बालक रोग-शोक के अवसरों पर भी हँसता है। उसी प्रकार क्रांति की उथल-पुथल भी लघु मानव को प्रसन्नता ही देता है। दुःख तो अट्टालिकाओं में मनाया जाता है।

सौंदर्य बोध – 

बादल के क्रांतिकारी स्वरूप के माध्यम से समाज के क्रांति के बाद बदले स्वरूप का उल्लेख है। क्रांति के पक्षधर छोटे लोग होते हैं। इस परिवर्तन से उनकी स्थिति में सुधार आता है। भाषा संस्कृत की तत्सम शब्दावली से बोझिल हो गई है। पौधे के हँसने-‘हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार’ में मानवीकरण अलंकार है। समस्त छंद में शेष अलंकार है तथा ‘शत-शत’, ‘हिल-हिल’, ‘खिल-खिल’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। पद्यांश छंद-विहीन है। साथ ही लय का ध्यान रखा गया है।


3. बादल राग कविता की सप्रसंग व्याख्या


रुद्ध कोष है, क्षुब्ध तोष 

अंगना -अंग से लिपटे भी 

आतंक, व्रज-गर्जन से बादल ! 

त्रस्त नयन-मुख ढाँप रहे हैं।

जीर्ण बाहू, है शीर्ण शरीर

तुझे बुलाता कृषक अधीर, 

ऐ विप्लव के वीर !

चूस लिया है उसका सार,

हाड़-मात्र ही है आधार, 

ऐ जीवन के पारावार !

शब्दार्थ — 

रुद्ध-रुक हुआ। कोप- खजाना। क्षुब्ध – खिन्न, दुखी। अंक — हृदय, गोद। त्रस्त डरे हुए। जीर्ण— जर्जर, पुराने। शीर्ण— क्षीण। कृषक— किसान। सार— मूल्यवान तत्त्व। हाड़-मात्र — अस्थि पंजर, कंकाल मात्र पारावार—हद, सीमा। 

प्रसंग — 

यह पद्यांश ‘अनामिका’ नामक संकलन में संकलित ‘बादल राग’ छह से उद्धृत है । इतके त्यपिता महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ है। इस अंश में कृषक की पीड़ा व उसके आमंत्रण का वर्णन है।

व्याख्या—

कवि बादल को संबोधित करते हुए उसे जीवन के पारावर (हद-सीमा) कहता है। बादल जीवन व जल दोनों ही देता है। क्रांति के आगमन पर धनी जन आतंकित हो उठाते हैं। वस्तुतः जीवन (जल) तो बादल पर ही निर्भर करता है। 

जल ही तो जीवन है। कृषक के लिए तो वे भावी संकट की आशंका से काँप उठते हैं। कृषक की दशा का वर्णन करते हुए कवि कहता किन बहुत ही क्षीण हो गए हैं। उनकी बड़ी जर्जरा है, बहुत भयभीत है। 

अतः अपने नेत्र और मुख को ढॉपकर निराश बैठे हैं। कृषक के शरीर में कोई सत्व नहीं रह गया है। अब अस्थिपंजर मात्र है। ऐसी स्थिति में बादल व क्रांतिवीर ही कृषक का कुछ हित कर सकते हैं। 

सौंदर्य बोध 

कृषक के माध्यम से दीन-हीन समाज की दयनीय अवस्था का वर्णन किया गया है। बादल कृषक को जल (जीवन) देता है और क्रांति सदैव दीन-हीन के हित में होती है। भाषा संस्कृत की तत्सम शब्दावली से युक्त है। साथ ही अनुपम बिंब-विधान है।

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बादल राग कविता के प्रश्न उत्तर


प्रश्न 1. अस्थिर सुख पर दुःख की छाया पंक्ति में दुख को छाया किसे कहा गया है। और क्यों ?

उत्तर—’अस्थिर सुख पर दुख की छाया’ पंक्ति में दुख की छाया क्रांति की आशंका को कहाँ गया है। जिनके पास सुख के साधन होते हैं, वे क्रांति से सदैव डरते रहते हैं। क्रांति उनका है तो कुछ छीनेगी जिन पर कुछ है। अतः सुविधा संपन्न लोगों का सुख अस्थिर होता है और क्रांति की संभावना उनको सदैव भयभीत करती रहती है। इसी प्रकार इसे दुख की छाया कहा है। 

प्रश्न 2. ‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर’ पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है ?

