NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 रुबाइयाँ, गज़ल Easy Summary

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 

Table of Contents

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 रुबाइयाँ, गज़ल

कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameरुबाइयाँ, गज़ल
कवि | Poetफिराक गोरखपुरी | Firaq Gorakhpuri
अध्याय संख्या | Chapter number09
अध्याय प्रकार | Chapter typeकविता | POEM
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


फिराक गोरखपुरी का जीवन परिचय class 12 | Firaq Gorakhpuri biography


फिराक गोरखपुरी का जन्म 28 अगस्त, 1896 ई. को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ है। इनका मूल नाम रघुपति सहाय था। गोरखपुर में रहने के कारण ये फिराक गोरखपुरी के नाम से रचना करने लगे। इन्होंने 

अपनी शिक्षा राम-कृष्ण की कहानियों से प्रारंभ की। इन्होंने अपनी उच्च शिक्षा अरबी, फारसी और अंग्रेजी में की। अध्ययन पूर्ण कर ये 1917 ई. में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए। 

Class 12 Hindi Aroh Chapter 9
फिराक गोरखपुरी का जीवन परिचय class 12

बाद में ये स्वराज्य आंदोलन में कूद पड़े और सन् 1918 ई. में इन्होंने सरकारी नौकरी त्याग दी। सन् 1920 ई. में आदोलन में कूद पड़े। इस कारण 18 महीने की सजा हुई। अन्त में इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विषय का अध्यापन कार्य भी किया। 

इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार (‘गुलेना’ के लिए क्या दिय संघ द्वारा नेहरू अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। 1983 ई. में इनका निधन हो गया।

रचनाए इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं– गुले नगमा, रंग-ए-शायरी उर्दू गजलगोई और बज्मे जिंदगी आदि ।

साहित्यिक विशेषताएँ-फिराक गोरखपुरी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को जोड़ने की भरपूर कोशिश की है। उन्होंने आम आदमी के दुख-दर्द के अनुभव कर रचनाओं (विशेषकर शायरी) के रूप में अभिव्यक्त किया है।

उन्होंने प्रकृति, मीसम और भौतिक जगत को अपनी रचनाओं का विषम बनाया है। भाषा-शैली- फिराक गोरखपुरी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से परंपरागत भाववोध और शब्द भण्डार के उपयोग के साथ ही नयी भाषा और नए विषय जोड़े। इनकी भाषा लाक्षणिक और मुहावरेदार है।


रुबाइयाँ का सारांश


माँ व उसके बालक का स्नेह संबंध संभवतः संसार के समस्त प्रेम में अनूठा व पवित्र है। इन रुबाइयों में कवि ने कुछ ऐसी ही चित्र उकेरे हैं।

1. बालक की माँ की गोद में चाँद जैसा सुंदर बालक है। वह उसे हाथों में लेकर झुला रही है। वह उसे बार-बार हवा में उछालती है, तो बालक प्रसन्नता से किलकारी मारता है। 

2. माँ ने बच्चे को नहला दिया है। उसके उलझे बालों में कंधा किया है। माँ उसे अपने घुटनों में लेकर कपड़े पहना रही है और बालक बड़े प्यार से माँ के मुख को निहार रहा है। 

3. दीवाली का त्योहार है। घरों को लिपाई-पुताई करके सजाया गया है। घर में बच्चों को खाने के लिए चीनी के खिलौने का धान की खीला आई हैं। चेहरे पर एक आकर्षण लिए गृहस्वामिनी घर में हर स्थान पर दीप जला रही हैं।

4. बालक ने जिद की है कि चंद्रमा लूँगा। बालक है, अभी ज्ञान नहीं है, तभी तो चंद्रमा को पाने की जिद्द कर रहा है। बालक की जिद्द पूरी करने का माँ ने उपाय खोजा। उसे शीशा दिखाते हुए बोली देख दर्पण में ही चंद्रमा उतर आया है। 

5. रक्षाबंधन का दिन है। आकाश में घटा छाई है। बहन ने चाँदी के लच्छे पैरों में पहने हैं और भाई के हाथों में राखी बाँध रही है।


गजल का सारांश


गजल का प्रत्येक ‘शेर’ स्वतंत्रता अस्तित्व को रखता है। बहुत छोटा-सा छंद है। यह हिंदी के दोहा, सोरठा, बरठे के समान है। अतः इनका सार नहीं दिया है। छात्र इनकी व्याख्या देखें ।


1. रुबाइयाँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


आँगन के लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी 

हाथों में झुलाती है उसे गोद भरी 

रह-रह के हवा में जो लोका देती है।

गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी । 

शब्दार्थ

लोका देना- उछाल-उछालकर प्यार करने की एक क्रिया।

प्रसंग——

यह छंद हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 से लिया गया है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इस अंश में नारी के द्वारा बालक के खिलाने का वर्णन है।

व्याख्या—

माँ ने अपना बालक गोद में ले रखा है। बालक चाँद के समान सुंदर है। माँ घर के आँगन में खड़ी है। बालक से जिसकी गोद भर गई है, ऐसी माँ अपने चाँद के टुकड़े जैसे बालक को हाथों में लेकर झुला रही है और बार-बार उसे हवा में उछालकर अपने प्यार को प्रकट कर रही है। माँ का यह खिलाना बालक को अच्छा लगता है और उसके खिल-खिलाकर हँसने की आवाज घर में गूंज रही है।

सौंदर्य-बोध- 

बालक की हँसी और माँ के मन की प्रसन्नता का वर्णन है। समस्त छंद विंवात्मक है। भाषा सरल व चित्रात्मक है। ‘लोका देनी’ देशज प्रयोग है। ‘रह-रह’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। छंद रुबाई है। और वात्सल्य रस है। ‘लोका देना’ विलक्षण प्रयोग है। 


2.रुबाइयाँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


नहल के छलके छलके निर्मल जल से

उलझे हुए गेसुओं में कंधी करके 

किए प्यार से देखता है बच्चा मुँह को

जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े । 

शब्दार्थ

निर्मल-स्वच्छ गेसुओं वालों। पिन्हाती-पहनाना। 

प्रसंग– 

यह छंद हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 से लिया गया है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी है। इस अंश में माँ द्वारा बालक के स्नान, बाल संवारने व कपड़े पहनाने का वर्णन है। व्याख्या- माँ ने बच्चे को निर्मल जल से स्नान कराया है। वह बालक को जल के उछाल देकर खिला रही है। स्नान के बाद उसके उलझे हुए बालों में कंघी करके उनको सुलझा रही है। जब माँ अपने घुटने के मध्य बालक को लेकर कपड़े पहनाती है, तब बालक प्यार भरी दृष्टि से माँ को निहारता है। 

सौंदर्य-बोध—

स्नान व उसके बाद की क्रियाओं का वर्णन है। पद के चारों चरणों में चार बिंब हैं। पद के आधार पर चित्र बनाया जा सकता है। छंद रुबाई है। भाषा सरल व प्रभावी है। ‘छल्के–छल्के’ के पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है तथा वात्सल्य रस है। ‘घुटनियों लेकर कपड़े पिन्हाना’ व ‘गेसुओं में कंघी करना विलक्षण प्रयोग है।


3.रुबाइयाँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


दीवाली की शाम घर पुते और सजे 

चीनी के खिलौने जगमगाते लावे 

वे रूपवती मुखड़े पै इक नर्म दमक

बच्चे के घरौंदे में जलती है दिए । 

शब्दार्थ-

लावे – धान की खीला। नर्म-कोमल। दमक प्रकाश घरौंदे – बच्चों द्वारा रेत में बनाए घर 

प्रसंग—

यह छंद हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 से उद्धृत है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इस छंद में दीवाली का वर्णन है।

व्याख्या–

दीपावली की शाम है। घर लिप-पुतकर सजे हुए हैं। घर में बच्चों के लिए चीनी के खिलौने व धान की लावे आई है। गृहस्वामिनी सजधज कर तैयार हो गई है। उसके चेहरे पर सौंदर्य की आभा झलक रही है ! वह जहाँ समस्त घर में स्थान-स्थान पर दीपक जला रही है, वहाँ बच्चों के द्वारा बनाए गए घरों (घरौंदों) में दीपक रखे हैं।

सौंदर्य-बोध — 

दीवाली के अवसर पर सजी-धजी गृहस्वामिनी के द्वारा किए दीप प्रज्वलन का वर्णन है। भाषा सरल व चित्रात्मक है। छंद रुबाई है। छंद के प्रत्येक चरण में बिंब है। साथ ही ‘रूपवती मुखड़ा’, ‘नर्म दमक’ के विलक्षण प्रयोग है।


4. रुबाइयाँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


आँगन में तुनक रहा है जिदयाया है 

बालक तो हुई चाँद पै ललचाया है। 

दर्पण उसे दे के कह रही है 

माँ देख आईने में चाँद उतर आया है

शब्दार्थ — 

ठुनक—बालक का धीमे-धीमे रोना रोने का बहाना जिदयाया— हठ करने वाला दर्पण – शीश, आईना आईने-दर्पण, शीशा ।

प्रसंग—

यह छंद हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 से लिया गया है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इस अंश में कवि ने बालक की जिद व माँ की चतुराई का वर्णन किया है ।

व्याख्या—

बालक ने चंद्रमा लेने की हठ कर रखी है। माँ उसे चंद्रमा कैसे दिलाए हैं। अतः अपनी जिद पूरी न होती देख बालक धीरे-धीरे ऐसे रो रहा है, मानो रोने का नाटक कर रहा हो। वह अभी बालक है। अतः अपनी जिद की असंभव पूर्ति को नहीं जानता। 

वह तो चंद्रमा ही लेगा। अतः माँ को एक युक्ति सूझी। उसने बालक को दर्पण देते हुए कहा कि देख चंद्रमा दर्पण में उत्तर आया है। 

सौंदर्य-बोध 

बालक की स्वाभाविक जिद का वर्णन है। माँ की चतुराई प्रशंसनीय है। दर्पण में उतर आना सुंदर बिंब है। भाषा सरल व प्रभावी है। ‘जिदयाया’ देशज प्रयोग है । 

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

5. रुबाइयाँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली

छायी है घटा गगन की हल्की-हल्की 

बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे 

भाई के हैं बाँधती चमकती राखी ।

शब्दार्थ-

रस की पुतली रसमय परिवेश घटा बादल लच्छे पैरों में नारियों द्वारा पहने वाले चाँदी के आभूषण। 

प्रसंग – 

यह छंद हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 से लिया गया है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इस अंश में रक्षाबंधन के दिन बहन द्वारा भाई को राखी बाँधने के समय का वर्णन है।

व्याख्या—

सावन मास का अंतिम दिन रक्षाबंधन का पुनीत पर्व है। भाई-बहन के प्रेम की अभिव्यक्ति का अवसर । इस दिन की प्रातःकाल अत्यंत सुहावनी व रसमयी प्रतीत होती है। आकाश में हल्की-हल्की बादल छायी हुई है। बहन ने अपने पैरों में बिजली की चमकते के लच्छे पहने हैं और भाई के हाथों में चमकीली राखी बाँध रही है। हुए चाँदी

सौंदर्य बोध बहन-भाई के पर्व रक्षाबंधन का सजीव वर्णन है। भाषा सरल व प्रसाद गुण युक्त है। छंद के अंतिम तीन चरणों में बिंब है। रस की पुतली’ विलक्षण प्रयोग है। हल्की-हल्की’ में पुनरुक्ति प्रकाशित है। छंद रुबाई है।


1. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


नौरस गुंचे पंखड़ियों की नाजुक गिरहें खोले हैं 

या उड़ जाने को रंगों-बू गुलशन में पर तोले हैं।

शब्दार्थ –

नौरस—साहित्य के नव रस गुंचे—कली। नाजुक — कोमल गिरहें गाँठ । रंगो-बू— रंग व गंध गुलशन-बाग। प्रसंग ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचियता फिराक गोरखपुरी हैं।

व्याख्या—

इस छंद में प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि बाग में पुष्पों की कलियाँ कोमल मधुर भावों को जाग्रत करती हैं, हृदय में नव रस का संचार करती हैं अथवा ऐसा प्रतीत होता है, मानो रंग व गंध बाग से उड़ जाने के लिए पंख फड़फड़ा रहे हैं । 

सौंदर्य-बोध- 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार श्रृंगारमयी रचना है।


2. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


तारे आँखें झपकावें हैं जर्रा जर्रा सोये हैं 

तुम भी सुनो हो यारों ! शब में सन्नाटे कुछ बोले हैं

शब्दार्थ —

झपकाना – टिमटिमाना। जर्रा जर्रा — कण-कण । शब-रात । 

प्रसंग — 

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं।

व्याख्या – 

रात्रि का समय है, तारे टिमटिमा रहे हैं, प्रकृति का कण-कण सो रहा है किंतु कवि को कुछ सुनाई दे रहा है। वह कहता है कि मित्रों ! तुम भी ध्यान से सुनो। तुम भी ध्यान से सुनो। रात्रि का सन्नाटा भी कुछ बोलता है। 