उत्तर- ‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर’ पंक्ति में क्रांति विरोधी गर्वीले वीरों को ओर संकेत है जो क्रांतिकारियों के वज्राघात से घायल होकर क्षत-विक्षत हो जाते हैं। अशनिपात से जहाँ पर्वत की चोटियाँ क्षत-विक्षत होती हैं, वहाँ क्रांतिकारियों के प्रहर से बड़े-बड़े वीर धराशायी हो जाते हैं। 

प्रश्न 3. विप्लव – रस से छोटे ही हैं शोभा पाते पंक्ति में विप्लव रस से क्या तात्पर्य है ? छोटे ही हैं शोभा पाते ऐसा क्यों कहा जाता है ? 

उत्तर—’विप्लव-रस से छोटे ही हैं शोभा पाते’ में विप्लव-रस से तात्पर्य क्रांति से है। वस्तुतः जब क्रांति होती है, तो उसका लाभ सामान्य जन, लघुमानव, छोटे लोग या सर्वहारा को ही मिलता। है। क्रांति उथल-पुथल करती है। संपन्न से कुछ छिनता है। अतः छोटे लोग ही लाभ में रहते हैं। इसी भाव को कवि ने ‘छोटी ही हैं शोभा पाते’ कहा है। 

प्रश्न 4. बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है ?

उत्तर- बादलों के आगमन से प्रकृति में अनेक प्रकार के परिवर्तन होते हैं। समीर बहने लगती है। बादल गर्जना करते हैं। मूसलाधार पानी बरसता है। व्रजाघात से पर्वत-शिखर क्षत-विक्षत हो जाते हैं। छोटे-छोटे पौधे खिल उठते हैं। कमलों से जल टपकने लगता है।

प्रश्न 5. पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों ?

उत्तर – प्रकृति का मानव के समान वर्णन मानवीकरण कहलाता है। इस पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया। प्रकृति व कठोर दो रूप होते हैं। हमें तो प्रकृति का कोमल रूप ही पसंद है, जिसमें आशाएँ हैं, नव-जीवन हैं, उल्लास व हर्ष है। छोटे पौधों का लहराना है। और पृथ्वी के भीतर पड़े बीज का अंकुरित होना है। प्रकृति का कठोर रूप तो भयभीत करता है, कांपता है, क्षत-विक्षत करता है। अतः वह प्रिय नहीं है। 

प्रश्न 6. कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है ? संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए ।

उत्तर—वस्तुतः संपूर्ण कविता में ही रूपक है। बादल को क्रांतिकारी रूपक के बल पर ही कहा गया है। कुछ रूपक इस प्रकार हैं- • समीर- – सागर, • रण-तरी, • मेरी-गर्जन, वज्र हुंकार, अचल-शरीर, वज्र-गर्जन ।

प्रश्न 7. कवि बादलों को किस रूप में देखता है ? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए । 

उत्तर- कवि बादलों को ‘विप्लव के वीर’ व ‘जीवन के पारावार’ के रूप में देखता है। वह उसे ‘विप्लव के बादल’ भी कहता है। कालिदास ने अपने ग्रंथ ‘मेघनाथ’ में बादल को दूत बनाया है। अपना बिंव इस प्रकार है-ज्येष्ठ का महीना बीत गया है। आषाढ़ के आगमन पर बादलों

को देखकर कृषक समाज ऊपर को मुख करके बादलों को निहार रहा है। बादल की हलकी सी गर्जन सुनकर मोर शोर करने लगे हैं। शीतल वायु बह रही है। 



प्रश्न 8. कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख । सुख के साथ अस्थिर विशेषता के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है ? 

उत्तर – ‘अस्थिर सुख’ जैसे अन्य शब्द-पद भी कविता में आए हैं। यथा-‘निर्दय-विप्लव’, ‘मुख्य तोष’, ‘प्लावित माया’, ‘विप्लव-रस’। ऐसे शब्द-पदों के प्रयोगों से कविता के अर्थ में विशिष्टता उत्पन्न होती है। यथा विप्लव में ‘निर्दय’ विशेषण के बाद क्रांति के भयावह रूप का संकेत है। ‘रव’ के पहले ‘विप्लव’ लगाने से आवाज की भयंकरता का बोध होता है। 

प्रश्न 9. ‘जंग के दग्धा हृदय पर निर्दय विप्लव की प्लावित माया’-द्वारा कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है ?