सौंदर्य-बोध-—

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवीय आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार शृंगारमायी रचना है। 


3.गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


हम हों या किस्मत हो हमारी दोनों को इक ही काम मिला 

किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं । 

शब्दार्थ-

किस्मत—भाग्य। इक एक। रो लेवेरो लेती हैं। रो ले हैं-रो लेते हैं।

प्रसंग 

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराद गोरखपुरी हैं। व्याख्या-कवि कहता है कि हमें और हमारे भाग्य दोनों को ही एक काम मिला है। हमारा भाग्य हम पर रोता है, तरस खाता है और हम अपने भाग्य पर रोते हैं। अर्थात् हमारा भाग्य अच्छा नहीं है। भाग्य भी हमारी स्थिति पर दुःखी है।

सौंदर्य बोध—

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी है। पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार श्रृंगारमयी रचना है। 


4. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


जो मुझको बदनाम कर रहे हैं काश वे इतना सोच सकें

मेरा परदा खोले हैं या अपना परदा खोले हैं।

शब्दार्थ – 

काश-शायद, संभवतः । परदा – रहस्य ।

प्रसंग—

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। 

व्याख्या—

कवि कहता है कि जो लोग मेरी बुराई करते हुए मुझे बदनाम करते हैं, शाब्द वे इतना सोच लेते कि मेरे रहस्यों के उद्घाटन करते समय वे अपने ही रहस्यों को खोल रहे हैं। आशय यह है कि जब हम दूसरे की बुराई करते हैं, तो हम अपने स्वरूप की भी रक्षा नहीं कर पाते।

सौंदर्य-बोध- 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार श्रृंगारमयी रचना है।


5. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


ये कीमत भी अदा कर रहे हैं हम बदरुस्ती-ए-होशो हवास

तेरा सौदा करने वाले दीवाना भी हो ले हैं।

शब्दार्थ – 

कीमत — मूल्य बदरूस्ती-ए-होशो हवास — विवेक के साथ।

प्रसंग —

 ये गजल पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं।

व्याख्या – 

आशिक अपने माशूक से कहता है कि हम पूरे होशो हवास अर्थात् विवेक के साथ तुम्हारे प्रेम की ये कीमत अदा कर रहे हैं। कारण यह है कि तुझे पाने का सौदा करने वाले दीवाना भी बनने को तैयार रहते हैं।

सौंदर्य बोध – 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुमूल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार शृंगारमयी रचना है। 


6. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


तेरे गम का पासे – आदब है कुछ दुनिया का ख्याल भी है 

सबसे छिपा के दर्द के मारे चुपके चुपके से ले हैं 

शब्दार्थ –

गम-दुख । पासे अदब-सम्मान का भाव। खयाल — ध्यान। प्रसंग- ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरी है।

व्याख्या–

प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है कि हमें तेरे दुख के प्रति भी सम्मान भाव है और दूसरे हमें दुनियाँ का भी ध्यान है। तेरे प्रति अपने प्रेम को सबसे छिपाते हुए हम अपने अपने दर्द के कारण चुपके-चुपके रो लेते हैं।

सौंदर्य-बोध- 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, मासूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू-शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार श्रृंगारमयी रचना है। 


7. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


फितरत का कायम है तवाजुन अलमे-हुस्नो-इश्क में भी

उसको उतना ही पाते हैं खुद को जितना खो ले हैं

शब्दार्थ — 

फितरत — आदत तवाजुन—संतुलन। अलमे-हुस्नो-इश्क-प्रेम व सौंदर्य की स्थिति में भी।

प्रसंग —

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। 

व्याख्या-

प्रेमी अपने धैर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि प्रेम व सौंदर्य की अधिकता के बाद भी हमारी आदत का संतुलन बना हुआ है अर्थात् स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आता है, क्योंकि प्रेमी को पाने के लिए अपने को खोना पड़ता है। प्रेम में जो जितना डूबता है, उतना ही प्रेम के सामीप्य का अनुभव करता है।

सौंदर्य-बोध– 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क को समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार शृंगारमयी रचना है।


8. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


आबो ताब अशआर न पूछे तुम भी आँखों रक्खो हो

ये जगमग वैतों की दमक है या हम मोती रोले हैं

शब्दार्थ- 

आवो-ताब अश्आर-चमक दमक के साथ। चैत- शेर ।

प्रसंग—

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी है। 

व्याख्या— 

कवि कहता है कि चमक-दमक की बातें न करें, तुम्हारे भी आँख हैं, स्वयं सौंदर्य को देखो। ये जगमगाते हुए शेर हैं, उनकी चमक-दमक है अथवा मे समझो ये हमारे हृदय का पीड़ा है। हमारे आँसू ही छंद बन गए हैं।

सौंदर्य-बोध- 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार शृंगारको रखना है। 


9. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


ऐसे में तू याद आए हैं अंजुमने -मये में रिंदों को

रात गए गर्दू पै फरिश्ते बाबे गुनह जगं खोले हैं 

शब्दार्थ — 

अंजुमने-मय— शराब की महफिल। रिंद — शराबी गर्दू-आकाश, आसमान । फरिश्ते, देवदूत बाबे- – गुनह— पाप का अध्याय । 

प्रसंग—

यै गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं।

व्याख्या – 

प्रेमी कहता है कि शराबियों को शराब की महफिल में तू याद आती है, जो मुझे लगता है कि मानो आकाश देवदूत पाप के अध्याय रात के बीच में खोल रहे हैं। प्रेमी को शराबियों के मध्य अपनी प्रेमिका का स्मरण अच्छा नहीं लगता। यह उसे पाप का अध्याय प्रतीत होता है

सौंदर्य बोध—

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवीय आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारो, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी के पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार श्रृंगारमयी रचना है। 


10. गजल काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं शब्दार्थ


सदके फिराक एजाजे-सुखन के कैसे उड़ा ली ये आवाज

इन गजलों के परों में तो ‘मीर’ की गजले बोले हैं 

शब्दार्थ 

पदके — प्रणाम। एजाजे सुखन—बेहतरीन शायरी ।

प्रसंग- 

ये गजल हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-2 में संकलित है। इसके रचयिता फिराक 

व्याख्या——

कवि अपने काव्य की प्रशंसा करते हुए कहता है कि मेरी बेहतरीन शायरी गोरखपुरी हैं। प्रकार ऐसे गुण अपना लिए हैं कि इन गजलों को सुनकर लोग यह अनुभव करते हैं कि इन ज मैं मीर की गजलों की समानता है। 

सौंदर्य-बोध- 

प्राकृतिक सौंदर्य, मानवी आकर्षण, प्रेम की सघनता, इश्क की समझदारी, माशूक की स्मृति आदि भावों का वर्णन हुआ है। भाषा में उर्दू शब्दों का बाहुल्य है जो हिंदी है पाठकों के लिए क्लिष्टता पैदा करता है। उर्दू साहित्य के अनुसार शृंगारमयी रचना है।


NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 Questions Answers



रुबाइयाँ पाठ के प्रश्न उत्तर कक्षा 12


प्रश्न 1. शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है ?

उत्तर—कवि ने राखी के लच्छों को बिजली की चमक के समान बताया है से वह यह कहना चाहता है कि बहनें अपनी भाइयों की कलाई सजाने के लिए रंग-बिरंगी राखी खरीदती हैं। इन राखियों को चुनते समय उनकी चमक का विशेष ध्यान रखती हैं।

प्रश्न 2. खुद का परदा खोलने से क्या आशय है ? 

उत्तर—जब व्यक्ति दूसरे के दोषों का वर्णन करता है अथवा दूसरों की बुराई करता है, तब उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि स्वयं उसका स्वरूप भी प्रकट होता है। हमारे बारे में भी लोग अच्छी धारणा नहीं बनाएँगे, यदि हम दूसरों के दोषों का वर्णन करते हैं। 

प्रश्न 3. किस्मत हमको रो लेवे हैं हम किस्मत को रो ले हैं- इस पंक्ति में शायर की किस्मत के साथ तनातनी का रिश्ता अभिव्यक्त हुआ है। चर्चा करें ।

उत्तर- हम अपने भाग्य पर दुखी हों या यह कहना कि भाग्य हमें पाकर दुखी है, कथन का अनूठा ढंग है। इसके माध्यम से कवि यह कहता है कि हमारा भाग्य साथ नहीं दे रहा है। हमारी किस्मत ही अच्छी नहीं है।