उत्तर—कवि के अनुसार बादल के भीतर सृजन और ध्वंस की शक्ति एक साथ समाहित होती है। कभी वह सूखा गिराकर अकाल की स्थिति पैदा कर देता है। ऐसी दशा में किसानो भूखों मरने की नौबत आ जाती है।

इसी प्रकार कभी बादल अतिवृष्टि करके भी जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देते हैं। ऐसी स्थिति में भी धन-जन की हानि होती है। इस प्रकार कवि ने बादलों को क्रांति एवं बदलाव है अग्रदूत के रूप में संबोधित किया है।

प्रश्न 10. ‘उर में पृथ्वी के, आशाओं से नवजीवन की, ऊँचा कर सिर’,- पंक्ति के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि पृथ्वी के हृदय में कौन सोए हैं। बादल बरसने के बाद उनकी स्थिति किसी प्रकार की हो गई है ? 

उत्तर — कवि के अनुसार पृथ्वी के हृदय में अंकुर सोए हुए हैं। बादल के बाद उनके नए – जीवन की आशाएँ प्रबल हो गई हैं और वे अपना सिर ऊँचा कर ताकने लग गए हैं।

प्रश्न 11. महत्त्वपूर्ण काव्यांशों का काव्य-सौंदर्य

फिर-फिर

बार-बार गर्जन

वर्षण है मूसलधार

हृदय थाम लेता संसार, 

सुन-सुन घोर वज्र- हुंकार ।

उत्तर- अर्थ प्रस्तुत काव्यांश ‘आरोह भाग-2’ में संकलित ‘सूर्यकांत त्रिचलि द्वारा रचित ‘बादल राग’ से उद्धृत है। कवि बादलों को क्रांति के दूत के स्वरूप में स्वीकार करत है। वह चाहता है कि बादल घोर गर्जन करते हुए मूसलाधार वर्षा करें। उस समय उनका धर गर्जन सुनकर सारा संसार अपना हृदय पकड़ कर रह जाए।

शिल्प-सौन्दर्य — 

(क) शुद्ध खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है। 

(ख) ‘हृदय थाम लेना’ मुहावरे का सशक्त प्रयोग हुआ है।

(ग) फिर-फिर, बार-बार, सुन-सुन में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है। काव्यांश के अंत में तुक का प्रयोग हुआ।

(ङ) तत्सम शब्दावली का प्रयोग हुआ है । 


FAQs


प्रश्न 1. ‘हृदय थाम लेता संसार’ पंक्ति के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि संसार अपन हृदय क्यों थाम लेता है ? 

उत्तर — वर्षाकाल में बादल घोर गर्जना करते हुए मूसलाधार बरसते हैं। ऐसे में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी प्रकार बादलों की घोर गर्जना सुन-सुनकर संसार अपना हृदय म लेता है। 

प्रश्न 2. बादल पर ‘निराला’ ने कितनी कविताएँ लिखी हैं और वे किस ग्रंथ संकलित हैं ? 

उत्तर- ‘निराला’ ने ‘बादल’ नामक कविता छह खंडों में लिखी है। इस दृष्टि से बादल संबंधित कविताएँ छह हैं। ये समस्त कविताएँ ‘अनामिका’ नामक संकलन में संकलित हैं।

प्रश्न 3. बादल को कवि ने विप्लव के बादल क्यों कहा है ? 

उत्तर—बादल व्यवस्था को उलट-पलट देता है। बादल कभी-कभी भयंकर रूप धारण क लेते हैं। मूसलाधार वर्षा के बाद बाढ़ जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। बादल का या विनाशकारी रूप विप्लवी बन जाता है। अतः कवि ने उसको विप्लव विशेषण दिया है। 

प्रश्न 4. ‘तुझे बुलाता कृषक अधीर’ का आशय स्पष्ट कीजिए|

उत्तर— ग्रीष्म ऋतु में जल के अभाव में कृषक समुदाय तरह-तरह के कष्टों को सहन करत है। बादल की प्रतीक्षा वह बड़ी अधीरता से करता है क्योंकि उसके बाद ही नई फसल की बुद्ध होती है और पिछली फसल लहलहा उठती है। अतः कृषक बादल को आमंत्रित करता है और अधीरता से उसके आने की बाट जोहता है।


Conclusion


नमस्कार Students,  मैंने इस पोस्ट को CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परीक्षा के लिए काफी सहायता प्रदान करेगा । तो मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें । 


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