प्रश्न 4. टिप्पणी करें। 

(क) गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता ।

(ख) सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व ।

उत्तर—

(क) गोदी का चाँद पुत्र है। यह अपना जाया है। इस पर अपना पूर्ण अधिकार है। आकाश का चाँद सबका है। यह गोद के चाँद का मामा है किंतु वह तो सभी का मामा है। गोदी। का चाँद गगन के चाँद को शीशे में ही पा सकता है।

(ख) सावन की घटाओं के मध्य में ही बहन-भाई का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन आता है। सावन वर्षा ऋतु का ही महीना है। रक्षाबंधन सावन के अंतिम दिन पड़ता है। सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है, वही संबंध भाई का बहन से है।


गजल पाठ के प्रश्न उत्तर कक्षा 12


प्रश्न 1. रुबाई से क्या आशय है ?

उत्तर — रुबाई उर्दू और फारसी का एक छंद या लेखन शैली है। इसकी पहली, दूसरी और – चौथी पंक्ति में तुक (काफिया) मिलाया जाता है तथा तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है।

प्रश्न 2. बच्चों को चंद्रमा से क्यों लगाव रहता है ? 

उत्तर- बच्चों को चंद्रमा से लगाव पैदा करने वाली स्वयं माताएँ ही होती हैं। कभी रोते हुए बालक को चंद्रमा दिखाकर कहती हैं देख आसमान पर चंदा मामा है और कभी कड़ती है देख, कैसा खिलीना है। स्वयं चंद्रमा में अपना भी आकर्षण है। अतः बालक उसे पाने के लिए यदा-कदा जिद भी कर बैठता है।

महत्वपूर्ण काव्यांशों का काव्य सौंदर्य निम्नलिखित 

नहला के छल्के-छल्के निर्मल जल से

उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके

किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को

जय घुटनियों में ले के है पिलाती कपड़े ॥

उत्तर- भाव- सौन्दर्य – 

प्रस्तुत ‘रूबाई’ फिराक गोरखपुरी द्वारा रचित है। इन्होंने इसके माध्यम से माँ का अपनी संतान के प्रति ममत्व-भाव को प्रकट किया है। एक माँ अपनी संतान को स्वस्थ और सुखी देखना चाहती है। छोटे बच्चे को नहलाकर किस प्रकार एक माता उसके बालों में कंघी करती है। बालक भी उसकी भावना को बड़े प्यार से देखता है क्योंकि माँ उसे अपने घुटनों के बीच में बिठाकर उसे कपड़े पहनाती है।

शिल्प-सौन्दर्य – 

(क) उर्दू-फारसी मिश्रित शब्दावली का प्रयोग किया है।

(ख) गेसुओं में कंघी करना घुटनियों में लेकर कपड़े पिन्हाना आदि शब्दों द्वारा सामाजिक जीवन का विलक्षण प्रयोग किया है।

(ग) पिन्हाना, घुटनियों, छलकना जैसे लोक भाषा के अनूठे शब्दों का प्रयोग किया है। 

(घ) ‘वात्सल्य रस’ का सटीक प्रयोग हुआ है।


FAQs


प्रश्न 1 अपनी रुबाइयों में फिराक में कुछ विलक्षण प्रयोग किए हैं उनकी सूची बनाइए । 

उत्तर- हिंदी-उर्दू लोकभाषा के शब्दों को लेकर फिराक ने कुछ विलक्षण प्रयोग किए हैं। यथा-रह-रह के हवा जो लोका देती है। उलझे हुए गेसुओं में कंघी करना। घुटनियों में लेके है। पिन्हाती कपड़े। रूपवती मुखड़े पे इक नर्म दमक । रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली । 

प्रश्न 2. फिराक की रुबाइयों व गजल से कुछ बिंबों के उदाहरण दीजिए । 

उत्तर—फिराक ने बिंबों का प्रचुरता से प्रयोग किया है। कुछ उदाहरण देखें- गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके। जब घुटनियों में लेके हैं पिन्हाती कपड़े। चीनी के खिलौने जगमगाते लावे। बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे। तारे धे झपकायें है चुपके चुपके से से है।


Conclusion


नमस्कार Students, मैंने इस पोस्ट को (Class 12 Hindi Aroh Chapter 9) CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परीक्षा के लिए काफी सहायता प्रदान करेगा । तो मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें । 


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